बरकरार है डीडीएलजे का जलवा

Image caption शाहरुख खान ने काजोल के साथ कई फ़िल्मों में काम किया है

हिंदी फ़िल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे दक्षिण मुंबई के मराठा मंदिर सिनेमा घर में पिछले 15 वर्षों से चल रही है.

डीडीएलजे 1995 में रिलीज़ हुई थी और इसने बॉक्स ऑफ़िस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. एक हज़ार सीटों वाले मराठा मंदिर सिनेमाघर में पिछले 769 सप्ताह से चल रही फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे आज भी सप्ताह के अंत में हाउस फुल रहती है.

डीडीएलजे देखने के लिए दर्शकों की अच्छी खासी संख्या दोपहर के शो में जुटती है. फ़िल्म देखने के लिए सबसे अच्छी सीट के लिए बतौर टिकट 20 रुपये खर्च करने पड़ते हैं.

सिनेमाघर के कार्यकारी निदेशक मनोज देसाई कहते हैं, "फिल्म की रिकॉर्ड सफलता के कई कारण हैं. इसमें कर्णप्रिय संगीत और बॉलीवुड की बेहतरीन जोड़ी है. थिएटर भी ऐसी जगह है कि मुंबई आने-जाने वाले लोगों में से ही 40 प्रतिशत दर्शक मिल जाते हैं. यह भीड़-भाड़ वाला इलाका है. इसलिए इतने सालों से यहां दर्शक मिलते आ रहे हैं. फ़िल्म में एक और बात महत्वपूर्ण है और वो ये कि इसमें संदेश देने की कोशिश की गई है कि माता-पिता की सहमति से ही प्यार करें."

प्रेम कहानी

फ़िल्म में प्रेम कहानी है, यूरोप के टूर पर लड़का - लड़की (दोनों भारतीय हैं और लंदन में रहते हैं) मिलते हैं. लेकिन लड़की की शादी उसके पिता के दोस्त के लड़के से (जो भारत के पंजाब में रहता हैं) तय हो गई होती है. इसके बाद मनोरंजक ड्रामा और लंदन से पंजाब आना-जाना शुरु होता है और अंत में दोनों प्रेमी परिवार की सहमति और आशीर्वाद से मिलते हैं. इसमें बॉलीवुड के अभिनेता शाहरुख खान और काजोल की जोड़ी है, जो अब भी लोगों के दिलों पर छाए रहते हैं.

शाहरुख खान के लिए ये फिल्म मील का पत्थर बनी. उस समय वे एक रोमांटिक अभिनेता के रूप में जाने जाते थे.

सिनेमाघर के मुख्य प्रोजेक्टर चलाने वाले जगजीवन मारू इस फ़िल्म को तब से देख रहे हैं जब से यह रिलीज़ हुई है. वह कहते हैं, "ये फिल्म शानदार है. मैं इसे पिछले 14 सालों से प्रतिदिन देख रहा हूं, यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. हालांकि फ़िल्म देखना हमारी नौकरी है, तब भी मैं इस फिल्म को देख कर कभी नहीं ऊबा."

फिल्म देखने आए ऋषि कहते हैं, "कई साल पहले हमने इस फ़िल्म को चार-पांच बार देखा है, वैसे टीवी पर भी इसे देखा है."

वाणिज्य विश्लेषक तरण आदर्श ने कहा, " फ़िल्म में संगीत, अभिनय, निर्देशन सब कुछ ठीक है. इसे हमेशा टीवी पर दिखाया जाता है, इसके बावजूद ये फिल्म संग्रहणीय है."

सिनेमाघर के अधिकारी इस फ़िल्म को तब तक चलाने की योजना में है जब तक संभव हो. साथ ही अक्टूबर 2010 में इसके 15 वर्ष पूरे होने पर एक शानदार समारोह आयोजित करने की भी योजना बना रहे हैं.

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