अनुराग कश्यप की उड़ान

पढा़ई और करियर, दोनों में माता पिता और अपनी पसंद के बीच किसे चुनें इसी कशमकश से जूझ रही युवा पीढी के बारे में है निर्माता निर्देशक अनुराग कश्यप की अगली फ़िल्म उड़ान.

ये कहानी है एक बाप बेटे की जहाँ बाप अपने अधूरे सपनों की ज़िम्मेदारी बेटे पर रखना चाहता है जबकि बेटे का सपना कुछ और ही है.

देव डी और गुलाल जैसी फ़िल्मों से बॉलीवुड में एक ख़ास पहचान बना चुके अनुराग कश्यप की इस फ़िल्म का निर्देशन किया है पहली बार निर्देशन कर रहे विक्रमादित्य मोटवाने ने जिनके साथ अनुराग ने दीपा मेहता की फ़िल्म वाटर के समय काम किया था.

अनुराग ने बताया " फ़िल्म 3 इडियट्स ने जो कहा है उड़ान उसे थोडा़ और आगे ले जाएगी" . उन्होंने माना की इस तरह की फ़िल्मों से समाज की धारणाएं बदल रही हैं .

उड़ान कान के अलावा कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों का हिस्सा भी बन चुकी है.

अनुराग मानते हैं कि "आज भी उत्तर भारत में अधिकांश वर्ग इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी और एमबीए से आगे नहीं सोचता है. और इसके अलावा किसी भी दूसरी तरह के कार्य के लिए माता पिता को समझाना अक्सर बच्चों के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है. इसी तरह की उपेक्षाओं के दबाव और माँ बाप के साथ संवाद की कमी बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं ."

फ़िल्म के निर्देशक विक्रमादित्य इससे पहले संजय लीला भंसाली की दो फ़िल्मों- हम दिल दे चुके सनम और देवदास में सहायक निर्देशक के रूप में काम कर चुके हैं.

उड़ान की कहानी विक्रम ने खुद लिखी है और वो कहते हैं "हम में से लगभग सभी अपना करियर बनाने में इस तरह के दौर से गुज़रते हैं जब परिवार वालों को अपनी पसंद के करियर के लिए राज़ी करने में खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है "

विक्रमादित्य का निर्देशक के रूप में करियर कितनी उड़ान भर पाता है ये तो फ़िल्म की रिलीज़ ही तय करेगी

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