फ़्रांस से लगाव है: लता मंगेशकर

लता मंगेशकर

स्वरकोकिला और भारत रत्न लता मंगेशकर को हाल ही में फ्रांस सरकार ने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की घोषणा की है. इससे पहले ये पुरस्कार केवल मशहूर फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को ही मिला है.

लता को ये पुरस्कार अगले हफ्ते मुंबई में शुरु होने वाले फ्रेंच फ़िल्म फ़ेस्टिवल में दिया जाएगा.

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वैसे तो लता मंगेशकर को उनके साठ साल से भी ज़्यादा लंबे संगीत जीवन में कई पुरस्कारों और ख़िताबों से नवाज़ा गया है लेकिन इस उम्र में भी किसी पुरस्कार को पाकर वो उतनी ही खुश दिखाई देती हैं.

बीबीसी से बातचीत में लता ने कहा,"वैसे तो भारत सरकार ने मुझे देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा है लेकिन मुझे खुशी है कि अब फ्रांस की सरकार भी मुझे सम्मानित कर रही है."

सन 1802 में फ्रांस के इस सर्वोच्च सम्मान की स्थापना नेपोलियन बोनापार्ट ने की थी, तभी से हर साल ये पुरस्कार दुनिया भर के अलग अलग क्षेत्रों की हस्तियों को प्रदान किए जाते हैं.

इस बार दो दिसंबर से मुंबई में शुरु हो रहे फ्रेंच फिल्म फेस्टीवल में लता मंगेशकर को ये सम्मान दिया जाएगा. इस मौके पर फ्रांस और भारत की फिल्मी दुनिया की कई जानी मानी हस्तियां मौजूद रहेंगी.

लगाव

फ्रांस के बारे बात करते हुए लता मंगेशकर कहती हैं कि वैसे तो वे फ्रांस कई बार गई हैं और वहां कुछ शो भी किए हैं लेकिन उन्हें पेरिस काफ़ी अच्छा लगता है.

लता मंगेशकर को फ्रांस की सभ्यता काफ़ी अच्छी लगती है .वो कहती भी हैं कि फ्रांसीसी कला के प्रति समर्पित होते हैं और उन्होंने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संभालकर रखा है.

बातों ही बातों में लता जी ने बताया कि जब भी वो पेरिस जाती हैं तो परफ्यूम खरीदना कभी नहीं भूलतीं.

लता जी को ऐसे देश के सर्वोच्च नागरिक के सम्मान से नवाज़ा जा रहा है जहां हिंदी नहीं बोली जाती. तो क्या ये माना जाए कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती कोई सरहद नहीं होती? लता जी कहती हैं, “मेरा शुरु से ही ये मानना है कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती है और संगीत हर जगह जा सकता है और वहां जाने के बाद अपना असर छोड़ता है.”

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