लेडीज़ वर्सेस रिकी बहल

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Image caption 'बैंड बाजा बारात' के बाद 'लेडीज़ वर्सेस रिकी बहल' निर्देशक मनीष शर्मा की नई फ़िल्म है

पिछले साल नए कलाकारों की एक छोटी सी फ़िल्म ने प्रदर्शन के बाद अप्रत्याशित धूम मचाई थी – ‘बैंड बाजा बारात’, जिसमें अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के अतिरिक्त लगभग सभी नए चेहरे थे. ये निर्देशक मनीष शर्मा और अभिनेता रनवीर सिंह की पहली फ़िल्म थी जो कलाकारों के अभिनय के साथ कथानक और प्रस्तुतिकरण में ताज़गी की वजह से भी काफ़ी लोकप्रिय हुई थी.

निर्देशक मनीष शर्मा, अब रनवीर सिंह और अनुष्का शर्मा की जोड़ी के साथ एक नई फ़िल्म के साथ हाज़िर हैं – ‘लेडीज़ वर्सेस रिकी बहल’. ‘बैंड बाजा बारात’ की सफ़लता का एक कारण संगीतकार सलीम-सुलेमान और गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य की जोड़ी का धूम मचाने वाला संगीत भी था और ‘लेडीज़ वर्सेस रिकी बहल’ मे भी गीत-संगीत फिर से सलीम-सुलेमान और अमिताभ भट्टाचार्य के जिम्मे ही है.

‘लेडिज़ वर्सेस रिकी बहल’ एक कॉन फ़िल्म है जिसके दोनों मुख्य किरदार ठग हैं और छल कपट की दुनिया में रचे बसे हैं. फ़िल्म का परिवेश एक मज़ेदार फ़िल्म की सम्भावना प्रदान करता है और फ़िल्म के संगीत से भी बैंड बाजा बारात जैसी ताज़गी की उम्मीद की जा रही है.

एल्बम की पहली प्रस्तुति है ‘आदत से मजबूर’ जो फ़िल्म के नायक रिकी बहल का परिचय गीत है. बेनी दयाल और रनवीर सिंह के स्वरों में एक ठीक-ठाक सा गीत है. सलीम-सुलेमान ने नवीनता के बजाय बहुत कुछ अपने पुराने टैम्प्लेट पर ही भरोसा किया है. अमिताभ भट्टाचार्य के बोल भी बहुत ज़्यादा असर नहीं छोड़ते. रनवीर का रैप गीत को माहौल ज़रूर देता है. गीत की सफ़लता इसके संगीत से ज़्यादा इसके म्युज़िक वीडियो पर निर्भर करती है. गीत रीमिक्स वर्शन में भी है मगर वो भी कुछ खास नहीं है.

‘जज़्बा’ एल्बम की अगली प्रस्तुति है और फ़िल्म की नायिका अनुष्का शर्मा का परिचय गीत है. गीत बहुत कुछ एक म्युज़िक वीडियो की ही तरह रचा गया है. ‘रंगीला’ से इस तरह के इन्ट्रो गीतों के टैम्प्लेट की शुरुआत हुई थी, ‘जज़्बा’ भी बहुत कुछ उसी टैम्प्लेट के आस-पास बुना गया है. गीत अगर एक अच्छी प्रस्तुति बन पड़ा है तो उसमें शिल्पा राव के स्वरों और अमिताभ भट्टाचार्य के बोलों का बड़ा योगदान है जो गीत को एक अलग रंग देने में कामयाब रहे हैं. गीत रीमिक्स वर्शन में भी है जिसमें परिवर्तन के तौर पर अनुष्का मनचंदा ने स्वर दिए हैं, हालांकि मुख्य वर्शन जितना असरदार तो नहीं है फिर भी अनुष्का की गायकी की वजह से थोड़ा अलग अंदाज़ रखता है. म्युजिक वीडियो का प्रस्तुतिकरण फिर से गीत की सफ़लता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की गुंजाइश रखता है.

‘ठग ले’ फ़िल्म का थीम गीत कहा जा सकता है जहां मुख्य किरदार एक दूसरे के मुकाबले में हैं. एक मज़ेदार गीत की बहुत सम्भावना थी लेकिन सलीम-सुलेमान अपनी जानी पहचानी धुनों के ही फेर में एक सुनी सुनाई सी रचना दुहराते नज़र आए हैं. विशाल डडलानी के स्वर भी इस तरह के गीतों में आम हो गए हैं और कुल मिलाकर संभावना के बावजूद सलीम-सुलेमान का ये प्रयास अंत में निराश ही करता है.

‘जिगर दा टुकड़ा’ भी धुन के दुहराव की समस्या से ग्रस्त है और बहुत कुछ ‘बैंड बाजा बारात’ के ‘ऐंवे ऐंवे लुट गया’ की सफ़लता को भुनाने की कोशिश है. सलीम-सुलेमान की धुन और वाद्य संयोजन में ‘ऐंवे ऐंवे’ की छाप साफ़ नज़र आती है. सलीम मर्चैंट और श्रद्धा पंडित के स्वरों में अमिताभ के बोल और गीत का ट्रीटमेंट कहीं कहीं दोस्ताना के ‘मां दा लाडला’ की भी याद दिलाते हैं.

‘फ़ैटल अट्रैक्शन’ एक थीम ट्रैक है, ट्रैक का आधार टैक्नो संगीत है और सलीम-सुलेमान यहां अपने वाद्य संयोजन से कुछ हद तक प्रभावित करते हैं.

कुल मिला कर ‘लेडीज़ वर्सेस रिकी बहल’ का संगीत धुनों के दुहराव की वजह से बहुत प्रभावित नहीं करता है. ‘बैंड बाजा बारात’ के संगीत में जो ताज़गी थी वो इस एल्बम से गायब है. संगीत बहुत फ़ंक्शनल सा है और हो सकता है फ़िल्म में बेहतर प्रस्तुतिकरण के बल पर कुछ रंग जमा सके लेकिन एल्बम के तौर पर सलीम-सुलेमान और अमिताभ भट्टाचार्य का ये प्रयास निराश करता है.

रेटिंग के लिहाज़ से ‘लेडीज़ वर्सेस रिकी बहल’ को पांच में से दो (2/5)

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