भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ संगीतमय पहल

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भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध उमड़ते भावों को राजस्थान में रंगमंच और संगीत के युवा कलाकारों ने एक वीडियो म्यूज़िक अलबम के जरिए अभिव्यक्त किया है.

युवा कलाकारों की ये टोली 'रैप म्यूजिक'के सहारे भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अलख जगाने का प्रयास कर रहे है. उन्हें लगता है इससे घोटालों के ख़िलाफ़ एक माहौल बनेगा.

घोटालों से घटाटोप सियासत और भ्रष्टाचार के प्रतिमान बने सरकारी दफ़्तरों के ख़िलाफ़ इन कलाकारों की आवाज़ ऐसे कौंधी गोया भ्रष्टाचार की घनघोर घटाओं के बीच कोई छोटी बिजली सी कौंधी है.

कला हर दौर में पनपती है, मगर समय के साथ उसकी दिशाएं बदल जाती हैं. मुल्क में अवाम भ्रष्टाचार से परेशान है. लिहाजा फनकार ने अपने गीत संगीत में इसे ज़माने के सामने रखा है.

इस अलबम के एक किरदार अशोक विश्नोई कहते है, ''भ्रष्टाचार से मैं खुद परेशान था. जब भी टीवी देखो, हर वक्त भ्रष्टाचार के किस्से देखने को मिलते है. राष्ट्रमंडल खेलों को ही देखो, उसमे भ्रष्टाचार के कई मामले हुए. आम आदमी भी सोचता है कि ये पैसा हमारे काम आ सकता था, तो भ्रष्टाचार से हर आदमी दुखी था और मन में एक गुस्सा था, वो ही इसमें उतारा गया है.''

इन कलाकारों अपनी आवाज़ मुखरित करने के लिए संगीत की मदद ली है. ये वीडियो अलबम उसी शैली में है.

चर्चित घोटालों पर गीत

उनके गीतों में हाल के बड़े चर्चित घोटालों का शुमार है. ये अलबम ऐसे वक्त जारी किया गया है जब अरब देशों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक तूफ़ान सा उठा. वहां कई तख्त गिरे कई हिले भी.

इस अलबम का हिसा बने अमित भारत के संदर्भ में कहते हैं, ''इसमें संदेश की बात नहीं है. हमारे युवाओं से गुजारिश है कि वो थोड़ा अपने आपको बदलें. हमें उस रास्ते पर जाना है जिस मार्ग पर बड़े लोग चले है. हम एक भी व्यक्ति को बदल पाए तो एक कामयाबी होगी.'' भ्रष्टाचार पर देश में बहस छिड़ी है और हर पार्टी ख़ुद को पाक साफ़ और दूसरी को भ्रष्टाचार से सरोबार बता रही है. सियासी मंचों पर नारों का शोर है. ऐसे में इस वीडियो अलबम के सामने अपनी बात अवाम तक पहुँचाने की बड़ी चुनौती है.

इस वीडियो को अपनी आवाज़ देने वाले रवींद्र इस वीडियो के कला पक्ष पर बात करते हैं और कहते हैं ये कला के लिहाज से बेहतर है.

वो कहते हैं, ''ये युवाओं को लेकर तैयार किया गया है क्योंकि युवा आधुनिक पश्चिमी म्यूज़िक सुनना पसंद करता है. ये केची भी होना चाहिए. ये रैप है जो फैशन में है, इसे युवा बड़े ध्यान से सुनते है.''

रवींद्र बताते हैं, ''जैसे आप पहली लाइन देखें, इसके बोल हैं चारों तरफ अँधेरा जाने कब होगा सवेरा.. ये केच लाइन है जो आसानी से याद रह जाती है.फिर जो इसे सुनेगा, डांस करेगा, गुनगुनाएगा और उसे अचानक लगेगा अरे ये तो भ्रष्टाचार के विरुद्ध आव्हान है, ये तो वो ही है जो मैं खुद रोज अपने जीवन में भुगत रहा हूँ.''

ये ऐसा दौर है जब ईमानदारी कही कौने में तनहा है, संकुचित सी खड़ी है, भ्रष्टाचार मंचों पर महिमामंडित है और वो ऊँची आवाज़ में बोल भी रहा है.

ऐसे में इन गीतों में का कितना असर होगा, कहना मुश्किल है. मगर ये भी सही है हर लंबी यात्रा एक क़दम से शुरू होती है.

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