संजय दत्त के लिए मुश्किलें

संजय और मान्यता
Image caption संजय दत्त ने शकील नूरानी की फ़िल्म आधी करने के बाद छोड़ दी थी.

फिल्म अभिनेता संजय दत्त के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. एक प्रोड्यूसर की फ़िल्म साइन करने के बाद आधे में छोड़ देने और फिर उसका मुआवज़ा नहीं देने के कारण संजय दत्त के दो कार्यालयों पर ताला लगा दिया गया है.

यह मामला 2001 का है जब प्रोड्यूसर शकील नूरानी ने संजय दत्त को अपनी फ़िल्म जान की बाज़ी के लिए साइन किया था और 50 लाख रुपए दिए थे.

बाद में संजय ने यह फ़िल्म छोड़ दी जिसके बाद नूरानी के अनुसार उन्हें ज़बर्दस्त घाटा हुआ. नूरानी ने संजय के ख़िलाफ़ इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन में शिकायत की और आईएमपीपीए ने नूरानी के पक्ष में फ़ैसला दिया.

नूरानी के वकील अशोक सरावगी का कहना है कि संजय ने फ़िल्म आधी करने के बाद छोड़ दी थी और आईएमपीपीए ने नूरानी के पक्ष में फैसला दिया है. अब नूरानी ने हाई कोर्ट में अपील की थी कि आईएमपीपीए के फ़ैसले को लागू किया जाए.

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद संजय दत्त के पाली हिल सांताक्रूज स्थित ऑफिस पर ताला लगा दिया है. आईएमपीपीए ने जनवरी 2010 में नूरानी के पक्ष में फ़ैसला दिया था जिसके बाद संजय दत्त के पास तीस दिन तक इसके ख़िलाफ़ अपील करने का समय था लेकिन उन्होंने अपील नहीं की.

इस साल अक्तूबर महीने में नूरानी ने हाई कोर्ट में अपील की थी जिसके बाद उनकी संपत्ति ज़ब्त करने का आदेश दिया गया.

हालांकि अभी संजय दत्त के पास हाई कोर्ट में आईएमपीपीए के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने का अधिकार है और संजय के वकील के अनुसार वो इस मामले में कोर्ट की छुट्टियों की अवधि ख़त्म होने के बाद अपील करेंगे.

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