‘इंडियन ओशन’ पर फ़िल्म

इंडियन ओशन बैंड के सदस्य
Image caption इंडियन ओशन बैंड के सदस्य राहुल राम, अमित किलाम और सुष्मित सेन.

प्रसिद्ध भारतीय म्यूज़िक बैंड इंडियन ओशन के सफ़र पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री दो अप्रैल को सिनेमा घरों में रिलीज़ हो रही है. इस डॉक्यूमेंट्री में बैंड के चारों सदस्यों से लंबे साक्षात्कार के अलावा, इस परिवार और जिन लोगों के साथ इस बैंड ने काम किया है, उनके साथ बातचीत है.

इस फ़िल्म का निर्देशन जयदीप वर्मा ने किया है और फ़िल्म का शीर्षक है ‘द लाइफ़ ऐंड म्यूज़िक ऑफ़ इंडियन ओशन’

दुखद बात ये है की मशहूर आवाज़ और तबला वादक आशीम चक्रवर्ती की हाल ही में मृत्यू हो गई है. आशीम के अलावा इस बैंड में सुष्मित सेन, राहुल राम और अमित किलाम हैं.

राहुल राम कहते हैं कि उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी कि उन पर कोई फ़िल्म बनेगी और उसे सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाएगा.

शुरुआत

Image caption अमित किलाम और राहुल राम बीबीसी से बात करते हुए

ये पूछे जाने पर की फ़िल्म की शुरुआत कैसे हुई, राहुल राम कहते हैं, "2006 में जयदीप ने कहा कि वो हमपर एक फ़िल्म बनाना चाहता है क्योंकि उसके मुताबिक हम एक दिलचस्प म्यूज़िक बैंड हैं. जयदीप ने और भी कई अच्छी-अच्छी बातें हमारे बारे में कहीं. हमने कहा क्यूं नहीं, ज़रुर बनाइये."

बैंड के दूसरे सदस्य अमित किलाम कहते हैं कि फ़िल्म बनने के शुरुआती दौर में ज़रुर थोड़ा बहुत हंगामा होता था लेकिन धीरे-धीरे उन्हें कैमरे के आदत सी पड़ गई. किलाम ने बीबीसी को बताया, "शुरुआती दिनों के शोर-शराबे के बाद सबकुछ नॉर्मल हो गया. हां, इतना अहसास ज़रुर हमेशा रहा कि कैमरा हमें रेकॉर्ड कर रहा है."

संगीत

किलाम चाहते हैं कि लोग इस फ़िल्म को देखें ताकि उनके संगीत के बारे-बारे में ज़्यादा से ज़्यादा लोग जान पाएं.

आशीम चक्रवर्ती के बारे में बात करते हुए किलाम कहते हैं कि उनके जाने का उन्हें बहुत दुख है क्योंकि अभी तो बैंड को कम से कम चार-पांच बहुत करना है.

विज्ञापन एजेंसी में कॉपीराइटर का काम कर चुके फ़िल्मकार जयदीप वर्मा अपनी इस फ़िल्म के बारे में कहते हैं कि 2006 में वो कोई छोटा प्रोजक्ट हाथ में लेने चाहते थे और उनका ध्यान इंडियन ओशन के उपर गया.

Image caption अमित किलाम चाहते हैं कि लोग इस फ़िल्म को देखें ताकि उनके संगीत के बारे-बारे में ज़्यादा से ज़्यादा लोग जान पाएं

जयदीप कहते हैं, "मैं कुछ ऐसा करना चाहता था जो मेरे दिल के क़रीब हो. मैं इंडियन ओशन के संगीत को ख़ूब पसंद करता था, इन लोगों का जानता भी था तो मुझे यही करना सही रहेगा."

जयदीप वर्मा इंडियन ओशन के सदस्यों के 2001 से जानते हैं और हमेशा उनके संगीत के कायल रहे हैं. वर्मा कहते हैं कि उनके फ़िल्म बनाना तो आसान रहा लेकिन उसकी तुलना इस सिनेमाघरों तक लाना काफ़ी मुश्किल भरा था क्योंकि फ़िल्म तो शायद एक साल में बन गई लेकिन इसे दर्शकों तक लाने में तीन साल लग गए.

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