‘एंग्री यंग मैन मेरी नहीं मीडिया की देन’

अभिनेता अमिताभ बच्चन

सत्तर के दशक में ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में हिंदी सिनेमा में छाने वाले अमिताभ बच्चन कहते हैं कि उनकी ये छवि मीडिया की बनाई हुई है.

लेकिन ये भी सच है कि ज़ंजीर, दीवार और शोले जैसी फ़िल्मों में अमिताभ बच्चन की इस छवि को दर्शकों ने बेहद पसंद किया.

बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में अमिताभ बच्चन ने कहा, “बतौर ऐक्टर मुझे जो भी रोल दिए गए, मैंने वो किए, चाहे वो एंग्री यंग मैन का हो या कॉमेडी. मैंने जानबूझ कर ऐसे रोल नहीं चुने. एंग्री यंग मैन वाला रोल लेखकों की कल्पना थी. इसलिए ये कहना सही नहीं है कि मैंने सिर्फ़ एंग्री यंग मैन के रोल किए हैं या फिर उन किरदारों की वजह से मुझे पहचान मिली.”

अमिताभ ने आगे कहा, “मैंने बहुत तरह के रोल किए हैं और आगे भी करता रहूंगा. हां, अगर मीडिया मेरे काम का इस तरह वर्गीकरण करना चाहता है, तो ये उनकी सोच है, मैं उन्हें रोकूंगा नहीं.”

इन दिनों चर्चा हो रही है कि फ़िल्म, ‘बुढ्ढा होगा तेरा बाप’, में अमिताभ बच्चन एक बार फिर अपनी चिर-परिचित एंग्री यंग मैन वाली छवि में नज़र आएंगे.

क्या भारतीय सिनेमा ग्लोबल है

दुनिया भर में भारतीय फ़िल्मों का बाज़ार धीरे-धीरे बढ़ रहा है. लेकिन क्या वाकई भारतीय सिनेमा को अभी ‘ग्लोबल’ कहा जा सकता है ?

इस बारे में अमिताभ बच्चन का कहना है, “मैं मानता हूं कि इंडियन सिनेमा की दुनिया में पहचान बनाने में भाषा रुकावट है क्योंकि हम हिंदी और अन्य प्रांतीय भाषाओं में फ़िल्में बनाते हैं और ये भाषाएं दुनिया में बहुत से लोग नहीं समझते. लेकिन अब डबिंग और सबटाइटिलिंग के ज़रिए ये दुनिया भर के दर्शकों में पहुंच रही है और उम्मीद करते हैं कि इंडियन सिनेमा ऐसे ही आगे बढ़ेगा.”

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