अपनी नानी का किरदार निभाएंगी राइमा

ऋतुपर्णो घोष
Image caption ऋतुपर्णो घोष लंबे समय से सुचित्रा सेन के जीवन पर फिल्म बनाने को इच्छुक थे

फिल्मों में यूं तो कुछ भी या सब कुछ हो सकता है. लेकिन यह शायद पहला मौका है जब किसी हीरोइन को पर्दे पर अपनी नानी का किरदार निभाने का मौका मिल रहा है. वह हीरोइन इस भूमिका से बेहद खुश है. और भला हो भी क्यों न! आखिर नानी भी तो कोई मामूली हस्ती नहीं हैं.

यह नानी हैं अपने जमाने की जानी-मानी अभिनेत्री सुचित्रा सेन. बांग्ला फिल्मों में उनकी लगभग वही छवि रही है जो हालीवुड में ग्रेटा गार्बो की.

जाने-माने फिल्मकार ऋतुपर्णो घोष को सुचित्रा की यह छवि शुरू से ही आकर्षित करती रही है. अब उन्होंने सुचित्रा के जीवन और सफ़र पर ही फिल्म बनाने का फैसला किया है. और इस किरदार के लिए सुचित्रा की नतिनी राइमा सेन से बेहतर भला कौन हो सकता था.

राइमा उन चंद लोगों में से है जो अब भी अपनी नानी से लगातार मिलती रही हैं. ऐसे में उनके लिए यह किरदार निभाना कोई खास मुश्किल नहीं होगा.

लंबा इंतजार

घोष बताते हैं कि वे लंबे अरसे से सुचित्रा सेन के फिल्मी सफ़र पर एक फिल्म बनाने की सोच रहे थे. लेकिन किसी न किसी वजह से मामला टलता रहा.

इस बीच, कई बार सुचित्रा की तबियत भी बिगड़ी. उनका स्वास्थ्य इन दिनों ठीक नहीं रहता. बीते सप्ताह ही वे इलाज के बाद अस्पताल से बाहर आई हैं.

Image caption सुचित्रा सेन सत्तर के दशक में बांग्ला और हिंदी फिल्मों की शीर्ष हीरोइन थीं

घोष कहते हैं, 'मैंने सोचा कि अब इस परियोजना को जल्दी ही पूरा कर लेना चाहिए.' लेकिन इस फिल्म में राइमा के लेने का फैसला कैसे किया?

इस सवाल पर वे कहते हैं, "राइमा उन दो-चार लोगों में हैं जो अब तक सुचित्रा सेन से लगातार मिलती रही हैं. दो दशक से भी ज्यादा समय से सुचित्रा ने खुद को सार्वजनिक जीवन से समेट लिया है. इसलिए मैंने राइमा को लेने का फैसला किया. वे इस किरदार को दूसरों के मुकाबले सहजता से निभा सकती हैं."

बेहद खुश

इस किरदार के बारे में आखिर राइमा क्या सोचती हैं? वे बेहद खुश हैं. राइमा कहती हैं, "लोग हमेशा कहते हैं कि मेरा चेहरा, स्वभाव और चाल-ढाल नानी से काफी मिलता है." नानी पर इस फिल्म के प्रस्ताव से वे कैसा महसूस कर रही हैं? इस सवाल पर वे पलट कर सवाल करती हैं, "आखिर बांग्ला फिल्मों का कौन-सा निर्माता सुचित्रा सेन की जादूई छवि से प्रभावित नहीं है!"

बांग्ला फिल्मों की शीर्ष हीरोइन रहीं सुचित्रा ने सत्तर के दशक में ‘आंधी’ फिल्म में अपने अभिनय के जरिए हिंदी फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ी थी. लेकिन 1978 में अपनी आखिरी बांग्ला फिल्म ‘प्रणय पाशा’ के बाद वे सार्वजनिक तौर पर कम ही नजर आई हैं.

बीते तीन दशकों के दौरान सुचित्रा सेन अपनी बीमारी और इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल होने पर ही सुर्खियों में आती रही हैं.

इस फिल्म में सुचित्रा की जीवन में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं का भी चित्रण किया जाएगा.

यानी इसके जरिए सुचित्रा के प्रशंसक एक बार फिर अतीत के सुनहरे सफर पर जा सकेंगे.

संबंधित समाचार