नहीं रहे अभिनेता फ़िरोज़ खान

हिंदी सिनेमा के जाने माने अभिनेता फ़िरोज़ ख़ान का अप्रैल 2009 में निधन हो गया. वे 70 वर्ष के थे.

पिछले कुछ समय से कैंसर की असाध्य स्थिति से जूझ रहे फ़िरोज़ ख़ान ने अपनी आखिरी सांस बंगलौर स्थित अपने फ़ार्म हाउस में ली.

वर्ष 1960 में दीदी फ़िल्म से अपना सफ़र शुरू करनेवाले फ़िरोज़ ख़ान ने दर्जनों फ़िल्मों में काम किया, कई निर्देशित कीं और कई फ़िल्मों में अलग-अलग भूमिकाओं के तौर पर जुड़े रहे.

लगभग पाँच दशक का फ़िल्मी सफ़र तय करते हुए फ़िरोज़ ख़ान ने अपनी आखिरी फ़िल्म 2007 में दी. उनकी आखिरी फ़िल्म थी वेल्कम जिसमें वो अपने ख़ास अंदाज़ में सामने आए.

आदमी और इंसान के लिए फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड पाने वाले फ़िरोज़ ख़ान ने उंचे लोग, मैं वही हूं, अपराध, उपासना, मेला, आग जैसी फ़िल्मों से पहचान मिली.

धर्मात्मा, जांबाज़, क़ुर्बानी, दयावान जैसी फ़िल्मों ने उन्हें शोहरत दिलाई.

जंबाज़..

फ़िरोज़ ख़ान अपनी ख़ास शैली, अलग अंदाज़ और किरदारों के लिए जाने जाएंगे. कहीं वो एक सुंदर, सजीले हीरो की भूमिका में हैं तो कहीं एक खूंखार विलेन के रोल में. दोनों में ही फ़िरोज़ ख़ान जान डालते रहे हैं.

बंगलौर में ही वर्ष 1939 में 25 सितंबर को फ़िरोज़ ख़ान का जन्म हुआ एक पठान पिता और एक ईरानी माँ के घर में.

फ़िरोज़ ख़ान के तीन और भाई भी फ़िल्मों की दुनिया से जुड़े. एक भाई हैं संजय ख़ान, दूसरे अक़बर ख़ान और तीसरे हैं समीर ख़ान. जहाँ संजय और अकबर ने अभिनय में हाथ आज़माए वहीं समीर फ़िल्म निर्माता बने.

संजय ख़ान की बेटी और फ़िरोज़ ख़ान की भतीजी सुज़ेन की शादी हुई है फ़िल्मकार राकेश रोशन के बेटे और आज के दौर के स्टार माने जाने वाले ऋतिक रोशन से.

फ़िरोज़ ख़ान ने सुंदरी के साथ अपनी ज़िंदगी का सफ़र 1965 में शुरू किया पर 20 साल बाद यानी 1985 में दोनों के बीच तलाक हो गया था.

कुछ माह पूर्व पाकिस्तान की यात्रा के दौरान फ़िरोज़ ख़ान की एक टिप्पणी वहाँ की सरकार को इस तरह नागवार गुज़री कि उनपर हमेशा के लिए पाकिस्तान आने पर पाबंदी लग गई थी.

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