'व्यावसायिक सिनेमा से इज़्ज़त नहीं मिलती'

शबाना आज़मी
Image caption शबाना आज़मी ने की बीबीसी से ख़ास बातचीत.

शबाना आज़मी एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिन्होंने व्यावसायिक और कला, दोनों तरह के सिनेमा में अपनी ख़ास जगह बनाई. लेकिन शबाना को आर्ट सिनेमा ने ज़्यादा संतुष्टि दी.

बीबीसी से अपने अब तक के सफ़र पर ख़ास बात करते हुए शबाना कहती हैं, "ये सच है कि कमर्शियल सिनेमा आपको पैसे दिलाता है. लेकिन इज़्ज़त हासिल होती है आर्ट सिनेमा से. ओमपुरी, नसीरुद्दीन शाह, स्मिता पाटिल और मेरे सरीखे कलाकारों को कला फ़िल्मों ने बहुत सम्मान दिलाया."

शबाना को उनके करियर की पहली ही फ़िल्म 'अंकुर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. इसके निर्देशक श्याम बेनेगल थे.

वो कहती हैं, "मैंने पुणे फ़िल्म इंस्टीट्यूट से कोर्स किया था. मुझ पर यूरोपियन और जापानी सिनेमा का बहुत प्रभाव था. मुझे हिंदी फ़िल्मी हीरोइन की तरह डांस करते नहीं आता था. लेकिन मेरी ख़ुशकिस्मती थी कि फ़कीरा, अमर अकबर एंथनी और अवतार जैसी फ़िल्में बड़ी हिट रहीं और मेरी गाड़ी चल पड़ी."

शबाना आज़मी ने बताया कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी होने के बाद जब उन्होंने जया भादुड़ी की फ़िल्म 'सुमन' देखी तो वो बहुत प्रभावित हुईं और उसके बाद उन्होंने पुणे फ़िल्म इंस्टीट्यूट ज्वाइन करने का फ़ैसला किया.

वैसे तो शबाना आज़मी अपने करियर से पूरी तरह से संतुष्ट हैं. लेकिन उन्हें कुछ फ़िल्में करने का मलाल भी है.

वो कहती हैं, "राजेश खन्ना के साथ मेरी फ़िल्म थोड़ी सी बेवफ़ाई बड़ी हिट साबित हुई थी. लेकिन उसमें कुछ महिला विरोधी संवाद थे. पता नहीं उस वक़्त कैसे मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ. बाद में जब मैं कई महिला संगठनों से जुड़ी तो मुझे लगा कि ऐसे संवाद फ़िल्मों में नहीं होने चाहिए."

शबाना कई सामाजिक संगठनों से जुड़ी हैं. उनका मानना है कि फ़िल्म कलाकारों को इन संगठनों से जुड़ना चाहिए क्योंकि कलाकारों की लोकप्रियता से इन संगठनों को अपने लक्ष्य हासिल करने में काफ़ी आसानी हो जाती है.

लेकिन शबाना ये भी कहती हैं कि कई कलाकार महज़ अपने व्यक्तित्व में निखार लाने के लिए सामाजिक कार्यों से जुड़ते हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए. दिल में वाकई कुछ करने का जज़्बा हो तभी वो काम करना चाहिए.

अपने पति शायर और गीतकार जावेद अख़्तर के बारे में वो कहती हैं, "हर आम पति-पत्नी की तरह हमारे बीच भी झगड़े होते हैं. लेकिन साथ ही हम दोनों का रिश्ता प्यार और विश्वास पर टिका है. हम दोनों एक दूसरे की काफ़ी इज़्ज़त करते हैं. इसलिए अब तक हमारा रिश्ता कायम है."

शबाना की आने वाली फ़िल्में हैं राजधानी एक्सप्रेस और मुक्ति. इसके अलावा वो गिरीश कर्नाड के लिखे और एलेक पद्मसी निर्देशित नाटक ब्रोकन इमेजेस में भी काम कर रही हैं. इस नाटक के देश-विदेश में कई शो हो चुके हैं.

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