काफ़्का की रचनाओं पर से रहस्य हटेगा

एस्थर हॉफ़
Image caption काफ़्का के दोस्त मैक्स ब्रॉड ने रचनाओं को अपनी सचिव एस्थर हॉफ़ के पास छोड़ दिया

दिवंगत लेखक फ्रांज़ काफ़्का की कई पांडुलिपियों और रेखाचित्रों पर पड़ा रहस्य का पर्दा जल्दी ही उठ सकता है.

माना जाता है कि काफ़्का की कई पांडुलिपियां और रेखाचित्र ज़्यूरिख के एक बैंक लॉकर में सुरक्षित रखे गए हैं और अब ये लॉकर खोला जा रहा है.

इस क़दम से काफ़्का की रचनाओं को लेकर चल रही क़ानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आ गया है.

काफ़्का की रचनाओं पर मालिकाना हक़ किसका हो, इस पर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही है.

इसराइल की रहने वाली दो बहनों का कहना है कि उन्हें ये दस्तावेज अपनी मां से विरासत में मिले थे. लेकिन इसराइल की सरकार इस पर अपना दावा करती है. उसका कहना है कि यह पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर है.

बक्सों में रखी सामग्री का परीक्षण काफ़्का के साहित्य से जुड़े एक विशेषज्ञ करेंगे. उसके बाद वो इस बारे में अपनी रिपोर्ट इसराइल के जज़ को पेश करेंगे जो इस मामले को देख रहे हैं.

दुनिया भर के साहित्य प्रेमियों का कहना है कि दशकों से छिपी इन पांडुलिपियों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए,

प्रभावशाली उपन्यासकार

फ़्रांज़ काफ़्का 20वीं शताब्दी के सबसे प्रभावशाली उपन्यासकारों में से एक रहे हैं.

उनकी मौत क्षय रोग से महज 40 साल की उम्र में 1940 में हो गई. काफ़्का की इच्छा थी कि 'द ट्रायल' और 'द कैशल' जैसे उनके उपन्यास कभी भी लोगों के सामने न आएं.

उन्होंने अपने दोस्त ब्रॉड से कहा कि मौत के बाद उनकी सभी पांडुलिपियों को जला दिया जाए. लेकिन ब्रॉड ने इस बात को स्वीकार नहीं किया. काफ़्का की मौत के बाद उन्होंने इन उपन्यासों का प्रकाशन करवाया.

ब्रॉड इन पत्रों और लेखन सामग्री को लेकर इसराइल चले गए. इन रचनाओं को उन्होंने अपनी सचिव एस्थर हॉफ़ के पास छोड़ दिया. हॉफ़ ने इन रचनाओं को अपनी दो बेटियों को वसीयत में दे दिया.

पिछले 50 सालों से ये रचनाएं तेल अवीव और ज़्यूरिख के बैंकों में रखी गईं थीं.

हॉफ़ की दोनों बेटियों ने जब कुछ पांडुलिपियों को बेचने की कोशिश की, तभी से एक कानूनी लड़ाई शुरू हो गई.

इसराइल की सरकार देश की धरोहर के नाम पर इस पर अपना दावा कर रही है जबकि दोनों बेटियां इस पर अपना हक़ जताती हैं.

इस बीच जर्मनी के साहित्य लेखागार ने इन पांडुलिपियों को खरीदने की पेशकश की है.

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