गालियां भी एक सी ही हैं:शफ़क़त अमानत अली

Image caption पाकिस्तानी गायक शफ़क़त अमानत अली कहते हैं कि संगीत ने भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की डोर कभी टूटने नहीं दी.

बीबीसी हिंदी एफ़एम का विशेष कार्यक्रम 'फ़्रेंडशिप बियॉन्ड बॉर्डर्स'. इसमें भारत और पाकिस्तान के जाने-माने कलाकार संगीत के ज़रिए शांति और आपसी सहयोग के बारे में बात कर रहे हैं.

कार्यक्रम की पहली कड़ी पाकिस्तानी गायक शफ़क़त अमानत अली के साथ.

मशहूर पाकिस्तानी गायक शफ़क़त अमानत अली मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान की संस्कृति में कोई फ़र्क नहीं है. यहां तक कि दोनों मुल्कों में गालियां भी एक सी ही हैं.

'मोरा सैंया मोसे बोले ना’ और ‘आंखों के सागर’ जैसे मशहूर गानों के गायक शफ़क़त जितने पाकिस्तान में उतने ही भारत में भी लोकप्रिय हैं. वो कहते हैं, “मैं जब भी दिल्ली जाता हूं तो लगता ही नहीं कि लाहौर से बाहर कहीं घूम रहे हैं. या फिर मुम्बई जाओ तो लगता है कि कराची में हैं. लगता नहीं कि आप मुल्क से बाहर हैं. यहां और वहां लोग, माहौल, भाषा सभी कुछ एक सा है. यहां तक कि गालियां भी एक सी ही हैं.”

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शफ़क़त मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच बहुत सी मुश्किलें आई हैं जिनसे रिश्तों पर असर पड़ा है लेकिन दोंनो देशों के बीच संगीत का रिश्ता कभी नहीं टूटा.

वो कहते हैं, “संगीत ने दोंनो देशों के बीच रिश्ते को टूटने नहीं दिया है. लोग समझ गए हैं कि लड़ाई से कुछ हासिल नहीं होता, लोग रिश्तों में नज़दीकी चाहते हैं. इस क्षेत्र में अगर व्यापार बढ़ेगा तो ग़रीबी भी कम होगी.”

शफ़क़त आगे कहते हैं, “पाकिस्तान के लोग भारत आना चाहता हैं, फ़ासले कम करना चाहते हैं. सीमाएं तो ख़त्म नहीं हो सकतीं या दोंनो मुल्क फिर से एक नहीं हो सकते लेकिन अतीत को भुलाकर हमें आगे बढ़ना चाहिए. जैसे हम अपने बुज़ुर्गों से सुनते रहे हैं कि लोग लाहौर से अमृतसर गाड़ी से जाते थे, फ़िल्म देखकर, खाना खाकर वापिस चले जाते थे और इसी तरह से लोग अमृतसर से लाहौर जाया करते थे. हम चाहते हैं कि वैसा ही वक्त वापस दोबारा आए. इस तरह की नीतियों को बढ़ावा देना चाहिए. जिस दिन ऐसा हो जाएगा प्यार और बढ़ जाएगा और इस क्षेत्र की समस्याएं भी सुलझ जाएंगी. ऐसे और भी बहुत से कदम हैं जिससे रिश्ते बेहतर हो सकते हैं जैसे वीज़ा के नियम आसान कर देना चाहिए.”

निर्देशक करण जौहर की फ़िल्म ‘कभी अलविदा न कहना’ के गाने ‘मितवा’ से शफ़क़त अमानत अली ने बॉलीवुड में कदम रखा.

बॉलीवुड में अपनी एंट्री के बारे में शफ़क़त बताते हैं, “मेरी मुम्बई में एक पर्फ़ोमेंस थी जहां (संगीतकार जोड़ी) एहसान और लॉय आए थे, हमने एक-दूसरे के फ़ोन नम्बर्स लिए. फिर एमटीवी की रिकॉर्डिंग पर शंकर से मुलाक़ात हुई. मेरे पाकिस्तान वापस जाने के बाद उनका फ़ोन आया कि आप हमारे लिए गाएंगे तो मैंने तुरंत हां कर दी.”

इसके अलावा शफ़क़त ने ‘माई नेम इज़ ख़ान’, ‘डोर’ और ‘आशाएं’ फ़िल्मों में भी गाने गाए हैं जो काफ़ी लोकप्रिय हुए.

वो कहते हैं, “पाकिस्तान में भी लोग शाहरूख़ ख़ान, आमिर ख़ान और अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े फ़ैन्स हैं. पहले तो हम फ़िल्म केबल पर देखते हैं लेकिन अब सिनेमा में फ़िल्म लगती हैं और हम वहां देखते हैं.”

भारत में कई बार पर्फ़ोम कर चुके शफ़क़त को हर बार भारत आने से पहले अपने परिवार और दोस्तों की फ़रमाइशी लिस्ट मिल जाती है. उन्होंने बताया, “जब भी इंडिया आता हूं, तो लोग सूती साड़ी, शहनाज़ हुसैन के प्रोड्क्ट्स, आर्युवेदिक दवाईयों जैसी चीज़ो की फ़रमाइश करते हैं. यहां आते समय छोटा सूटकेस लेकिन लौटते समय सूटकेस बड़ा हो जाता है.”

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