अदभुत हैं सचिन तेंदुलकर: अमिताभ बच्चन

अमिताभ बच्चन
Image caption चैंपियंस लीग के ब्रैंड अम्बैसेडर हैं अमिताभ बच्चन

बॉलीवुड के शहंशाह कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन क्रिकेट के बादशाह सचिन तेंदुलकर की तारीफ करने का एक मौका नहीं गंवाते. अमिताभ कहते हैं कि सचिन एक महान और अदभुत खिलाड़ी हैं.

अमिताभ कहते हैं कि सचिन एक ऐसे खिलाड़ी है जिनकी उम्र का उनके खेल पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, बल्कि बढ़ती उम्र के साथ साथ सचिन नए कीर्तिमान अपने नाम कर रहे हैं.

सितंबर में दक्षिण अफ्रीका में होनेवाली चैंपियंस लीग के लिए अमिताभ बच्चन को ब्रैंड अम्बैसेडर बनाया गया है. हाल ही में इसकी घोषणा मुंबई में की गई. चैंपियंस लीग में ऑस्ट्रेलिया, नयूज़ीलैंज, दक्षिण अफ्रीका, वेस्ट इंडीज़ और भारत से कुल दस टीमें हिस्सा लेंगी. 10 से 23 सितंबर तक ये प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी.

अमिताभ कहते हैं कि उनकी कोशिश है कि वो चैंपियंस लीग को जन जन तक पंहुचा पाएं. अमिताभ कहते हैं कि शायद ही कोई ऐसा भारतीय हो जिसके जीवन को क्रिकेट ने छुआ ना हो. वो खुद बचपन से ही क्रिकेट के फ़ैन रहे हैं.

अमिताभ बच्चन एक अच्छे वक्ता हैं तो क्या उनकी इस ख़ूबी की झलक दिखाई देगी चैंपियंस लीग के दौरान. मतलब क्या वो क्रिकेट कमेंटरी करेंगे. इस सवाल के जवाब में अमिताभ कहते हैं कि इस काम को करने के लिए सिर्फ अच्छा वक्ता होना अनिवार्य नहीं है बल्कि आपको क्रिकेट से जुड़े हर पहलू की अच्छी जानकारी होना ज़रूरी है. अमिताभ कहते हैं कि ये ज़रूरी है कि क्रिकेट के इतहास पर भी आपकी अच्छी पकड़ हो.

Image caption अमिताभ की कई निजी यादें जुडी शोले के साथ

अमिताभ बच्चन हों और उनकी फ़िल्मों का ज़िक्र न हो ये कैसे हो सकता है भला. उनकी फ़िल्म शोले को तीस साल से भी ज्यादा का वक़्त हो गया है. लेकिन अमिताभ कहते हैं ऐसा लगता है मानो जैसे कल ही की बात हो. अमिताभ ये भी कहते हैं कि इस फ़िल्म से उनकी कई निजी यादें जुड़ी हैं.

शोले अमिताभ और जया बच्चन की शादी के एक साल बाद बनना शुरू हुई थी और फ़िल्म की शूटिंग के दौरान जया गर्भवती थीं. धर्मेन्द्र और अमिताभ की दोस्ती भी फ़िल्म के दौरान बहुत गहराई.

अमिताभ ये भी कहते हैं कि फ़िल्म रिलीज़ होने के ठीक एक दिन बाद शोले के निर्देशक रमेश सिप्पी और जावेद अख्तर उनसे मिलने उनके घर आए थे क्यूंकि फ़िल्म को बॉक्स आफ़िस पर अच्छी शुरुआत नहीं मिली थी. इस पर तीनों ने मिलकर ये फैसला लिया कि फ़िल्म के अंत में अमिताभ के किरदार जय की मौत का जो सीन है उसे बदल दिया जाए. आखिरी सीन को शूट करने के सारे इंतिज़ाम कर लिए गए पर फिर रमेश सिप्पी ने कहा कि वो एक दिन और रुकना चाहेंगे.

अमिताभ कहते हैं कि रमेश सिप्पी का वो फ़ैसला सही निकला और शोले एक ऐतिहासिक फ़िल्म बन गई.

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