देवानंद को 'फाल्के रत्न' पुरस्कार

देवानंद

हिंदी सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देवानंद को दादा साहेब फाल्के एकेडमी द्वारा फाल्के रत्न पुरस्कार से नवाज़ा गया है.

ये एकेडमी, हर साल दादा साहेब फाल्के के जन्मदिन के दिन यानी की 30 अप्रैल को एक पुरस्कार समारोह का आयोजन करती है और फ़िल्मी दुनिया में असीम योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित करती है.

देवानंद के अलावा गुजरे ज़माने के जाने माने अभिनेता प्राण को भी इस एकेडमी द्वारा ‘फाल्के आइकन’ और ‘लिजेंड्री सिने वर्सटाइल स्टार’ पुरस्कार दिया गया.

पुरस्कार पाने के बाद देवानंद ने कहा कि ‘फाल्के रत्न’ उनके लिए अधिक मायने रखता है क्यों कि ये उन्हें फ़िल्म उद्योग के लोगों द्वारा दिया गया है.

देवानंद ने कहा, “मैं आज बहुत खुश हूं. आज जब मैं अपनी आंखे बंद करता हूं तो सारी इंडस्ट्री मेरी आंखों के सामने है. वो सारे बड़े बड़े महान जानकार लोग जिन्होंने अपनी मेहनत से, अपनी कला से, अपने दिमाग से इस फिल्म इंडस्ट्री को ऐसे ऐसे रंग बिरंगे फूल दिए हैं जिनकी ख़ुशबू आज चारों ओर फैल रही है, मैं ऐसे शहंशाहों को, महाराजाओं को झुककर सलाम करता हूं.”

गाइड

देवानंद में इस उम्र में भी ग़ज़ब की ऊर्जा है जो उनसे बात करने वाले को भी प्रेरित करती है. उन्होंने ऐसी कई फ़िल्मों में काम किया जो आज भी सराही जाती हैं, उदाहरण के तौर पर गाइड.

सत्तर के दशक में देवानंद की इस फ़िल्म ने जैसे एक क्रांति पैदा कर दी थी. अभी कुछ साल पहले ही इसे कान्स फ़िल्म महोत्सव में ‘स्पेशल एंट्री’ के तौर पर शामिल किया गया था.

इस फ़िल्म का निर्देशन किया था देव आनंद के छोटे भाई गोल्डी आनंद ने जो खुद भी एक अभिनेता भी थे.

देवानंद गोल्डी आनंद बारे में बात करते हुए कहते हैं, “ गोल्डी जैसा निर्देशक मैने नहीं देखा, उसे इस विधा की पूरी जानकारी थी, हम दोनों में कभी-कभी वैचारिक मतभेद भी होता था लेकिन वो सेट पर जाने से पहले ही ख़त्म हो जाता था.”

इन दिनों वो अपनी फ़िल्म ‘चार्जशीट’ को पूरा करने में लगे हुए हैं.

उम्र के इस पड़ाव में भी देवानंद के भीतर काम करने का जज़्बा बिल्कुल कम नहीं हुआ है.

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