गानों में भरे रंग या रंग भरे गाने

अमिताभ बच्चन

होली शब्द नहीं प्रतीक है रंगों का. समय के साथ इस बदलती दुनिया में बहुत कुछ बदला है लेकिन होली के रंग नहीं बदले और कुछ ऐसा ही है हमारी फिल्मों के साथ.

दशक, दौर ज़रूर बदलते रहे पर होली का उल्लास वैसा ही रहा है ऐसा ही है होली का त्यौहार.

आइए आज ज़रा भारतीय हिंदी सिनेमा के लंबे इतिहास में से उन कुछ चुनिंदा फ़िल्‍मों का ज़िक्र किया जाए जिनकी होली काफ़ी असरदार रही है.

होली का ज़िक्र हो और महबूब ख़ान की 'मदर इंडिया' की बात ना चले ऐसा कभी नहीं हो सकता. सुनील दत्त, नरगिस, राजकुमार, हीरालाल और अन्य कलाकारों के साथ फ़िल्माया गया ये होली गीत 'होली आई रे कन्‍हाई रंग छलके सुना दे बाँसुरी'.

वी शांताराम की फ़िल्‍म नवरंग में भी होली का एक शानदार गीत था 'जा रे नटखट ना खोल मेरा घूंघट पलट के दूँगी तुझे गाली रे, मोहे समझो ना तुम भोली भाली रे'.

फ़िल्‍म कोहिनूर में दिलीप कुमार और मीना कुमारी ने जब' तन रंग लो जी आज मन रंग लो' गाया तो लगा होली को एक नयी अभिव्यक्ति मिली.

फ़िल्‍म शोले का 'होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं' जैसे सुहाने गाने आज भी सराहे जाते हैं .

यशराज फिल्म्स ने फ़िल्‍म संसार को तीन यादगार होलियाँ दी हैं. 'सिलसिला' की 'रंग बरसे भीगे चुनरवाली', और उसके बाद आई 'मशाल' की होली हृदयनाथ मंगेशकर का संगीत और जावेद अख्तर के बोल. दिलीप कुमार गाते हैं—'यही दिन था यही मौसम जवाँ जब हमने खेली थी'. और अनिल कपूर वाली पंक्ति है—'अरे क्‍या चक्‍कर है भाई देखो होली आई रे, ये लड़की है या काली माई देखो होली आई रे'.

यशराज प्रोडक्‍शंस की तीसरी होली थी फ़िल्‍म 'डर' की, जिसमें शाहरूख़ ख़ान ढोल बजाते हुए होली समारोह में बिन बुलाए चले आते हैं इस गाने के बोल हैं –'अंग से अंग लगाना पिया हमें ऐसे रंग लगाना'.

फ़िल्‍म 'आखिर क्‍यों' में राकेश रोशन भी होली खेलते नज़र आए थे—'सात रंग में खेल रही हैं दिलवालों की होली रे'.

फिल्म बागबान का एक गीत भी काफी लोकप्रिय हुआ था 'होली खेलें रघुबीरा अवध में होली खेलें रघुबीरा'.

ये गाना इस लिए भी खास है क्योंकि इससे पहले के होली गीतों में कृष्ण या नंदलाल ही होली खेलते दिखाए सुनाये गए थे पर पहली बार अवध में श्री राम होली खेलते दिखे.

जब इस गीत पर अमिताभ बच्चन ने तान छेड़ी तो लगा वे सिलसिला फिल्म के होली गीत से आगे निकल गए हैं.

इसी तरह विपुल शाह की फ़िल्‍म 'वक्‍त- रेस अगेन्‍सट टाइम' का गाना 'डू मी अ फ़ेवर लेट्स प्‍ले होली' आज भी किशोरों की पसंद बना हुआ है.

अक्षय कुमार और प्रियंका चोपड़ा ने अपने चुलबुले अभिनय से इसे और यादगार बना दिया.

वैसे होली गीतों में हमेशा उल्लास ही रहा हो ऐसा नहीं है.

सुनील दत्त पर फ़िल्‍माया और किशोर कुमार का गाया फिल्म 'ज़ख्‍मी' का ये गीत "'ज़ख्‍मी दिलों का बदला चुकाने, आए हैं दीवाने दीवाने, दिल में होली जल रही है'.

या शक्ति सामंत की फ़िल्‍म 'कटी पतंग' का गाना जिसमें किशोर कुमार गाते हैं 'आज ना छोड़ेंगे हमजोली खेलेंगे हम होली' और लता जी की आवाज़ में ये जवाब 'अपनी अपनी किस्‍मत देखो, कोई हँसे कोई रोए' कुछ ऐसे उदहारण हैं जिसमें गम और पीड़ा है.

अब इसे गानों में भरे रंग कहा जाए या रंग भरे गाने फैसला करना मुश्किल है.

इस होली पर इन रंग भरे गानों को गुनगुनाते रहिए.

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