'भारतीय फ़िल्मी संगीत नहीं है दुनिया भर में लोकप्रिय'

शंकर महादेवन

मशहूर गायक शंकर महादेवन का मानना है की भारतीय फ़िल्मी संगीत अब भी दुनिया में उतना लोकप्रिय नहीं है जितना लोग सोचते हैं.

कई देशों में कार्यक्रम पेश कर चुके शंकर महादेवन ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "बाहरी देशों में लोगों को हमेशा शास्त्रीय संगीत ही ज़्यादा पसंद आता है. भारतीय फ़िल्मी संगीत को शास्त्रीय संगीत जैसी लोकप्रियता पाने में और कई साल लग जायेंगे."

मिशन कश्मीर, दिल चाहता है और माई नेम इज़ ख़ान जैसी कई सुपरहिट फ़िल्मों का संगीत दे चुकी शंकर, एहसान, लॉय की संगीतकार तिकड़ी आख़िर बनी कैसे? इस बारे में शंकर ने बताया कि शुरू में तीनों ही संगीतकार टीवी विज्ञापनों के जिंगल्स बनाया करते थे. वहाँ की दोस्ती धीरे धीरे इन्हें फ़िल्मी दुनिया की ओर खींच लाई.

शंकर महादेवन ने की तो इंजीनियरिंग थी, पर हमेशा से ही उन्हें संगीत का इतना शौक था की उसके लिए अपनी अच्छी ख़ासी नौकरी छोड़ने में भी उन्हें कोई हिचक नहीं हुई.

ये पूछे जाने पर कि किस तरह का संगीत आपके दिल के सबसे करीब है, शंकर महादेवन ने कहा, "मैं कभी भी एक तरह के संगीत के साथ जुड़ना नहीं चाहूँगा और हर फ़िल्म के साथ मेरी यही कोशिश रहती है कि में कुछ नया कर सकूं."

इतने गानों को बनाने और गाने के बावजूद शंकर महादेवन अब भी अपने आपको संगीत का विद्यार्थी ही मानते हैं. उनका कहना है, "अच्छा संगीत बनाने के लिए यह ज़रूरी है कि हम हमेशा कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहें."

उनके मुताबिक़ एक अच्छा कलाकार बनने के लिए पढ़ना-लिखना भी बहुत ज़रूरी है, क्योंकि तभी संगीत में एक ऐसा आत्मविश्वास आता है, जो लोगों का दिल जीत लेता है.

शंकर का मानना है कि संगीत एक ऐसी साधना है जो कई बार हमें रोज़मर्रा की ज़िन्दगी के परे एक ऐसा अपूर्व अनुभव देती है, जिसे हम कभी भूल नहीं सकते.

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