'मेरे नाम के पीछे ख़ान या कपूर नहीं है पर.......'

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Image caption निर्देशक अनुराग कश्यप की नई फ़िल्म 'दैट गर्ल इन यैलो बूट्स' रिलीज़ के लिए तैयार है.

निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप अपनी सफलता का श्रेय अलग-अलग समय पर अलग-अलग लोगों से मिले सहयोग को देते हैं.

देव डी, ब्लैक फ़्राइडे, और गुलाल जैसी फ़िल्मों के निर्देशक और उड़ान और आमिर जैसी फ़िल्मों के निर्माता अनुराग कहते हैं, “मैं आज जो भी हूं, ‘सपोर्ट सिस्टम’ की वजह से हूं. बावजूद इसके कि मेरा सरनेम न तो ख़ान है, न कपूर और न ही खन्ना और बावजूद इसके कि मैं एक छोटे से तबके से आया हूं, कहीं-न-कहीं एक सपोर्ट सिस्टम बनता रहा. मैं तो अपनी शिद्दत में चीज़ो के पीछे पड़ा रहा और लोग सहारा देते रहे.”

इस ‘सपोर्ट सिस्टम’ में अनुराग अपने भाई और 'दंबग' के निर्देशक अभिनव कश्यप और पत्नी कल्कि को शामिल करते हैं.

बीबीसी के साथ हाल ही में एक इंटरव्यू में अनुराग ने बताया, “मैं आज जो भी हूं, अभिनव की वजह से हूं. मुझे उन्होंने अपनी मर्ज़ी का काम करने की आज़ादी दी. उसने टेलिविज़न कर-कर के दस साल तक घर संभाला, नहीं तो वो भी दस साल पहले इंडस्ट्री में आ जाते. फिर जैसे ही ‘देव डी’ हिट हुई, उसने कहा कि अब तुम संभालो, मैं जा रहा हूं फ़िल्म बनाने.”

अनुराग ये भी कहते हैं कि करियर के एक बेहद मुश्किल दौर में परेशानियों और मुश्किलों से उबरने में उनकी पत्नी कल्कि की बहुत अहम भूमिका रही.

वर्तमान हिंदी सिनेमा

विक्रम मोटवाने, राजकुमार गुप्ता और बिजॉय नाम्बियार जैसे नए निर्दशकों को मौका देने वाले अनुराग कश्यप अपने ‘अलग’ तरह के सिनेमा के लिए पहचाने जाते हैं. आज हिंदी सिनेमा जिस मुक़ाम पर हैं जिसमें सब तरह की फ़िल्में बन रही हैं, अनुराग उससे बहुत ख़ुश हैं.

वो कहते हैं, “मैं ख़ुश हूं कि हिंदी सिनेमा में कुछ हो रहा है. हम व्यवसायिक सिनेमा को हटाना या धक्का नहीं देना चाहते थे बल्कि हम हमेशा से उसके साथ मिल-जुलकर रहना चाहते थे. भले ही मैं ज़्यादा मेनस्ट्रीम सिनेमा देखने नहीं जाता, लेकिन इस सच्चाई से तो हम इंकार नहीं कर सकते कि वो सिनेमा पैसा कमाता है और अगर वो सिनेमा पैसा नहीं कमाएगा तो हम अपना सिनेमा नहीं बना सकते. लेकिन पहले हमारे सिनेमा को दिखाने की ‘स्पेस’ नहीं थी जो अब हो गई है.”

अनुराग के पसंदीदा फ़िल्ममेकरों में एक तरफ़ बिमल रॉय, गुरु दत्त, विजय आनंद, प्रकाश मेहरा, और गोविंद निहलानी शामिल हैं, वहीं आज के समय में उन्हें दिबाकर बैनर्जी, इम्तियाज़ अली, विक्रम मोटवाने, ज़ोया अख़्तर, विशाल भारद्वाज का काम पसंद आता है.

नए फ़िल्मकारों के बारे में वो कहते हैं, “इन सबके काम में कहीं-न-कहीं बहुत ईमानदारी दिखती है. ज़ोया अख़्तर बहुत ही मेनस्ट्रीम है. जहां से वो आई है वो उसकी फ़िल्मों में दिखता है. पता चलता है कि वो दक्षिण मुम्बई की लड़की है और दक्षिण मुम्बई के किरदारों के प्रति वो ईमानदार हैं.”

अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित फ़िल्म ‘दैट गर्ल इन यैलो बूट्स’ दो सितम्बर को सिनेमाघरों में पहुंच रही है.

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