अनुपम खेर 'हिटलर' से अलग हुए

डियर फ्रेंड हिटलर

फ़िल्म अभिनेता अनुपर खेर ने हिटलर पर बन रही फ़िल्म 'डियर फ़्रेंड हिटलर' में काम करने से इनकार कर दिया है.

उन्होंने कहा कि अगर उनकी फ़िल्म से एक प्रतिशत लोगों की भावनाओं को भी धक्का पहुँचता है तो वो ग़लत है.

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने फ़िल्म में काम करने की सोची थी, तो वो एक कलाकार की हैसियत से बेहद खुश थे, लेकिन उनके चाहने वालों इस फ़ैसले से खुश नहीं थे.

उन्होंने अपने फ़ैसले के लिए फ़िल्म के निर्देशक राकेश रंजन कुमार की कुछ टिप्पणियों को भी ज़िम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा, ''हालांकि फ़िल्म की स्क्रिप्ट अच्छी थी लेकिन अगर इससे किसी भी भावना आहत होती है तो अच्छा है कि इसे जाने दिया जाए.''

इस फ़िल्म पर हो हल्ला तब बढ़ गया था जब निर्देशक को ये कहते हुए बताया गया कि हिटलर को भारत से प्यार था और भारत की आज़ादी में उनका परोक्ष रूप से योगदान था.

निर्देशक की सफ़ाई

लेकिन राकेश रंजन कुमार का कहना है कि उनके वक्तव्य को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया.

वो कहते हैं, ''मैं इतिहास का छात्र रहा हूँ. मेरा ऐसा कहने का कोई इरादा नहीं था. हो सकता है कि शायद मेरे मुँह से कुछ निकल गया हो लेकिन जिस तरह मेरी बातों का मतलब निकाला गया, वो ग़लत है. हो सकता है कि मैने कुछ मिलता-जुलता कहा होगा, तो मेरी बातों का ये मतलब निकाला गया होगा. मैने हिटलर के भारत से संबंध के बारे में बात की थी, न कि वो भारत से प्यार करते हैं ऐसा कहा था. ये सभी को पता है कि उनका इरादा ग़लत था. मैने इतिहास का अध्ययन किया है. मैं इतनी बेवकूफ़ी कैसे कर सकता हूँ.''

उधर भारतीय यहूदी फ़ेडरेशन के चेयरमैन जोनाथन सोलोमन ने अनुपम खेर के फ़ैसले पर खुशी जताई है.

उन्होंने कहा कि ये कहना कि हिटलर भारत के हितैषी थे क्योंकि वो अंग्रेज़ों के विरोधी थे, ये ग़लत है.

उन्होंने कहा, ''जो लोग कहते हैं कि हिटलर भारत के दोस्त थे, उन्हें इतिहास की कोई भी जानकारी नहीं है. हिटलर ब्रिटेन के विरोधी तो थे लेकिन वो अपना साम्राज्य बढ़ाना चाहते थे. ऐसे व्यक्ति को भारत का दोस्त बताना जिसने इतना अत्याचार किया, ये इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने जैसा है.''

हालांकि अब ये साफ़ नहीं है कि अब फ़िल्म का भविष्य क्या होगा, ये फ़िल्म कब बननी शुरू होगी, शुरू होगी भी कि नहीं, राकेश रंजन इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार करते हैं.

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