'गेम'- नवीनता की कमी

निर्माता जोड़ी फ़रहान अख्तर और रितेश सिधवानी की नई फ़िल्म 'गेम’है

फ़िल्म एक मर्डर मिस्ट्री के रंग में रंगी सस्पेंस थ्रिलर है और इस तरह की फ़िल्मों में गीत-संगीत की बहुत अहम भूमिका नहीं होती है. मगर फ़रहान-रितेश की अब तक बनाई हर फ़िल्म (दिल चाहता है, लक्ष्य, डॉन, रॉक ऑन)में संगीत महत्वपूर्ण पहलू रहा है. इसलिये इस फ़िल्म के संगीत के बारे में उत्सुकता है.

फ़रहान-रितेश ने हर बार की तरह इस बार भी फ़िल्म के संगीत और गीत के लिये अपनी स्थायी टीम, शंकर-एहसान-लॉय और जावेद अख़्तर को मौका दिया है. इसलिये 'गेम’ के संगीत से अपेक्षाएं स्वाभाविक हैं.

एलबम में चार मुख्य गीतों के साथ कुल सात गाने हैं.

एलबम की शुरुआत फ़िल्म के टाइटल गीत 'इट्स अ गेम’ से होती है जिसे विशाल डडलानी ने स्वर दिया है. फ़िल्म की थीम और मूड को ध्यान में रखते हुए शंकर-एहसान-लॉय ने गीत में टेक्नो साउंड को प्राथमिकता दी है. इस किस्म की फ़िल्मों के टाइटल गीत का एक ‘स्टैन्डर्ड टैम्प्लेट’ रहता है, बहुत कुछ जेम्स बॉंड की थीम की तरह. शंकर-एहसान-लॉय ने बहुत कुछ उसी को आधार बनाया है. जावेद अख्तर ने सीधे सरल शब्दों में फ़िल्म के किरदारों के संघर्ष और आपसी गेम को बयान किया है. गीत की ख़ास बात विशाल डडलानी की गायकी है. उनकी आवाज़ का ‘टैक्स्चर’ गीत के मूड और दुविधा को उभारने में योगदान देता है. गीत का एक और ‘वर्ज़न’ सुनिता सारथी के स्वर में है जो मुख्य ‘वर्ज़न’ के मुकाबले नीरस लगता है. कुल मिलाकर नवीनता का अभाव है मगर एक ठीक-ठाक सा गीत बन पड़ा है.

‘महकी महकी’ इस एलबम का मुख्य गीत कहा जा सकता है. ये एक कैबरे किस्म का गीत है जिसकी धुन और संयोजन में ‘रेट्रो फ़ील’ लिये ‘मिडल-ईस्ट अरेबियन’ संगीत का आधार लिया है. गाने में बेहतरीन वाद्य संयोजन है. ख़ासतौर पर ‘इन्टरल्यूड्स’ का संयोजन और अन्तरे की धुन के साथ श्रेया घोषाल के मीठे स्वर गीत को असर प्रदान करते हैं. गीत में श्रेया का साथ क्षितिज वाघ ने बख़ूबी दिया है और कुल मिला कर एक ख़ूबसूरत गीत बन पड़ा है. एलबम में गीत का ‘रीमिक्स वर्ज़न’ भी है जो थोड़ा तेज़ गति में है और लोकप्रिय होने की गुंजाइश रखता है.

'मैनें ये कब सोचा था’ एलबम की अगली प्रस्तुति है. शान और अनुषा मणि के स्वर हैं जिनका साथ दिया है लॉय ने. एक मधुर रोमांटिक गीत है और गीत को प्रारम्भ में पियानो का साथ एक खूबसूरत वातावरण देते हैं. मगर बीच-बीच में कोरस का उपयोग गीत के असर को कम करता है और अन्त में ये गीत बहुत ज्यादा असर नहीं छोड़ पाता.

साउंड्ट्रैक में अन्तिम मुख्य गीत है 'कौन है अजनबी’ जिसे केके और अदिति सिंह ने गाया है. जावेद अख़्तर के शब्द फ़िल्म की ‘थीम’ को उभारते हैं. फ़िल्म का रहस्यमयी वातावरण और किरदारों की अनिश्चितता और हर क्षण बदलते समीकरणों को गीत के बोल और धुन उभारते हैं.

कुल मिलाकर 'गेम’ असाधारण सा एलबम नहीं है और गीतों में नवीनता की कमी अखरती है. थीम के हिसाब से ठीक-ठीक एलबम है मगर जावेद अख़्तर और शंकर-एहसान-लॉय की जोड़ी से जिस स्तर की अपेक्षा रहती है उस स्तर पर नहीं पहुंच पाया है.

इस संगीतकार तिकड़ी ने इसी जॉनर की पिछली फ़िल्म 'जॉनी गद्दार’ में बहुत लोकप्रिय, प्रयोगात्मक और अनूठा संगीत दिया था मगर ’गेम’ उसके मुकाबले कमज़ोर एलबम है. गीतों का कुछ असर शायद फ़िल्म में दिखाई दे मगर फ़िल्म के बाहर साउंडट्रैक 'महकी महकी’ को छोड़ कर बाकी एलबम के बहुत लोकप्रिय होने की गुंजाइश नहीं है.

नम्बरों के लिहाज़ से पाँच मे से ढाई अंक.

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