देव आनंद-'मेरे लबों पे देखो आज भी तराने हैं'

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सचिन देव बर्मन के साथ निर्माता देव आनंद ने बहुत लंबा सफ़र तय किया लेकिन अपने फ़िल्मी सफ़र के दूसरे पड़ाव में पंचम के साथ कई फ़िल्में की जिनमें 'हरे रामा हरे कृष्णा' "ट्रेन्ड सैटर" साबित हुई.

युवाओं की कुण्ठा और ऊर्जा के अनूठे मेल से जनित 'दम मारो दम' के तेवर बहुत पसंद किये गए.

इसके बाद 'हीरा पन्ना', 'इश्क़ इश्क़ इश्क़', 'वारंट', 'बुलेट', 'स्वामी दादा', 'हम नौजवां' जैसी कई साधारण सी फ़िल्में की लेकिन इन फ़िल्मों के गीत आज भी लोकप्रिय हैं. राजेश रोशन के साथ 'देस परदेस' और 'लूटमार' की और बाद में बप्पी लाहिरी के साथ 'अव्वल नम्बर' और ‘सच्चे का बोलबाला'.

देव आनंद की फ़िल्मों की क्वालिटी में पतन आता गया और उनके द्वारा बनाई गई फ़िल्मों के संगीत में भी. पर उनके फ़िल्मी सफ़र की सबसे ख़ास बात ये है कि देव आनंद के इस दौर के ख़राब काम ने, स्वर्णिम दौर के उनके काम की चमक को किसी तरह से फ़ीका नहीं किया.

रफ़ी साब ने देव आनंद के लिए अनगिनत गीतों को स्वर दिये लेकिन जयदेव द्वारा स्वरबद्ध और साहिर द्वारा रचित, उनका गाया 'मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया' देव आनंद के व्यक्तित्व का सबसे बेहतरीन उदाहरण साबित हुआ है.

उनके व्यक्तित्व का सारांश चार मिनट के गीत में उभर के आता है और इसका दर्शन कई लोगों के लिये प्रेरणा साबित हुआ है. इसके अलावा रफ़ी साब का एक मार्मिक गीत और है मदन मोहन द्वारा संगीत बद्ध फ़िल्म शराबी का 'मुझे ले चलो' जो देव आनन्द की फ़िल्मी यात्रा का विदाई गीत कहा जा सकता है.

दो दिन से देव आनंद के गीत लगातार बज रहे हैं, ये यकीं दिलाते हुए कि देव साब हमारे साथ हैं. अभी बस एक बार को वो प्ले लिस्ट खत्म हुई तो एक गहरा सा सन्नाटा छा गया और देव साब के ना होने की हक़ीकत जीवन में एक शून्य छोड़ गयी जैसे!

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देव साब का जाना, ना सिर्फ़ उनके परिवार, फ़िल्म उद्योग और कला जगत के लिये क्षति रही है, बल्कि हम सब के लिए भी एक व्यक्तिगत क्षति साबित हुई है. 'तेरे ख़्यालों में खोई खोई चांदनी, और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी' लेकिन दिल ये मानने को अभी भी तैयार नहीं है कि देव आनंद की दास्तान सो गई है, चुप हो गई है.

हमसे है ज़िंदा वफ़ा और हमीं से है तेरी महफ़िल जवां

हम जब ना होंगे तो रो रो के दुनिया ढूंढेगी मेरे निशां.

देव आनंद कई पीढ़ियों के नायक, एक किवदंती, के रूप में ज़िंदा रहेंगे कई पीढियों तक उनकी फ़िल्मों और खासकर उनके गीतों में. हमारे लबों पे उनके तराने सदा चलते, मचलते रहेंगे. हमेशा जवां गीत, जिनपे कभी झुर्रियां नहीं पड़ेंगी!

देव आनंद मरे नहीं, देव आनंद मरते नहीं!

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