असिन के लंडन ड्रीम्स

पिछले साल आई ब्लॉकबस्टर फ़िल्म 'गजनी' से अभिनेत्री असिन ने हिंदी फ़िल्मों में कदम रखा और काफ़ी तारीफ़ बटोरी.

इससे पहले वे कई हिट दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में काम कर चुकी हैं. अब वे फ़िल्म 'लंडन ड्रीम्स' में सलमान खान और अजय देवगान के साथ नज़र आएँगी.

26 अक्तूबर को आपका जन्मदिन है. पहले तो आपको जन्मदिन की मुबारकबाद.

बहुत-बहुत शुक्रिया. मैं इन दिनों जश्न के मूड में हूँ. पहले त्योहारों का मौसम था, दीवाली थी, अब मेरा जन्मदिन है और फिर महीने के आख़िर में मेरी फ़िल्म 'लंडन ड्रीम्स' रिलीज़ हो रही है. इससे अच्छा और क्या हो सकता है.

गजनी के बाद लोगों को आपकी दूसरी हिंदी फ़िल्म का इंतज़ार था. किस तरह की फ़िल्म है लंडन ड्रीम्स?

वैसे तो मैं हिंदी फ़िल्म गजनी में काम कर चुकी हूँ लेकिन लंडन ड्रीम्स मेरी पहली असल बॉलीवुड फ़िल्म है क्योंकि गजनी तो रीमेक थी. लंडन ड्रीम्स कहानी है म्यूज़िकल बैंड की जिसका नाम है लंडन ड्रीम्स. अजय देवगन और सलमान खान इस बैंड के लीड गायक हैं. दो नए लड़के भी हैं इस बैंड में- रणविजय जो एमटीवी रोडिज़ में थे और आदित्य चैनल वी के वीजे थे. मैं डांसर के रोल में हूँ. ये कहानी है इन लोगों के आपसी रिश्तों की.

आपने डांसर को रोल किया है. नृत्य एक ख़ूबसूरत कला है. आपको कितना शौक रहा है नृत्य का असल ज़िंदगी में?

तीन साल की उम्र से ही मैं नृत्य सीख रही हूँ- भारतीय शास्त्रीय और लोक नृत्य. तो लंडन ड्रीम्स में अपने किरदार के साथ ये एक समानता है- दोनों को डांस अच्छा लगता है. मैं ख़ुद को संगीत और नृत्य के ज़रिए अभिव्यक्त करूँ., ये मुझे बहुत अच्छा लगता है.

आपकी नई फ़िल्म की ही बात करते हैं. अजय और सलमान करीब 10 साल बाद एक साथ पर्दे पर नज़र आएँगे. दोनों बड़े स्टार हैं. कैसा रहा इनके साथ काम करना?

अजय देवगन और सलमान खान के पास बरसों का अनुभव है, उनके हज़ारों प्रशंसक हैं. उनकी लार्जर दैन लाइफ़ छवि है लेकिन बतौर सह अभिनेता वो बहुत ही विनम्र हैं. जब आप इतने अनुभवी सितारों के साथ काम करते हैं तो कहीं न कहीं ये उनके ऊपर होता है कि वो नए कलाकारों को सहज महसूस करवाएँ. अजय-सलमान ने ऐसा ही किया. उन दोनों की आपस में भी बहुत बनती है.

लंदन में शूट करने का अनुभव कैसा रहा?

लंदन मैं पहली बार गई थी तो वहाँ जाकर भी बहुत अच्छा लगा. मैने बहुत सारी शॉपिंग की वहाँ पर...अपने लिए नहीं, फ़िल्म में मैने जो किरदार निभाया है उसके इस्तेमाल के लिए. असल ज़िंदगी में अपने लिए शॉपिंग करनी हो तो मुझे कुछ समझ में ही नहीं आता.

आपका नाम असिन काफ़ी अलग सा है. क्या मायने हैं असिन के?

असिन दो शब्दों से बना है. पहला तो हिंदी का ‘अ’ और दूसरा है अंग्रेज़ी का शब्द सिन (sin) यानी पाप. दोनों को मिला दें तो बनेगा असिन यानी निष्पाप. जैसे हिंसा के आगे अ लगाने से अहिंसा हो जाता है वैसे ही अंग्रेज़ी के शब्द सिन के आगे अ लगाकर असिन बनाया गया है. मेरे माता-पिता की सृजनशीलता का नतीजा है ये नाम. काफ़ी सारे लोगों को लगता है कि ये मेरा स्क्रीन नाम है जिसे मैने फ़िल्मों में आने के बाद रखा है. लेकिन जन्म से ही मेरा नाम असिन है.

हिंदी फ़िल्म उद्योग में काम करते हुए, प्रतिस्पर्धा के बीच भी ये मुमकिन है कि बाकी अभिनेत्रियों से दोस्ती हो?

मुझे नहीं लगता कि फ़िल्म उद्योग में दोस्त ढूँढना मुश्किल है. बहुत सी अभिनेत्रियाँ मेरी दोस्त हैं जैसे दीपिका, सोनम और अनुष्का. मीडिया तो हम सब के बीच प्रतिस्पर्धा के बातें छापता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं है. मैं किसी को लेकर असुरक्षित महसूस नहीं करती. बॉलीवुड में सबने मुझे बहुत प्यार दिया है. जब मैं गजनी के लिए फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड लेकर स्टेज से उतरी थी तो प्रीति ज़िंटा ख़ास तौर पर मेरे पास आईं और कहा कि हमारी इंडस्ट्री में आपका स्वागत है.

अमित जी, अभिषेक, सुष्मिता सबने मेरा स्वागत किया. पता नहीं लोग ऐसा क्यों सोचते हैं कि यहाँ दोस्त बनाना मुश्किल काम है.

नए कलाकारों की बात करें तो लोग कहते हैं कि असिन से उन्हें बहुत उम्मीदें हैं.

ये एक कॉम्लिमेंट हैं और उम्मीद करती हूं कि मैं इन आशाओं पर खरी उतर सकूँ. इससे आपके ऊपर दवाब भी बढ़ जाता है कि आप अच्छा काम करें.

आपने दक्षिण की कई फ़िल्में की हैं और कई पुरस्कार भी जीते. तो हिंदी फ़िल्मों में आना महज़ संयोग था या आपका पहले से ही इरादा था बॉलीवुड में आने का?

मैने ऐसा कुछ सोच कर नहीं रखा था कि मैं हिंदी फ़िल्मों में आऊँगी.ये इत्तेफ़ाक था. मैं नवीं कलास में पढ़ती थी, तब मॉडलिंग शुरु की थी और विज्ञापन करती थी. 15 साल की उम्र में मुझे पहली दक्षिण की फ़िल्म मिली.

2005 में मेरी तमिल फ़िल्म गजनी काफ़ी बड़ी हिट हुई. आमिर खान ने भी फ़िल्म देखी और मुझे फ़ोन किया. उसके बाद प्रोडक्शन हाउस से फ़ोन आया कि वे गजनी को हिंदी में बना रहे हैं और चाहते हैं कि मैं इसमें भी काम करुँ. इस तरह मुझे आमिर खान के साथ हिंदी फ़िल्म में काम मिला. इसी दौरान मुझे लंडन ड्रीम्स मिली. ये सुखद संयोग था.

गजनी की कल्पना ऐसा किरदार था जिसने लोगों के दिलों को छू लिया. असल ज़िंदगी में भी असिन वैसी ही हैं?

मैं सोच-समझकर किसी ख़ास तरह की छवि बनाए रखने की कोशिश नहीं करती लेकिन मैं भाग्यशाली हूँ कि लोग मुझे अच्छी नज़र से देखते हैं, मेरे बारे में अच्छा सोचते हैं. ये सच है कि मैं ख़ुद की एक झलक कल्पना के किरदार में देखती हूँ. जब फ़िल्म रिलीज़ हुई थी तो मेरे कई दोस्तों ने मुझसे ये कहा भी था.

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