चार कहानियां, एक फ़िल्म

ओनिर
Image caption समीक्षकों के चहेते हैं 'आइ एम मेघा' के निर्देशक ओनिर

'दस कहानियां' भले ही बॉक्स ऑफ़िस पर कुछ ख़ास नहीं कर पाई हो लेकिन ऐसे प्रयोग अब भी हिंदी सिनेमा में हो रहे हैं. फ़िल्म निर्देशक ओनिर अब एक फ़िल्म लेकर आ रहे हैं जिसमें चार कहानियां हैं. फ़िल्म का नाम है 'आइ एम'

इस फ़िल्म की एक कहानी कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के ईर्द-गिर्द बुनी गई है. फ़िल्म में इस कहानी को नाम दिया गया है ‘आइ एम मेघा’. इस फ़िल्म की हर कहानी को अलग नाम दिया गया है मसलन ' आई एम उमर', 'आईएम अभिमन्यु', 'आईएम आफिया'.

‘आइ एम मेघा’ में मुख्य भूमिका में हैं जूही चावला.

फ़िल्म के निर्देशक ओनिर ‘आइ एम मेघा’ की कहानी के बारे में कहते हैं, “ये कहानी एक कश्मीरी पंडित महिला की है जो बीस साल बाद कश्मीर में अपने घर जाती है.”

जूही चावला का किरदार अपनी जन्मस्थली में पहुंचकर अपने पुराने दोस्त से मिलता है. कश्मीर में पिछले बीस सालों में राजनैतिक अस्थिरता और अलगाववाद के चलते जो परिवर्तन आएं है, उन्हें इन दोनों दोस्तों के नज़रिए से देखा गया है.

जूही चावला की दोस्त की भूमिका निभाई है मनीषा कोइराला ने. निर्देशक ओनिर कहते हैं कि कोइराला का चेहरा तो कुछ बोले बिना भी, बहुत कुछ कह सकता है.

सरोकार

ओनिर इससे पहले ‘माइ ब्रदर निखिल’, ‘बस एक पल’ और ‘सॉरी भाई’ जैसी फ़िल्में बना चुके हैं जिनकी फ़िल्म समीक्षकों ने काफ़ी तारीफ़ की थी.

ओनिर की फ़िल्मों के केंद्र में गंभीर सामाजिक मुद्दे रहे हैं. ‘माइ ब्रदर निखिल’ में उन्होंने एड्स और समलैंगिक संबधों की पड़ताल की थी.

ओनिर कहते हैं, “एक व्यक्ति के तौर पर हमारे देश में जो कुछ होता है वो मुझे बहुत चिंतित करता है. मैं सोचता हूं कि एक नागरिक के तौर पर मुझे अपने देश और समाज के लिए कुछ योगदान देना चाहिए. मेरे पास ही एक ही हुनर है - फ़िल्म बनाने का हुनर. इसलिए मैं ये फ़िल्म के ज़रिए करता हूं.”

वो ये स्वीकार करते हैं कि सिर्फ़ कला के माध्यम से सोच में बदलाव नहीं आ सकता लेकिन वो कहते हैं कि ये एक छोटा क़दम ही सही, एक कोशिश तो है.

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