ओसियान में कुछ नया

गुलज़ार

ओसियान फ़िल्म समारोह में 'लाइफ़ टाइम अचीवमेंट' का एवार्ड पाने वाले फ़िल्मकार गुलज़ार कहते हैं, “ये एक नया अध्याय, नया प्रयोग है. इससे लोग फ़िल्मों के बारे में सीखेंगे और लोग फ़िल्मों की तकनीक के विभिन्न पहलुओं जैसे फ़ोटोग्राफ़ी, कला निर्देशन, संगीत रचना, गीत लिखना वगैहरा से रुबरु हो सकेंगे.”

दिल्ली में चल रहे ओसियान फ़िल्म समारोह में इस बार सिनेमा की शिक्षा पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है.

30 अक्तूबर तक चलने वाले इस समारोह में अब से ज़ोर है कि दर्शक फ़िल्मकारों से बातचीत कर सकें. साथ ही कई सेमिनार, लेक्चर और संगोष्ठियां भी आयोजित की जा रही हैं.

भारत में पिछले कुछ साल से बन रहीं प्रयोगात्मक फ़िल्मों के निर्देशक गहराई से फ़िल्मों के निर्माण और शिक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर और गहन विश्लेषण पेश कर रहे हैं.

नया सिनेमा

फ़िल्मों की शिक्षा में अहम भूमिका निभाएगा ओसियान समारोह का ‘न्यूस्ट्रीम सिनेमा' सेक्शन. फ़िल्मकार विशाल भारद्वाज के मुताबिक न्यूस्ट्रीम सिनेमा सामानांतर और व्यावसायिक सिनेमा का मिला हुआ रुप है.

भारद्वाज कहते हैं, “अनुराग कश्यप जैसे फ़िल्मकारों ने आर्ट और व्यावसायिक फ़िल्मों के बीच की खाई को पाट लिया है. देव-डी इसका उदाहरण है. इसके अलावा दिबाकर बनर्जी की खोसला का घोसला और ओए लकी लकी ओए भी ऐसी ही फ़िल्में हैं.”

भारद्वाज का कहना है कि मल्टीप्लेक्स के आने से इस नए तरह के सिनेमा को बाज़ार मिला है और शिक्षित वर्ग एक बार फिर फ़िल्में देखने के लिए घर से बाहर निकल रहा है.

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