‘मैं बोल दूँगा कि बकवास फ़िल्म है’

क्या कभी आपने ऐसा सुना है कि फ़िल्म का नायक ही कहे कि फ़िल्म बकवास है. जाने-माने बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर कहते हैं कि वो अपनी फ़िल्म की ग़लत तारीफ़ नहीं कर सकते.

जब नाना पाटेकर से फ़िल्मों की मार्केटिंग के बारे में पूछा गया तो नाना पाटेकर ने कहा “मैं अपनी फ़िल्म की ग़लत तारीफ़ नहीं करता. मुझे तो अपनी फ़िल्म अच्छी ही लगेगी ऐसा नहीं है. अगर फ़िल्म बुरी है तो मै अपने निर्माता को बोल देता हूँ कि फ़िल्म के प्रचार पर मुझे ना बुलाओ, मैं बोल दूँगा कि बकवास फ़िल्म है.”

नाना पाटेकर मानते हैं कि उनकी फ़िल्म 'शागिर्द' काफ़ी अच्छी थी लेकिन ख़राब प्रचार के चलते वो फ़िल्म बॉक्स आफ़िस पर चल नहीं पाई.

नाना पाटेकर कहते हैं कि पब्लिसिटी करना मेरा काम नहीं फ़िल्म निर्माता का काम है. “ मार्केटिंग तो मैं नहीं कर सकता ना. आप देखते हैं कि कितनी बकवास फ़िल्में हैं लेकिन जिस तरह से ढिंढ़ोरा पीटा जाता है. जिसकी वजह से लोग देखते हैं और बाद में गालियाँ देते हैं. आप चिल्ला चिल्लाकर पहले ही दिन लोगों को बुला सकते हैं लेकिन उसके बाद तो लोग जो बोलेंगें वो ही सही है. ”

जब नाना से पूछा गया कि वो अपनी फ़िल्मों का चुनाव कैसे करते हैं तो नाना ने कहा. “मैं सिर्फ निर्देशक का नाम देखकर फ़िल्में साइन नहीं करता, मैं देखता हूँ कहानी क्या है बाकी कलाकार कौन हैं. अगर बाकी कलाकर अच्छे हों तो आधा काम तो हो गया. अगर वो बुरा है तो आप कितना भी अच्छा काम करो वो अच्छा नहीं हो सकता. मैं ये नहीं कहता कि मैं बहुत अच्छा हूँ लेकिन मैं ये कह सकता हूँ कि मैं बुरा नहीं हूँ.”

नाना कहते हैं कि उन्हें नए निर्देशकों के साथ काम करना पसंद है क्योंकि नए निर्देशकों की सोच नई हैं, “मुझे नए निर्देशकों के साथ काम करना अच्छा लगता है, क्योंकि उनकी सोच नई है.जो स्थापित हो चुके हैं उनके साथ मैं ज़्यादा काम नहीं कर सकता क्योंकि उनके दिमाग में अपने बारे में ग़लतफ़हमियां- ख़ुशफ़हमियाँ हैं.”

नाना पाटेकर से जब भारतीय फ़िल्मों को ऑस्कर पुरुस्कार ना मिलने पर सवाल किया गया तो नाना पाटेकर ने कहा, “अवार्ड से मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. अवार्ड को तो मैं कतई मानता ही नहीं. मुझे कभी भी किसी भी तरह का अवार्ड मत दो, क्योंकि अवार्ड चार लोग चुनते हो. मैं समझता हूँ कि दुनिया को तय करना है कि कौन सी फ़िल्म अच्छी हैं और यहाँ तक कैसे पहुँची हैं. क्या फ़र्क पड़ा कि मुझे अवार्ड मिला या नहीं मिला. अगर फ़िल्म दर्शकों को छूती है तो बस हो गया तुम्हारा काम.”

नाना कहते हैं कि उनकी कोशिश होती है कि जो भी किरदार उन्हें मिलता है वो उसे मेहनत से पूरा कर सकें.

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