राष्ट्रीय पुरस्कारों में दक्षिण का बोलबाला

वर्ष 2007 के लिए भारत के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों में दक्षिण भारतीय सिनेमा का दबदबा रहा. सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, निर्देशक, अभिनेता और अभिनेत्री सभी बड़े पुरस्कार दक्षिण भारत की फ़िल्मों की झोली में गए.

प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी कांचीवरम को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म चुना गया. इस फ़िल्म में आज़ादी से पहले कांचीवरम के सिल्क बुनकरों के जीवन को दिखाया गया है.

तमिल अभिनेता प्रकाश राज को फ़िल्म कांचीवरम में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला.प्रकाश राज इससे पहले वर्ष 1998 में फ़िल्म इरुवर के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और वर्ष 2003 में स्पेशल जूरी पुरस्कार पा चुके हैं.

कन्नड़ फ़िल्म गुलाबी टाकिज़ में अपने बेहतरीन अभिनय के लिए उमाश्री सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री बनीं.

मशहूर फ़िल्मकार अडूर गोपालकृष्णन अपनी मलयाली फ़िल्म नालू पेन्नू्नगाल के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक चुने गए.

अन्य पुरस्कार

सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता-दर्शन ज़रीवाला (फ़िल्म गांधी माई फ़ादर के लिए),

सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री- शिफ़ाली शाह

सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता-शरद गोयेकर( मराठी फ़िल्म तिंग्या के लिए)

सर्वश्रेष्ठ मनोरंजक फ़िल्म-चक दे इंडिया,

सर्वश्रेष्ठ हिंदी फ़िल्म-1971, परिवार कल्याण के लिए तारे ज़मीं पर

सर्वश्रेष्ठ गायक -शंकर महादेवन (फ़िल्म तारे ज़मीं पर के गाने मेरी माँ. के लिए),

सर्वश्रेष्ठ गायिका-श्रेया घोषाल

सर्वश्रेष्ठ गीतकार-प्रसून जोशी, सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफ़ी- सरोज खान

(राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों के चयन के लिए गठित जूरी की अध्यक्षता सई परांजपे कर रही थी. जबकि जूरी के अन्य सदस्य थे- अशोक विश्वनाथन और नमिता गोखले)

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