देर से आए पर आए तो सही...

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Image caption 23 नवंबर को शुरू हुआ ये समारोह 3 दिसंबर तक चलेगा.

आज से गोवा में शुरू हो हुआ 42 वां इंटरनैशनल फ़िल्म फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया. इस फ़िल्म महोत्सव का शुभारंभ किया अभिनेता शाहरुख़ खान ने जो यहां बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे. पर मुख्य अतिथि होने के बावजूद भी शाहरुख़ यहां कुछ देर से ही आए जिसके कारण समारोह भी देर से ही शुरू हुआ.

अपने देर से आने की माफ़ी मांगते हुए शाहरुख़ खान ने कहा, ''मैं आप सब का शुक्रिया करता हूं कि मुझे इस समरोह का मुख्य अतिथि होने का सौभाग्य मिला. ये मेरे लिए बड़े गर्व की बात है.''

शाहरुख़ खान अपनी फ़िल्मों के अलवा अपने मज़ाकिया अंदाज़ के लिए भी जाने जाते हैं, तो यहां कैसे पीछे रह जाते वो. दीपक प्रज्ज्वलित करने के बाद मंच पर सभी को संबोधित करते हुए शाहरुख़ बोले, ''मैं इस वक़्त गोवा में हूं और मैंने काले रंग का कोट पैंट पहना हुआ है, मुझे बड़ा अजीब लग रहा है, मतलब गोवा में कोई कोट पैंट में घूमता है भला लेकिन क्या करूं यहां इतने गणमान्य लोग हैं कि मैं कुछ और पहन भी नहीं सकता था.''

शाहरुख़ कहते हैं जब वो इस सामरोह के लिए गोवा के मडगांव स्थित रविन्द्र भवन में घुस रहे थे तब उनसे कुछ पत्रकारों ने पूछा कि वो तो बॉलीवुड मसाला फ़िल्मों का हिस्सा हैं वो यहां क्या कर रहे हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए शाहरुख़ ने कहा, ''सिनेमा को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित करने की कोई ज़रूरत नहीं है. सिनेमा तो मनोरंजन का एक माध्यम है. कहानी कहने का एक ज़रिया है बस.''

इस मौके पर मौजूद थी सूचना एवंम प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी भी. देश-विदेश के मेहमानों का स्वागत करते हुए श्रीमती सोनी ने कहा, ''मैं यहां आए लोगों को देख कर बहुत खुश हूं, इस समारोह में न केवल भारत के जाने-माने फ़िल्मकार हिस्सा ले रहे हैं बल्कि दुनिया भर से भी नामी-गिनामी निर्देशक यहां मौजूद हैं.''

साथ ही श्रीमती सोनी का ये भी कहना था कि दुनिया में सबसे ज़्यादा फ़िल्में अगर कहीं बनती हैं तो वो भारत में ही हैं लेकिन इसके बावजूद भारत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वो दर्जा नहीं मिल पाया है. लेकिन एआर रहमान और रेसूल पुकुट्टी जैसे लोग इस स्तिथि को बदलने की कोशिश ज़रूर कर रहे है.

श्रीमती सोनी ने ये भी बताया कि ये समारोह इस साल और भी बड़े स्तर पर किया जा रहा है. इस बार पुरस्कारों की श्रेणी में पहली बार लाइफ टाइम अचीव्मन्ट अवार्ड भी शामिल किया गया जो मिला फ़्रांस के फ़िल्मकार बरट्रांड टैवरनीयर को.

अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव 2011 की ओपनिंग फ़िल्म रही निर्देशक जोआओ कोरीया और फ़्रांसिस्को मांसो की फ़िल्म 'द कॉन्सुल ऑफ़ बॉर्दो'.

ये महोत्सव 3 दिसंबर तक चलेगा और यहां 67 देशों की 167 से भी ज़्यादा फ़िल्में दिखाई जाएंगी. इस बार यहां पहली बार थ्री-डी मूवी स्क्रीनिंग की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है.

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