गोवा फ़िल्म महोत्सव से

फरहा ख़ान इमेज कॉपीरइट pr
Image caption फरहा भी मौजूद थी 42वें अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में.

42वें अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में बीते मेरे चौथे दिन का हाल आपको बताती हूं.

भई आप सब के लिए तो इतवार का दिन छुट्टी वाला होता होगा लेकिन एक पत्रकार होने के नाते हमारी तो कभी छुट्टी नहीं होती फिर चाहे वो इतवार का दिन हो या फिर कोई त्यौहार. लेकिन यही तो मज़ा है न एक पत्रकार होने का, हर दिन एक नया दिन, हर दिन किसी नई शख़्सियत से मुलाक़ात.

तो आज इतवार हुआ तो क्या हुआ, मैं काम के मूड में ही थी लेकिन यहां आए बॉलीवुड सितारे काम के नहीं मौज मस्ती और छुट्टी मनाने के मूड में थे. तभी तो मैंने जिसे भी पकड़ने की कोशिश की वो मुझसे पीछा छुड़ा कर भाग निकला.

सबसे पहले मैंने सोचा कि क्यों न फ़िल्म और नृत्य निर्देशक फ़ाराह खान से कुछ बातचीत कर लूं लेकिन कहां, वो तो अपने होटल के स्विमिंग पूल के किनारे आराम फरमा रहीं थीं. जब मैं उनके पास गई तो मेरे सवाल का जवाब देना तो दूर उन्होंने तो मुझे ये सलाह दे डाली की मैं उन्हें भी आराम करने दूं और ख़ुद भी आराम करूं और जहां तक काम की बात है उसे सोमवार के लिए छोड़ दूं.

फिर मैंने सोचा कि क्यूं न मैं अपनी किस्मत अभिनेता अभय देओल के साथ आज़मा लूं लेकिन वहां भी मेरे हाथ लगी तो केवल निराशा. अभय गोवा में चल रहे 42वें अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में अकेले नहीं आए हैं यहां उनके साथ हैं उनकी खास दोस्त प्रीती देसाई भी. भई ये दोनों तो गोवा के मौसम का मज़ा ले रहे थे, तो मेरे सवालों का जवाब कहां देते.

लेकिन मैं कहां हार मानने वालों में से हूं. जैसे ही मेरी नज़र पड़ी फ़िल्मकार शेखर कपूर पर बस मैं पड़ गई उनके पीछे. और तब तक मैंने उनका पीछा नहीं छोड़ा जब तक उन्होंने मुझे सोमवार को एक 15 मिनट का इंटरव्यू देने का वदा नहीं किया.

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