बीबीसी सेवेंटी एम एम

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Image caption लेखक निर्देशक अमोल गुप्ते ने स्टैन्ली का डब्बा से ख़ुद को साबित करने का अच्छा प्रयास किया है.

बीबीसी 70 एस एम में इस हफ्ते मनोरंजन जगत से जुड़ी दिलचस्प बातें. इस हफ़्ते की नई फ़िल्मों पर बात. बीबीसी फ़िल्म समीक्षक नम्रता जोशी से जानेंगे किस फ़िल्म में है कितना दम.

इस हफ्ते बॉक्स ऑफ़िस पर चार फ़िल्में अपनी क़िस्मत आज़मा रही हैं- ‘शागिर्द, ‘स्टैन्ली का डब्बा’, ‘रागिनी एम एम एस’ औऱ ‘लव यू मिस्टर कलाकार’.

सबसे पहले बात ‘शागिर्द’ की. इस फ़िल्म का निर्देशन किया है तिगमांशू धूलिया ने फ़िल्म का मुख्य आकर्षण हैं नाना पाटेकर जो एक पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभा रहे हैं. ‘शागिर्द’ बने हैं मोहित अहलावत.

‘हासिल’ बनाने वाले तिगमांशू धूलिया से काफ़ी उम्मीदें थीं वैसे भी फ़िल्म को बनने में काफ़ी वक्त लग गया लेकिन बीबीसी फ़िल्म समीक्षक नम्रता जोशी कहती हैंकि ‘फ़िल्म महज़ टाइम-पास है हालांकि नाना का किरदार जनता को ज़रूर पसंद आएगा लेकिन हासिल निर्देशित करने वाले तिगमांशू से उम्मीदें ज्यादा थी’.

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इस हफ़्ते की दूसरी रिलीज़ है अमोल गुप्ते निर्देशित ‘स्टैन्ली का डब्बा’. गुप्ते ने अपनी निर्देशकीय पारी की शुरूआत की है औऱ नम्रता जोशी का कहना है कि शरूआत बहुत अच्छी है '.

‘रागिनी एम एम एस’ इस हफ्ते की तीसरी फ़िल्म है. हमारी फ़िल्म समीक्षक नम्रता जोशी कहती हैं कि ‘कहानी रामसे ब्रदर्स की फ़िल्मों की याद दिलाती है. एम एम एस जैसे मुद्दे को आधार बनाकर कुछ डरावनी कहानी बुनने की कोशिश बेकार साबित हुई है. फ़िल्म में कहानी से लेकर ट्रीटमेंट तक सबकुछ उधार का है’.

सप्ताह की चौथी फ़िल्म 'लव यू कलाकार' पुरानी परंपरागत तरह की कहानी है जहां लड़की अमीर औऱ लड़का ग़रीब है. नम्रता जोशी कहती हैं कि ‘इस तरह की उबाऊ कहानियां अब बड़े शहरों के दर्शकों को तो रिझा नहीं सकतीं लेकिन छोटे शहरों में शायद अभी भी इस तरह का दर्शक वर्ग है जो इसे स्वीकार कर सकता है’.

ख़ास पेशकश

हिन्दी सिनेमा की जानी मानी अभिनेत्री वहीदा रहमान ने इस हफ़्ते अपना 75 वां जन्मदिन मनाया. बीबीसी सेवेन्टी एम एम में कुछ ख़ास लम्हें बाटेंगे वहीदा रहमान के साथ