रावण का किरदार मेरा पसंदीदा किरदार है : आशुतोष राणा

अभिनेता आशुतोष राणा का कहना है कि रावण उनके पसंदीदा किरदारों में से एक हैं और जब उन्हें पता चला कि उन्हें इस किरदार के लिए आवाज़ देनी है तो उन्हें बेहद ख़ुशी हुई.

वाल्मीकि रचित रामायण पर आधारित है इस हफ़्ते रिलीज़ हो रही ऐनिमेशन फ़िल्म रामायण:दि एपिक. इस फ़िल्म में आशुतोष राणा ने रावण के लिए, मनोज वाजपेयी ने राम के लिए और जूही चावला ने सीता के किरदार के लिए अपनी आवाज़ें दी हैं.

आशुतोष ने बीबीसी से एक बातचीत में कहा कि राम को नर से नारायण बनाने का श्रेय रावण को ही जाता है, इसलिए वो रावण की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हैं.

आशुतोष का कहना था कि एक कमरे में अकेले खड़े होकर किसी किरदार की कल्पना कर उसकी भावनाओं को अपनी आवाज़ से जीवित कर देना काफ़ी चुनौतीपूर्ण काम है.

बेहतरीन अदायगी की मिसाल

उन्होंने मनोज वाजपेयी के बारे में बात करते हुए कहा कि उनके साथ काम करने वाला सिर्फ़ सह कलाकार ही नहीं होता बल्कि वह काफ़ी हद तक दर्शक बन जाता है, क्यूंकि मनोज की अदायगी अपनी तरफ़ खींचती है.

फ़िल्म के निर्देशक चेतन देसाई ने बीबीसी को बताया कि फ़िल्म में आशुतोष राणा, मनोज वाजपेयी और जूही चावला ही उनकी पहली पसंद थे.

और इतने बड़े कलाकारों को राज़ी करने के लिए उन्होंने सबसे पहले फ़िल्म का एक छोटा सा ट्रेलर तैयार किया और तब इन कलाकारों के पास अपना प्रस्ताव ले गए. ट्रेलर को देख कर ही कलाकारों ने हामी भर दी क्यूंकि फ़िल्म में इस्तेमाल हुआ ऐनिमेशन आम भारतीय ऐनिमेशन फिल्मों से कहीं बेहतर है.

राम के किरदार के लिए उन्हें ऐसी आवाज़ चाहिए थी जिसे सुनकर धैर्य का अनुमान लगाया जा सके, और मनोज की आवाज़ फ़िल्म में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की ही आवाज़ लगती है.

जबकि रावण का किरदार इसके बिलकुल विपरीत है, उसके लिए उन्हें ऐसी आवाज़ चाहिए थी जिसमें पूरे बल के साथ आक्रोश झलक सके, इसीलिए उन्होंने आशुतोष राणा को चुना जिनकी आवाज़ इस किरदार पर बिलकुल सटीक बैठती है.

एक बड़ी चुनौती

मनोज वाजपेयी ने बीबीसी सेकहा कि क्यूंकि राम के किरदार से लगभग सभी परिचित हैं इसलिए ये बहुत बड़ी चुनौती थी कि किस तरह संवादों की अदायगी की जाए कि लोगों को देख कर विश्वास हो जाए कि यही राम हैं.

Image caption जूही चावला का कहना है कि सीता की व्यथा को आवाज़ से जीवंत करना बहुत चुनौती भरा काम था

मनोज के अनुसार अब तक भारत में ऐनिमेशन का जो स्तर रहा है ये फ़िल्म उससे कहीं आगे है.

जूही चावला ने बीबीसी को बताया कि सीता जी का किरदार काफी शांत किस्म का है इसलिए इस किरदार को महसूस करने के लिए उन्हें उस समय और हालात की कल्पना करनी पड़ी.

जूही के हिसाब से वो इस बात का कभी अनुमान नहीं लगा पाती हैं कि उन्होंने कैसा काम किया है, ऐसा ही उनके साथ इस बार भी है. जूही ने बीबीसी से कहा कि फ़िल्म तैयार होने पर रावण और राम के संवाद सुनने पर उन्हें कहीं न कहीं ज़रूर लगा कि पता नहीं उन्होंने इतनी ज़बरदस्त संवाद अदायगी की है या नहीं जितनी आशुतोष और मनोज ने की है.

जूही चावला उस सीन को सबसे मुश्किल मानती हैं जिसमें सीता को ये संदेश मिलता है कि राम रावण के साथ युद्ध में मारे गए और वो रोते हुए कहती हैं कि वो अब जीना नहीं चाहतीं. जूही ने बताया कि ऐसे में आपको खुद उन हालात में किसी अपने की कल्पना करनी पड़ती है ताकि आप उन भावनाओं को पूरे न्याय के साथ अदा कर सकें, जो कि काफी मुश्किल होता है.

फ़िल्म 15 तारीख़ को रिलीज़ हो रही है जिसे जूही बिलकुल सही समय मानती हैं, क्यूंकि 17 को दशहरा है और इस अवसर पर दर्शकों की रामायण जैसे विषय में रूचि स्वाभाविक है. साथ ही बच्चों के स्कूलों में छुट्टी के चलते फ़िल्म को अच्छी बिज़नेस मिल सकती है.

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