हॉलीवुड-बॉलीवुड ने मिलाया हाथ

यश चोपड़ा और अन्य
Image caption भारत की सात कंपनियों और मोशन पिक्चर एसोसिएशन ऑफ अमरीका ने पायरेसी के खिलाफ़ समझैता किया है.

बॉलीवुड और हॉलीवुड ने पायरेसी यानी की फ़िल्मों का नकली धंधा रोकने के लिए हाथ मिलाया है.

इसके लिए मोशन पिक्चर एसोसिएशन ऑफ़ अमरीका (एमपीएए) और भारत की सात कंपनियों ने मिलकर एक समझौता किया है.

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब हॉलीवुड दुनिया के बाज़ार पर कब्ज़ा करना चाहता है और बॉलीवुड का क़द भी लगातार बढ़ता जा रहा है.

इस समझौते के बाद भारत में पायरेसी के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाएगी. इसके तहत सिनेमा थिएटर के साथ मिलकर काम किया जाएगा क्योंकि ये थिएटर ही 90 फ़ीसदी फ़िल्मों के पायरेटेड डीवीडी के स्रोत हैं.

पायरेसी रोकने के लिए पुलिस, इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों और नेताओं के साथ भी मिलकर काम किया जाएगा.

एमपीएए ने इस तरह का समझौता अमरीका, यूरोप और हॉंगकॉंग में भी किया है लेकिन उसने यह नहीं बताया है कि इसके लिए पैसा कितना खर्च किया जाएगा लेकिन यह ज़रूर कहा है कि पैसा सदस्य ही देंगे.

भारतीय फ़िल्म उद्योग में बौद्धिक संपदा को बहुत अधिक महत्व नहीं दिया जाता है लेकिन हॉलीवुड में इसका बहुत अधिक महत्व है.

इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब वॉर्नर ब्रदर्स ने 2008 में आई फ़िल्म ‘हैरी पुत्तर : ए कॉमेडी ऑफ़ टेरर’ की रिलीज पर रोक लगाने के लिए याचिका इस आधार पर दायर की थी कि फ़िल्म का नाम उसकी फ़िल्म ‘ हैरी पॉटर’ से मिलता जुलता है.

लेकिन भारत में कॉरपोरेट स्टूडियो जैसे यूटीवी मोशन पिक्चर्स और रिलायंस बिग पिक्चर के उदय के साथ ही इस तरह के मतभेद कम होने लगे.

रिलायंस बिग पिक्चर ने स्टिवन स्पीलबर्ग के ड्रीमवर्क का 50 फ़ीसदी शेयर 32 करोड़ 50 लाख डॉलर में ख़रीदा था.

पिछले दो सालों में हॉलीवुड और बॉलीवुड के बीच का व्यापारिक रिश्ता काफ़ी बढ़ा है जैसे इस साल आई फ़िल्म ‘माय नेम इज ख़ान’ का निर्माण दो भारतीय कंपनियों ने किया तो अमरीका और भारत में इसका वितरण फ़ॉक्स ने किया.

सबसे बड़ी समस्या

एमपीएए के निर्वतमान अध्यक्ष डैन ग्लिकमैन कहते हैं, ''लोगों की मानसिकता एक होती जा रही है.''

Image caption भारत में पायरेटेड फ़िल्मों का बाज़ार क़रीब 96 करोड़ डॉलर का है.

वह कहते हैं, ''भारतीय फ़िल्म उद्योग अब यह समझ गया है कि उसकी फ़िल्मों अच्छी क़ीमत पर बिक रही हैं.''

अर्नस्ट एंड एंग के मुताबिक़ 2008 में ढाई अरब डॉलर के फ़िल्म बाज़ार में पायरेटेड फ़िल्मों का हिस्सा क़रीब 96 करोड़ डॉलर था और इसमें पाँच लाख 71 हज़ार लोगों को रोजगार मिला हुआ था.

बाज़ार में उपलब्ध डीवीडी में क़रीब 60 फ़ीसदी पायरेटेड डीवीडी मिल रही हैं.

रिलायंस बिग पिक्चर के मुख्य कार्यकारी संजीव लांबा ने बताया कि मनोरंजन उद्योग के लिए पायरेसी सबसे दुखदाई समस्या है.