ऐक्टर बनने के लिए ख़ूबसूरती ज़रूरी नहीं: नसीरुद्दीन शाह

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Image caption नसीर कहते हैं ऐक्टर बनाने के लिए लगन होनी चाहिए

हिंदी सिनेमा जगत में पिछले कई सालों से अपने अभिनय का लोहा मनवा रहे अभिनेता नसीरुद्दीन शाह कहते हैं कि एक अच्छा ऐक्टर बनने के लिए ख़ूबसूरत होना ज़रूरी नहीं है.

नसीर कहते हैं, ''मेरे ख़्याल से शक्ल-सूरत, कद-काठी या गोरा रंग होना ज़रूरी नहीं है. एक अभिनेता बनने के लिए आपके अंदर सच्चाई होनी चाहिए, आपमें ऐक्टर बनने की लगन होनी चाहिए''.

नसीर के मुताबिक़ अभिनय कभी सीखा नहीं जा सकता. इसके लिए पूरी उम्र लग जाती है. नसीर कहते हैं जैसे जैसे एक कलाकार की उम्र बढती है उसके पास सीखने के लिए कई चीज़ें भी बढ़ती जाती हैं.

नसीरुद्दीन शाह मानते हैं कि अभिनेता को सब कुछ आना चाहिए, नाच गाना भी आना चाहिए. लेकिन वो क़ुबूल करते हैं कि नाच गाने में उनका हाथ कुछ तंग है.

मज़ाकिया अंदाज़ में वो कहते हैं कि अगर उनके गुरु रोशन तनेजा ने उनके साथ थोड़ी सख्ती बरती होती, उन पर डंडा घुमाया होता तो शायद आज वो भी अच्छे डांसर होते.

हाल ही मैं नसीर मुंबई स्थित रोशन तनेजा के ऐक्टिंग स्कूल के पुरस्कार समारोह में शामिल हुए थे. नसीर मानते हैं की रोशन तनेजा ने उनके जीवन को काफी प्रभावित किया है.

नसीर फ़िल्मों में जितना सक्रिय हैं उतना ही रंगमंच से भी जुड़े हैं. रंगमंच और फ़िल्मों के बीच के अंतर को बताते हुए नसीर कहते हैं, ''रंगमंच में आपको हर एक दर्शक से जुड़ना होता है, जबकि फ़िल्मों में आपको सिर्फ कैमरे के साथ जुड़ना होता है, क्योंकि कैमरा दर्शकों की आंख होती है. जो कैमरा देख रहा है वही दर्शक भी देखेंगे, इसलिए कैमरा से दोस्ती करना बहुत ज़रूरी है''.

नसीरुद्दीन शाह परदे पर किसी और कलाकार के साथ किसी भी तरीके की प्रतिस्पर्धा में यक़ीन नहीं रखते. वो कहते हैं कि उन्हें ये बात बड़ी अटपटी लगती है जब कोई ये कहता है की फ़लां दृश्य में ये कलाकार दूसरे कलाकार पर भारी पड़ गया.

नसीर कहते हैं, ''कलाकार आपस में कुश्ती नहीं लड़ते, एक दूसरे को पछाड़ने की फ़िराक़ में नहीं होते. वो तो बस एक दूसरे के साथ काम कर रहे हैं. एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश नहीं कर रहे होते.”

नसीर जल्द ही विद्या बालन के साथ ‘द डर्टी पिक्चर’ और अनुराग कश्यप की ‘माइकल’ में नज़र आएंगे.

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