देसी सिनेमा पर विदेशी प्रभाव

अनुराग कश्यप
Image caption फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने विश्व सिनेमा से प्रभावित होकर फिल्में बनाने का निर्णय किया.

दिल्ली में चल रहे ग्यारहवें ओसियान सिनेफ़ैन फिल्म फ़ेस्टिवल में इस बार फ़ोकस भारतीय सिनेमा पर है, ख़ासकर मुंबई फ़िल्म इंडस्ट्री पर.

साथ ही इस बार न्यू स्ट्रीम सिनेमा सैक्शन पहली बार फ़ेस्टिवल में शामिल किया गया है. इस वर्ग में विशाल भारद्वाज की कमीने, अनुराग कश्यप की देव डी, और आमिर जैसी फिल्में दिखाई जा रही हैं. इसके अलावा इम्तियाज़ अली, ज़ोया अख़्तर और दिबाकर बनर्जी की फिल्में इसमें शामिल हैं.

भारतीय दर्शकों को लीक से हटकर फिल्में देने वाले ये फिल्ममेकर्स और ऐक्टर्स विश्व सिनेमा से काफी प्रभावित रहे हैं. देव डी, गुलाल, ब्लैक फ्राइडे और नो स्मोकिंग जैसी फिल्मों के निर्देशक अनुराग कश्यप को फिल्में बनाने की प्रेरणा विश्व सिनेमा से ही मिली.

अनुराग कहते हैं, "1993 में इंटरनेशनल फिल्म फ़ेस्टिवल ऑफ़ इंडिया में मैंने दस दिन में पचास फिल्में देखीं जिसके बाद मेरी ज़िंदगी ही बदल गई. उन फिल्मों का मुझ पर बहुत असर पड़ा. मैंने निश्चय कर लिया कि मैं फिल्में ही बनाउंगा और तीन महीने बाद मैं मुम्बई में था.”

अनुराग कहते हैं कि वो भारतीय सिनेमा से ज़्यादा विश्व सिनेमा से जुड़ा महसूस करते हैं. वो कहते हैं, “ जो सिनेमा जहां का होता है उसमें उनका तौर-तरीका, परिवेश, संस्कृति, राजनीति, रहन-सहन, खाने-पीने का तरीका, संघर्ष आदि देखने को मिलता है.”

निर्देशक विशाल भारद्वाज की फिल्में जैसे मक़बूल, ओंकारा शेक्सपीयर के नाटकों से प्रेरित हैं. वहीं कमीने में अमरीकी निर्देशक क्वेन्टिन टैरन्टिनो की फिल्मों की छाप दिखती है. विशाल के मुताबिक विश्व सिनेमा वो है जिसमें दुनिया के किसी भी हिस्से की कहानी से कहीं भी, कोई भी जुड़ा हुआ महसूस करे.

Image caption विशाल भारद्वाज की फिल्म कमीने ओसियान के न्यू स्ट्रीम सिनेमा वर्ग में दिखाई जा रही है.

देव डी, ओए लकी लकी ओए और मनोरमा सिक्स फीट अंडर जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाने वाले ऐक्टर अभय देओल कहते हैं कि वो सिर्फ बढ़िया फिल्में पसंद करते हैं.

अभय कहते हैं, “फिल्मों को किसी सीमा में नहीं बांधा जा सकता. एक अच्छी फिल्म सीमाओं से परे होती है क्योंकि फिल्में भावनाओं के बारे में होती हैं और दुनिया भर में भावनाएं एक जैसी ही होती हैं.”

विश्व सिनेमा में अभय की पसंदीदा फिल्मों में सर्बियाई निर्देशक ऐमिर कुस्तरीका की फिल्म लाइफ इज़ ए मिरेकल, ब्लैक कैट व्हाइट कैट और द अंडरग्राउंड शामिल हैं. उन्हें स्पेनिश फिल्ममेकर पेद्रो अलमोदोवार, इरानी फिल्ममेकर माजिद मजीदी, और अमरीकी फिल्ममेकर टिम बर्टन और सैम मेनेडिज़ का काम भी पसंद है.

अनुराग कश्यप की फिल्म देव डी से कल्कि कोचलिन ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा गया है. देव डी इस साल वेनिस फिल्म फेस्टीवल में दिखाई गई थी जहां कल्कि भी गई थीं. उनका कहना है कि वेनिस फिल्म फेस्टीवल में उन्हें विश्व सिनेमा की कई नई फिल्में देखना का मौका मिला.

कल्कि कहती हैं, “वहां मैंने सोल किचन नाम की फिल्म देखी जो काफी मज़ेदार थी. इससे एक बात मुझे ये समझ में आई कि विश्व सिनेमा हमेशा ही गंभीर विषयों के बारे में नहीं होता. जबकि विश्व सिनेमा में कॉमेडी या प्रेम कहानी भी हो सकती है जिसे एक अलग नज़रिये से दिखाया गया हो.”

तीस अक्तूबर तक चलने वाले ओसियान फिल्म फ़ेस्टिवल में इस बार भारत समेत दुनिया भर की लगभग सौ फिल्में दिखाई जा रही हैं.

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