क्यों बॉस हैं रजनीकांत

'अब से हज़ार साल बाद रोबोट फ़िल्में बनाएँगे और फ़िल्म का नाम होगा रजनीकांत'...,'रजनीकांत अपने पैरों से जूते के फीते बाँध सकते हैं'....'एक बार रजनीकांत का बटुआ खो गया तब से विश्व में आर्थिक मंदी छाई हुई है', फ़िल्मस्टार रजनीकांत जब फ़ेसबुक में साइन-इन करते हैं तो फ़ेसबुक अपना स्टेटस अपडेट कर लेता है.

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तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत पर ऐसे कितने ही लतीफ़े आए दिन बनाए जाते हैं....ज़ाहिर है ये कोरी कल्पना पर आधारित हैं लेकिन इससे रजनीकांत की लोकप्रियता और उनके लिए लोगों की दीवानगी का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. बीमारी के बाद जब कुछ दिन पहले रजनीकांत सिंगापुर से इलाज करा चेन्नई लौटे तो उनके प्रशंसकों का उत्साह देखने लायक था.

रजनीकांत को करोड़ों लोगों का प्यार मिला है और ये प्यार केवल एक अभिनेता के लिए ही नहीं है बल्कि रजनीकांत नामक बेहतरीन इंसान के लिए भी है.मेरे जैसे कलाकारों को अपनी फ़िल्म के प्रचार के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है..लेकिन रजनीकांत को इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती है...रजनीकांतजी का फ़िल्म में होना है उसका प्रमोशन है'.

अमिताभ बच्चन

मधन तमिल सिनेमा के जाने-माने फ़िल्म समीक्षक-लेखक हैं और रजनीकांत के साक्षात्कार कर चुके हैं.

रजनीकांत के शुरुआती दिनों के बारे में मधन बताते हैं, "रजनीकांत बंगलौर ट्रांसपोर्ट सर्विस में बतौर कंडक्टर काम किया करते थे. बतौर कंडक्टर भी वे बहुत स्टाइलिश थे. बस की सीढ़ियों पर लटकते रहना, सीटी बजाना..टिकट काटने का अंदाज़ सब जुदा था. वे फ़िल्मों में आना चाहते थे. लेकिन रजनतीकांत अचानक स्टार नहीं बन गए जैसा कि कुछ लोग सोचते है. उन्होंने बाक़ायदा मद्रास फ़िल्म इंस्टीट्यूट में पढ़ाई की और संघर्ष किया."

रजनीकांत ने तमिल के अलावा कुछ हिंदी फ़िल्मों में भी काम किया जैसे अंधा क़ानून और हम जिसमें हिंदी फ़िल्मों के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन भी थे. लाखों लोगों के चेहते अमिताभ भी रजनीकांत की शख़्सियत के प्रति अपना स्नेह, आदर और विस्मय जता चुके हैं.

हाल ही में एक कार्यक्रम में रजनीकांत के बारे में अमिताभ बच्चन ने कुछ यूँ कहा था. "मैं रजनी से कहता रहता हूँ कि मुझे अपनी किसी फ़िल्म में ले लें जहाँ मैं कोई जूनियर कलाकार बन जाऊँगा. लेकिन वे मुझे लेते ही नहीं. मैंने ख़ुद देखा है कि जब वो दक्षिण भारत में कहीं जाते हैं तो उन्हें देखने के लिए लोगों में कैसी मारामारी मचती है. रजनीकांत को करोड़ों लोगों का प्यार मिला है और ये प्यार केवल एक अभिनेता के लिए ही नहीं है बल्कि रजनीकांत नामक बेहतरीन इंसान के लिए भी है. ."

'रजनीकांत का जवाब नहीं'

यूँ तो न रजनीकांत दिखने में किसी पारंपरिक हीरो जैसे दिखते हैं, न गठीला बदन है, न सिक्स पैक है...फिर भी 70 के दशक से लेकर अब तक रजनीकांत नामक ये चमत्कारी और मिथकीय शख़्सियत टिकी हुई है... .आख़िर ऐसा क्या है जो रजनीकांत को बॉस बनाता है?

मधन कहते हैं, " लोग दरअसल ख़ुद को रजनीकांत से जोड़कर देख सकते हैं. सांवले रंग और द्रविड़ियन छवि वाले रजनीकांत ऐसे हीरो नहीं जो दिखने में कोई ग्रीक गॉड हो...वे साधारण हैं. दूसरी ख़ासियत उनका स्टाइल रहा, वो अनोखा है, कोई चाहकर भी उनकी नकल नहीं कर पाया. उन्होंने कभी मेथड एक्टिंग नहीं कि जैसे किसी रोल के लिए मानसिक रोगी के साथ जाकर रहे हों. रजनी का कोई सानी नहीं. इन्हीं सब चीज़ों का मिश्रण उन्हें बड़ा स्टार बनाता है."

रजनीकांत पहले कंडक्टर का काम किया करते थे. बतौर कंडक्टर भी वे बहुत स्टाइलिश थे. बस की सीढ़ियों पर लटकते रहना, सीटी बजाना..टिकिट काटने का अंदाज़ सब जुदा था. रजनीकांत जब फ़िल्मों में काम ढूँढ रहे थे तो एक बार निर्देशक बालाचंदर के दफ़तर के बाहर खड़े थे. उन्होंने खिड़की से रजनीकांत को देखा और फ़िल्म के हीरो कमल हसन से कि उस युवक को अंदर लेकर आओ. कमल हसन ख़ुद गए और रजनीकांत को हाथ पकड़कर अंदर लेकर आए

मधन, तमिल फ़िल्म समीक्षक

विज्ञापन जगत की वरिष्ठ हस्ती प्रह्लाद कक्कड़ के मुताबिक रजनीकांत एक व्यक्ति न होकर एक ब्रैंड बन चुके हैं. वे कहते हैं, "रजनीकांत एक अच्छे और दरियादिल इंसान हैं. वे जितना कमाते हैं उसमें से आधी आमदनी चैरिटी में दे देते हैं. उनके रोल पर्दे पर लार्जर दैन लाइफ़ होते हैं जो लोगों को भाते हैं. ऐसा ताममेल इनदिनों विरले ही मिलता है. या तो आप बड़े स्टार होते हैं या फिर अच्छे इंसान. वे दोनों हैं यही उन्हें एक ब्रैंड बनाता है."

ब्रैंड रजनीकांत का अंदाज़ा उनकी बात इस बात से लगाया जा सकता है जहाँ अमिताभ ने अपने ब्लॉग में लिखा है,"मेरे जैसे कलाकारों को अपनी फ़िल्म के प्रचार के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है..लेकिन रजनीकांत को इसकी ज़रूरत नहीं पड़ती है...रजनीकांतजी का फ़िल्म में होना है उसका प्रमोशन है."

स्टाइल से आगे भी....

फ़िल्म समीक्षक मधन रजनीकांत के बारे में दिलचस्प किस्सा बताते हैं, "कमल हसन (जो उन दिनों स्टार बन चुके थे) ने मुझे एक बार बताया था कि कैसे वे संघर्षरत रजनीकांत से पहली बार मिले थे. रजनीकांत निर्देशक के बालाचंदर के दफ़तर के बाहर खड़े थे. बालाचंदर को अपूर्वा हंगल फ़िल्म के लिए मनपसंद अभिनेता नहीं मिल रहा था उन्होंने अपनी खिड़की से रजनीकांत को देखा और कहा कि इस युवक को लेकर आओ. कमल हसन ख़ुद गए और रजनीकांत को हाथ पकड़कर अंदर लेकर आए. उस समय रजनीकांत की तमिल काफ़ी ख़राब थी. फ़िल्म में उनका मुख्य रोल नहीं था पर रजनी ने वो फ़िल्म की. बाकी सब इतिहास है."

रजनीकांत एक अच्छे और दरियादिल इंसान हैं. वे जितना कमाते हैं उसमें से आधी आमदनी चैरिटी में दे देते हैं. दूसरा ये कि वे बड़े स्टार हैं, उनके रोल पर्दे पर लार्जर दैन लाइफ़ होते हैं जो लोगों को भाते हैं. ऐसा ताममेल इनदिनों विरले ही मिलता है. या तो आप बड़े स्टार होते हैं या फिर अच्छे इंसान. यही उन्हें एक ब्रैंड बनाता है.

प्रह्लाद कक्कड़

वैसे कुछ लोग ये भी कहते हैं कि रजनीकांत की फ़िल्मों में स्टाइल ज़्यादा और विषयवस्तु कम होती है. वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक मधन हालांकि ख़ुद रजनीकांत के प्रशंसक हैं लेकिन इस बात का मलाल उन्हें भी है.

वे कहते हैं, " रजनी की बहुत से फ़िल्में एक जैसी लग सकती हैं. रजनीकांत का स्टाइल, उनके चलने का अंदाज़, डायलॉग बोलने का अंदाज़...लोग हर फ़िल्म में उनका यही रूप देखना चाहते थे. शायद इसीलिए रजनीकांत उस तरह के रोल नहीं कर पाए जिसमें उन्हें अपनी अभिनय क्षमता दिखाने का ज़बरदस्त मौका मिलता. वे बेहतरीन अभिनेता हैं.शुरुआती दौर में उन्हें ऐसी फ़िल्में करने का मौका मिला था. फिल्म दलपति में उन्होंने जो रोल किया था उसमें वो चिंगारी दिखी थी. मैं चाहता हूँ कि अब आगे उन्हें बेहतरीन रोल करने का मौका मिले."

हाल ही में बीमार पड़ने से पहले रजनीकांत फ़िल्म राणा की शूटिंग कर रहे थे जिसमें दीपिका पादुकोण हैं. कहा जाता है कि जब वे चेन्नई में बीमार थे तो हर कुछ सैंकेड पर किसी प्रशंसका का उनके घर पर फ़ोन आता था...उनकी फ़िल्म शिवाजी और रॉबोट ने रिकॉर्डतोड़ कमाई की थी..अब लोगों की उम्मीद यही है कि स्वस्थ होकर फ़िल्म राणा के ज़रिए हर संभव रिकॉर्ड तोड़ दें....वैसे भी उनके प्रशंसक मानते हैं कि रजनीकांत के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं..

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