किरदार की आत्मा को पकड़ने की कोशिश: बमन

बमन इरानी
Image caption बमन ईरानी कहते हैं कि उन्होने अपने आसपास के लोगों को देख कर अभिनेय सीखा है

जाने-माने अभिनेता बमन ईरानी का कहना है कि वो किसी भी किरदार को पूरे दिल से महसूस करते हैं और वो जो भी किरदार निभाते हैं, पूरी सच्चाई के साथ उसे अपने भीतर उतारने की कोशिश करते हैं.

बमन का कहना है कि उन्होने जितना भी अभिनय सीखा है वो अपने आसपास के लोगों को देख कर और ग़ौर से महसूस करके ही सीखा है.

वो कहते हैं, "मेरे हिसाब से एक्टिंग के दो-तीन पहलू होते हैं. एक तो क्राफ्ट है, दूसरा पक्ष है कि आप अपने किरदार को कितनी शिद्दत से महसूस करते हैं. क्योंकि अगर आप पूरी सच्चाई के साथ किसी किरदार को अपने भीतर नहीं उतार पाते और उसके साथ तालमेल नहीं बिठा पाते हैं तो दर्शकों को वो दिख जाता है. वो तुरंत समझ जाते हैं कि ये आदमी इस किरदार के साथ न्याय नहीं कर रहा है.''

बमन ने बीबीसी से बातचीत में कहा,"मैं जब भी कोई किरदार निभाता हूं तो पूरी कोशिश करता हूं कि लोगों को लगे कि अगर कोई ऐसा इंसान होगा तो बिल्कुल ऐसा ही होगा. जैसे कि 'वैल डन अब्बा' में मैं अरमान अली हूं लेकिन असल में तो मैं बमन ईरानी हूं. लेकिन पूरी कोशिश रहती है कि उस किरदार के ज़रिए लोगों को भरोसा दिलाऊं कि मैं अरमान अली ही हूं. मेरे इस काम में तमाम लोग जैसे कि डाइरेक्टर, साथी कलाकार काफ़ी मदद करते हैं."

ये पूछे जाने पर कि इतनी बेहतरीन अदायगी कहां से सीखी, बमन ने हंसते हुए कहा, "एक बार मैं नसीरुद्दीन शाह के बंगले पर एक वर्कशॉप करने गया. मैंने उनसे कहा कि मुझे इस बात का दुख है कि मैं एक्टिंग सीखने ड्रामा स्कूल नहीं जा सका. इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, तुमने अपनी दुकान पर बैठे बैठे ही एक्टिंग सीख ली है. तब मैने महसूस किया कि ये बात तो बिल्कुल सही है. 18 साल की उम्र से लेकर 32 साल तक मैं अपनी दुकान पर नियमित रुप से बैठता था और वहां अलग अलग तरह के लोग आते थे और उनके हाव-भाव को ग़ौर से देखकर मुझे एक्टिंग सीखने का मौका मिला."

बमन कहते हैं कि कोई इंसान जितना अच्छा श्रोता होगा वो उतना ही अच्छा अभिनेता होगा.

बमन इरानी की ज़िंदगी में उनकी मां की अहम भूमिका है और ख़ासतौर से एक्टिंग के क्षेत्र में रुचि पैदा करने में.

वो उन्हें एक ही फ़िल्म को बार बार देखने भेजतीं थीं ताकि बमन उस फिल्म के अलग अलग पहलुओं को बारीकी से समझ सकें.

वो कहते भी हैं, "मेरी मां एक दूरदर्शी महिला हैं. सिनेमा में हर कला का उपयोग होता है,चाहे नृत्य हो, ड्रामा हो, सिनेमोटोग्राफी, आर्ट डाइरेक्शन हो. मेरी मां को फिल्में देखने का बहुत शौक है. वो मुझे बार बार इसीलिए किसी भी फ़िल्म को देखने भेजतीं थीं ताकि मैं उसके पीछे की मेहनत को ठीक से समझ सकूं."

मुन्नाभाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्नाभाई, खोसला का घोसला और फिर थ्री इडियट्स के बाद वैल डन अब्बा और हम तुम और घोस्ट जैसी फ़िल्मों के ज़रिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने वाले बमन ईरानी का कहना है कि वो आगे भी दिलचस्प किरदार निभाते रहेंगे.

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