दादा-पोते की जोड़ी पर्दे पर

शम्मी कपूर
Image caption शम्मी कपूर ने बाद की फ़िल्मों में चरित्र अभिनेता के रूप में काम किया

'तुमसा नहीं देखा', 'जंगली', 'कश्मीर की कली', 'तीसरी मंज़िल' जैसी ढेरों फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले अभिनेता शम्मी कपूर रूपहले पर्दे पर वापसी कर रहे हैं.

करीब दस साल के अंतराल के बाद शम्मी कपूर अपने भाई राजकपूर के पोते रणबीर कपूर के साथ नज़र आएंगे निर्देशक इम्तियाज़ अली की फ़िल्म रॉकस्टार में. बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में शम्मी कपूर ने कहा कि 'रॉकस्टार' फ़िल्म में काम करने का फैसला उन्होने अपने पोते रणबीर की गुज़ारिश पर लिया है.

लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वे अभिनय की दुनिया में फिर से सक्रिय हो जाएंगे. शम्मी कपूर कहते हैं कि “इस छोटे से रोल के लिए मैं राज़ी तो हो गया लेकिन हफ्ते में तीन दिन मैं डायलिसिस पर रहता हूं हालांकि इम्तियाज़ अली ने मेरी मजबूरियों को देखते हुए शूटिंग का कार्यक्रम तय किया है”.

'जब वी मेट' और 'लव आजकल' जैसी फ़िल्में निर्देशित कर चुके इम्तियाज़ अली की तारीफ करते हुए शम्मी कपूर कहते हैं कि “इम्तियाज़ एक अच्छे और बहुत समझदार निर्देशक हैं”.

शम्मी कपूर अपने भतीजे ऋषि कपूर के साथ 'प्रेमरोग' में काम कर चुके हैं. वह ऋषि को तो अच्छा अभिनेता मानते ही हैं, उनके बेटे रणबीर को भी होनहार कहते हैं.

पचास और साठ के दशक में रजत पटल पर अपनी अदाकारी की अमिट छाप छोड़ने वाले शम्मी कपूर आज के सिनेमा को तकनीकी दृष्टि से काफी उन्नत मानते हैं. उनका कहना है कि “वक़्त के साथ बदलाव को अपनाने में ही समझदारी है. इंसान जब बदलावों को आत्मसात करता है तो उसे नई सूरतें, नई सीरतें और नई शैलियां दिखाई देती हैं. आज सिनेमा इसी रास्ते पर चल रहा है और बहुत अच्छा है”.

शम्मी कपूर दुनिया के उन चंद सितारों में शामिल हैं जिन्होंने नए ज़माने की तकनीक को बहुत उत्साह से अपनाया है. वे काफी लंबे समय से इंटरनेट का इस्तेमाल करते आ रहे हैं. हाल ही में उन्होने अपना वीडियो ब्लॉग शुरू किया है और वे टि्वटर पर भी अपने प्रशंसकों से जुडे़ रहते हैं.

अभिनय के अलावा उनकी ज़िंदगी में संगीत और खेलों की ख़ास जगह है. फुटबॉल और टेनिस उनके पसंदीदा खेल हैं.

अपनी अदा और अदाकारी के ज़रिए हिंदी सिनेमा जगत में एक ख़ास पहचान रखने वाले शम्मी अपने आप को खुशकिस्मत मानते हैं.

वे कहते हैं. “मेरी तकदीर बहुत अच्छी है कि मुझे अच्छे लोगों का साथ मिला. नासिर हुसैन की 'तुमसा नहीं देखा' उस वक्त मिली जब मुझे एक हिट की सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी. अच्छी फिल्में और संगीत मिला जिसने मेरे काम को मायने दिए और इससे ज़्यादा खुश्किस्मती क्या होगी कि आज भी मेरे ढेरों चाहने वाले हैं औऱ उनकी दुआएं मेरे साथ हैं”.

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