'एक ख़ास वर्ग में लोकप्रिय होने की गुंजाइश'

इमेज कॉपीरइट PR Agency

इन दिनों किसी फ़िल्म के साथ अगर अनुराग कश्यप का नाम जुड़ा हो तो फ़िल्म के बारे मे उत्सुकता होनी स्वाभाविक है. फ़िल्मों में अपने उग्र तेवरों, तीव्र स्वरों और अनोखे विषयों से पिछले दस सालों में उन्होने अपनी एक ख़ास जगह बना ली है.

अनुराग की फ़िल्मों की तरह ही उनकी फ़िल्मों का संगीत भी अपने अनूठे स्वरों के लिये अलग से पहचान बनाने में कामयाब रहा है. पाँच, नो स्मोकिंग, आमिर, गुलाल, देव डी. और उड़ान, इन सभी फ़िल्मों का संगीत ना सिर्फ़ अपने समकालीन फ़िल्म संगीत से अलग खड़ा नज़र आता है वरन लोकप्रियता के पैमाने पर भी सफल रहा है.

अनुराग कश्यप की निर्माता के तौर पर नवीनतम प्रस्तुति है "शैतान" जिसे नवोदित बिजॉय नाम्बियार निर्देशित कर रहे हैं. फ़िल्म एक मनोवैज्ञानिक क्राइम थ्रिलर है और अब तक के प्रोमोज़ में उत्सुकता बनाने में कामयाब रही है.

फ़िल्म के संगीत की ज़िम्मेदारी बिजॉय ने नवोदित प्रशांत पिल्लई को दी है जो ए. आर. रहमान के सहयोगी रह चुके हैं और बिजॉय की पिछली लघु फ़िल्म "राहू" में संगीत दे चुके हैं. प्रशांत के अतिरिक्त एलबम में रंजीत बारोट, अमर मोहिले और अनुपम रॉय संगीतकार के रूप में मौजूद हैं. संजीव शर्मा और के. एस कृष्णन ने गीतों को बोल दिये हैं. एलबम में कुल सात मुख्य गीतों के साथ कुल 13 ट्रैक्स हैं.

एलबम की पहली प्रस्तुति है ’बाली - द साउंड ऑफ़ शैतान’. थीम को एक गीत कहना मुनासिब नहीं होगा क्योंकि यहां गीत रचने की जगह ज़ोर ध्वनियों पर ज़्यादा है. प्रशांत ने इसे एक प्रायोगिक ट्रैक के तौर पर संगीत शैलियों के फ़्युजन से एक अलग रंग देने की कोशिश की है. ‘लिरिकल टैम्प्लेट’ भी अनूठा है जहां हिन्दी, तमिल और अंग्रेज़ी का मिक्स लेकर बोल रचे गये हैं. फ़रहद, प्रीति पिल्लई, हितेश मोडक और के. एस. कृष्णन का गाया ये गीत फ़िल्म के असामान्य मूड का परिचय देता है.

’नशा’ एलबम की अगली प्रस्तुति है जिसे बिन्दु नाम्बियार के साथ संगीतकार प्रशांत पिल्लई ने खुद स्वर दिये हैं. संजीव शर्मा के बोल, सेलेब्रेशन के महौल में, फ़िल्म के मुख्य किरदारों की दोस्ती और रिश्तों का परिचय देते हैं. प्रशांत की धुन बहुत कुछ ए. आर. रहमान के ‘ब्लू’ की थीम की याद ताज़ा कर देती है. गीत एलबम में एक और वर्ज़न में है जिसे रंजीत बारोट और फ़रहद ने स्वर दिये हैं.

संगीतकार अमर मोहिले की रचना ’जोश-ए-जुनूं’ डांस फ़्लोर्स के लिये बनाया ट्रैक है. हिप हॉप से लेकर भांगड़ा बीट्स तक, ख़ासकर ढोल के प्रयोग से, अमर मोहिले ने इसे पार्टी गीत का रंग देने की कोशिश की है. कोलिन टेरेन्स, अभिषेक और श्रद्धा की गायकी कमज़ोर है. कहीं-कहीं पर स्वर बेसुरे होते नज़र आते हैं और गीत का असर कम करते हैं.

इमेज कॉपीरइट PR Agency
Image caption कल्कि कोचलिन फ़िल्म शैतान में नज़र आएंगी.

’ओ यारा’ एक और प्रायोगिक ट्रैक है जिसे रंजीत बारोट ने रचा है. सूफ़ी और रॉक के फ़्यूज़न से फिर से कुछ अलग करने की कोशिश है. कीर्ती संगठिया और प्रीति पिल्लई की गायकी बेहतर है हाँ, वाद्यों के शोर में शब्द अपने असर खोते नज़र आते हैं. कुलमिलाकर एक ठीक-ठाक सी रचना है ’ओ यारा’.

एलबम की अगली दो प्रस्तुतियां ’पिंटया’ और ’फ़रीदा’ बिलकुल अलग रंग के गीत हैं और एलबम की पिछली प्रस्तुतियों से अलग मूड की रचनाएं हैं. जहां ’पिंटया’ में रंजीत बारोट ने मराठी लोक-गीत का आधार ले कर चंदन शिवा के स्वरों में देहाती माहौल का गीत रचा है, वहीं प्रशांत ने सूरज जगन के स्वरों मे ’फ़रीदा’ में कुछ उदास और विरह का माहौल गढ़ने की कोशिश की है. संजीव शर्मा अगर बोलों पर कुछ और मेहनत करते तो ’फ़रीदा’ एक असरदार प्रस्तुति हो सकती थी.

’ज़िंदगी’ रंजीट बारोट के स्वर में एक अन्य प्रस्तुति है. फ़िल्म के कथानक में ये गीत शायद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाए, मगर बहुत ज़्यादा प्रभाव नहीं छोड़ता. इन ट्रैक्स के अलावा एलबम में कुछ थीम और इंस्ट्रुमेंटल ट्रैक्स भी शामिल हैं जिनमे सुज़ैन के स्वरों में एमी’ज़ थीं प्रभावी है.

कुल मिलाकर "शैतान" का संगीत फ़िल्म के कथानक और मूड के मुताबिक है और एक ख़ास वर्ग में लोकप्रिय होने की गुंजाइश रखता है. प्रशांत पिल्लई और रंजीत बारोट ने ध्वनियों (साउंड) पे ज़ोर दिया है और शब्द कहीं पार्श्व में खड़े नज़र आते हैं. लेकिन अनुराग कश्यप की पिछली फ़िल्मों के संगीत जितना धारदार और असरदार नहीं है शैतान का संगीत.

रेटिंग 2.5/5 (पाँच मे से ढाई)

संबंधित समाचार