सिंघम: नवीनता की कमी

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Image caption पवन झा के मुताबिक़ 'सिंघम' के संगीत में नवीनता की कमी है.

हालिया कुछ वर्षों में 'वांटेड', 'दबंग' और 'रेडी' की ज़बरदस्त कामयाबी ने ऐक्शन और थ्रिलर फ़िल्मों के बाज़ार को फिर से गर्म कर दिया है.

इसी श्रृंखला की अगली कड़ी 'सिंघम', इसी नाम की एक सफल दक्षिण भारतीय फ़िल्म की रीमेक है.

हालांकि इस किस्म की फ़िल्मों में संगीत की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका नहीं होती मगर उपरोक्त सभी फ़िल्मों का संगीत काफ़ी लोकप्रिय रहा था और फ़िल्म के लिये एक आधार बनाने में संगीत का काफ़ी योगदान रहा था इसलिये 'सिंघम' के संगीत से अपेक्षाएं स्वाभाविक हैं.

मगर एक और मुख्य कारण जिसकी वजह से 'सिंघम' के संगीत से काफ़ी उम्मीदें लगाई जा रही थीं वो है इसकी प्रतिभाशाली संगीतकार जोड़ी अजय-अतुल.

अजय-अतुल हिंदी फ़िल्मों में भले ही जाना पहचाना नाम ना हो, मगर मराठी चित्रपट के पिछले कुछ वर्षों के सबसे योग्य संगीतकारों में उनकी गिनती की जाती रही है और पिछले वर्ष का सर्वश्रेष्ठ संगीत का राष्ट्रीय पुरस्कार भी उनके नाम है. इसलिये 'सिंघम' के संगीत के लिये कुछ उत्सुकता है.

एलबम में केवल तीन मुख्य गीत हैं और खानापूर्ति के लिये तीन रीमिक्स ट्रैक्स के साथ कुछ बोनस ट्रैक्स 'गोलमाल रिटर्न्स' और 'ऑल द बेस्ट' जैसी फ़िल्मों के भी डाल दिये गये हैं.

'सिंघम' सुखविंदर सिंह की आवाज़ में शीर्षक गीत है. विशाल भारद्वाज ने 'ओंकारा' में आल्हा-ऊदल पर आधारित शीर्षक गीत 'ओंकारा रे' दिया था जो आजकल लड़ाका फ़िल्मों के लिये एक टैम्पलेट बन गया है.

पहले 'दबंग' और अब 'सिंघम' में भी शीर्षक गीत में वही टैम्पलेट नज़र आता है. धुन और बोलों में समानता के अलावा सुखविंदर सिंह इस किस्म के गीतों के लिये पर्याय बन चुके हैं और अपने ओजस्वी स्वरों से वे यहां पर भी गीत को उचित माहौल प्रदान करते हैं.

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Image caption धुनों के स्तर पर नवीनता की कमी अखरती है मगर अजय-अतुल फिर भी सुनने लायक रचनाएं देने में सफल रहे हैं.

स्वानन्द के बोल फ़िल्म के मुख्य किरदार का परिचय देते हैं. अजय-अतुल ने अंतरों में कुछ नया करने की कोशिश की है और उनका प्रभावी वाद्य संयोजन एक सुनने लायक रचना प्रस्तुत करता है.

एलबम की अगली प्रस्तुति 'साथिया...बदमाश दिल' एक रोमांटिक रचना है. शायद श्रेया घोषाल की स्वरों की मिठास गीत में नहीं होती तो एक साधारण सी रचना साबित होती मगर श्रेया अपनी गायकी से गीत में स्वर माधुर्य का एक वातावरण रचती हैं. साथ में स्वर अजय के हैं.

अजय अतुल की धुन में नवीनता नहीं है और कहीं न कहीं प्रीतम ने श्रेया के साथ 'तेरी ओर' से रोमांटिक गीतों का एक टैम्पलेट शुरु किया था, बहुत कुछ उसी पर आधारित है 'बदमाश दिल'.

'मौला मौला' एलबम की तीन मौलिक प्रस्तुतियों में अंतिम है. शुरुआत में अजय-अतुल सॉफ़्ट-सूफ़ी संगीत से प्रार्थना का एक माहौल रचते हैं जो आगे जाकर एक खुशनुमा रोमांटिक गीत में तब्दील हो जाता है.

कुणाल गांजावाला के साथ ऋचा शर्मा ने इस गीत को गाया है.

अजय-अतुल ने कुणाल गांजावाला को काबू में रखा है और बहुत दिनों बाद एक गीत ऐसा सुनने को मिला है जिसमें कुणाल की नियंत्रित गायकी प्रभावित करती हैं. ऋचा शर्मा उम्मीद के मुताबिक गीत को निभा गईं हैं.

इन तीन गीतों के अतिरिक्त एलबम में हर गीत का रीमिक्स मौजूद है जिसमें केवल शीर्षक गीत 'सिंघम' का रीमिक्स ही प्रभावित करता है और बाकी दोनों रीमिक्स ट्रैक्स की संख्या बढ़ाने के अलावा कोई मूल्य-वर्धन नहीं करते.

कुल मिला कर केवल तीन मुख्य गीतों के साथ 'सिंघम' अजय-अतुल की प्रतिभा के लिये पूरे अवसर प्रदान नहीं करता. हालांकि तीन गीतों में अजय-अतुल ने अपनी रेंज दिखाने की कोशिश की है.

धुनों के स्तर पर नवीनता की कमी अखरती है मगर अजय-अतुल फिर भी सुनने लायक रचनाएं देने में सफल रहे हैं.

'सिंघम' सीमित अवसरों के कारण 'नटरंग' और 'जोगवा' के अजय-अतुल से परिचय कराने में सफल नहीं रहा है मगर फिर भी प्रीतम और शंकर-एहसान-लॉय जैसे संगीतकारों के लिये ख़तरे का संकेत ज़रूर देता है और अजय-अतुल की जोड़ी आने वाले दिनों के लिये संभावनाएं जगाती हैं.

रेटिंग : नम्बरों के लिहाज़ से 'सिंघम' के संगीत को 2.5/5 (पाँच मे से ढाई)

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