नए गाने सुरीले नहीं होते: आशा भोंसले

आशा भोंसले
Image caption ताल पर ही सारा ज़ोर दिए जाने से नाख़ुश हैं आशा भोंसले

आशा भोंसले को गाते हुए छह दशक से भी ज़्यादा का समय बीत चुका है. लेकिन आज भी उनके चाहने वालों की कमी नहीं है.

हर दौर के गीतकारों, संगीतकारों और श्रोताओं के बीच आशा भोंसले की लोकप्रियता बरक़रार है.

लेकिन वह नए दौर के संगीत से कुछ ख़ास खुश नहीं है.

बीबीसी के साथ एक ख़ास मुलाक़ात में आशा भोंसले ने कहा "आजकल के गाने सुरीले नहीं होते. लोग ताल पर ज़्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन बोलों पर ज़ोर नहीं दिया जाता."

आशा ने बताया कि पुराने दौर में बड़े-बड़े स्टूडियो होते थे. गायक और संगीतकार रिकॉर्डिंग के वक़्त एक साथ होते थे, जिस वज़ह से गाना अच्छा बनता था. वो कहती हैं "आजकल कंप्यूटर की वज़ह से एक-एक लाइन, एक-एक बोल रिकॉर्ड करके गाना बना देते हैं."

ट्विटर पर मौजूदगी

आशा ने बताया कि जब वो पाँच-छह साल की थीं, तभी से उनके पिता ने उन्हें गाना सिखाना शुरु कर दिया था. उन्होंने कहा "मैं शुरुआत से ही गायिका बनना चाहती थी. लेकिन ये नहीं पता था कि इस उम्र तक भी गाना गाती रहूंगी."

वो कौन से गाने हैं जो लोगों को सबसे ज़्यादा पसंद हैं, और लोग उनसे बार-बार सुनना चाहते हैं? ये पूछने पर आशा ने कहा " मेरे कॉन्सर्ट में लोग 'चुरा लिया है तुमने', 'आगे भी जाने ना तू', 'पर्दे में रहने दो', 'जाइए आप कहाँ जाएँगे', 'आइए मेहरबाँ' जैसे गाने सुनने की ज़्यादा फ़रमाइश करते हैं."

बदलते वक़्त के साथ ख़ुद को ढालते हुए आशा भोंसले ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं. उन्होंने बताया कि इससे वो शम्मी कपूर जैसे अपने पुराने दोस्तों के संपर्क में रहती हैं.

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