कैसा है अग्निपथ का संगीत ?

 मंगलवार, 20 दिसंबर, 2011 को 18:51 IST तक के समाचार
ऋतिक रोशन

वर्ष 2011 बस विदाई पर है और नए साल के आगमन पर जिस फ़िल्म की सबसे ज्यादा प्रतीक्षा की जा रही है वो है ’अग्निपथ’.

करन जौहर अपने धर्मा प्रोडक्शन के बैनर पर 22 वर्ष पहले बनी अमिताभ बच्चन की फ़िल्म ’अग्निपथ’ का रीमेक ला रहे हैं.

1990 में बनी ’अग्निपथ’, अमिताभ,डैनी और मिथुन चक्रवर्ती जैसे कलाकारों की अदायगी, मुकुल आनंद के निर्देशन और कसी पटकथा और संवादों के लिए आज भी जानी जाती है लेकिन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत उस फ़िल्म का सबसे कमजोर पहलू था.

नई अग्निपथ में किरदारों और परिस्थितियों में थोड़े बदलाव के साथ संगीत पर बहुत जोर दिया गया है.

"’चिकनी चमेली’ एलबम को एक धमाकेदार शुरुआत देता है. बॉलीवुड में शराब के अड्डे पर आइटम गीतों का एक विशेष जॉनर रहा है जिसमें हेलन का ’मुंगड़ा’ सबसे ऊपर स्थान रखता है, उसी परंपरा की अगली कड़ी है ’चिकनी चमेली’."

पवन झा, संगीत समीक्षक

अग्निपथ में संगीत है अजय-अतुल की युवा प्रतिभाशाली जोड़ी का, जो मराठी फ़िल्मों में अपनी धाक जमाने के बाद हिंदी फ़िल्मों में अपना स्थान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इस वर्ष ’सिंघम’ में उनका संगीत काफ़ी पसंद किया था, लेकिन कैनवास में ’अग्निपथ’ सही मायने में उनके लिये सबसे बड़ा ब्रेक है.

गीतों को बोल दिये हैं अमिताभ भट्टाचार्य ने. ’चिकनी चमेली’ एलबम को एक धमाकेदार शुरुआत देता है. बॉलीवुड में शराब के अड्डे पर आइटम गीतों का एक विशेष जॉनर रहा है जिसमें हेलन का ’मुंगड़ा’ सबसे ऊपर स्थान रखता है, उसी परंपरा की अगली कड़ी है ’चिकनी चमेली’.

अजय-अतुल ने गीत में मराठी लोक संगीत पर आधारित अपने ही एक पुराने मराठी फ़िल्म गीत ’कोम्बाडी पलाई’ (जात्रा) की तर्ज़ पर इसे रचा है.

गीत में मस्ती है, जोश है, रवानी है और थिरकाने वाला संगीत है और लगभग सभी तत्व जो इन दिनों चार्ट बस्टर के लिये ज़रूरी माने जाते हैं.

फिर भी गीत को लोकप्रियता की सीढ़ी चढ़ने के लिये पर्दे पर कटरीना कैफ़ की अदाओं की ज़रूरत पड़ेगी और फ़िल्म के जाने के बाद गीत को ’मुंगड़ा’ की तरह याद रखा जायेगा इसमें भी शक़ है.

एलबम की सबसे बेहतर प्रस्तुति है ’अभी मुझ में कहीं’. सोनू निगम के स्वरों में गीत खूबसूरत बन पड़ा है.

सोनू का ये गीत उनके पिछले कुछ समय में गाए सर्वश्रेष्ठ गीतों में रखा जा सकता है. अमिताभ भट्टाचार्य ने मुख्य किरदार के मनोभावों को बोलों में ढाल के प्रस्तुत किया है.

फ़िल्म में अजय-अतुल ने संगीत दिया है, जो मराठी फ़िल्मों की जानी-मानी संगीतकार जोड़ी है.

अजय-अतुल ने गीत को दो विभिन्न स्तरों की संरचना दी है. एक ओर सॉफ़्ट ट्रीटमेंट में सोनू निगम की आवाज़ उभर के आती है, वहीं दूसरे स्तर पर लैविश ऑरकेस्ट्रेशन है.

धुन में खासकर अन्तरों में बहुत कुछ रहमान के लिये सोनू के कुछ पुराने गीतों के रंग भी नज़र आते हैं. अजय-अतुल इस गीत से अपनी प्रतिभा का परिचय देने में कामयाब हुए हैं.

एक और गीत है एलबम में ’मेरी अधूरी कहानी .... ओ सैय्यां’, जिसे रूप कुमार राठौड़ ने स्वर दिए हैं. मुख्य किरदार की ज़िंदगी में आए बदलाव का ज़िक्र करता गीत एक और उदाहरण है अजय-अतुल की प्रतिभा का. लेकिन कहीं कहीं भारी भरकम वाद्य संयोजन और कोरस, गीत के प्रभाव को कम करता है. अमिताभ के बोलों का भी ज़िक्र यहां ज़रूरी है.

’शाह का रुतबा’ सुखविंदर, आनन्द राज आनन्द और कृष्णा बेरुआ के स्वरों में अजय-अतुल पर्दे पर फ़िल्म के किसी महत्वपूर्ण पल के लिये एक माहौल बनाने में सफ़ल रहे हैं. एक धीमी शुरुआत के बाद बाद के हिस्से में गीत गति पकड़ता है. पर्दे पर एक खास असर छोड़ने की बहुत गुंजाइश रखता है ये गीत.

बहुत कुछ नए निर्देशक करन मल्होत्रा पर निर्भर करता है कि वे इसे कितने बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत कर पाते हैं. अजय-अतुल ने एक प्रभावी प्रस्तुति से उनका काम थोड़ा आसान तो कर ही दिया है.

पिछली 'अग्निपथ' में मुख्य किरदार अमिताभ बच्चन के कोई गीत लिप-सिंक नहीं था. लेकिन यहां नई 'अग्निपथ' में ह्रितिक रोशन पर कुछ गीत अपेक्षित हैं.

’गुन गुना रे’ मुख्य किरदारों के बीच ज़िंदगी के रंगों, विषमताओं पर आधारित एक संवादनुमा गीत है जिसे अमिताभ भट्टाचार्य ने शब्दों में उकेरा है. सुनिधि के स्वरों में गीत में एक मस्ती, बेलौसी का खुशनुमा माहौल है. गीत के उत्तरार्ध में उदित नारायण का केमियो भी गीत का प्रभाव और बढ़ाता है.

अगर आपको पिछली 'अग्निपथ' याद है तो उसमें गणेश विसर्जन के अवसर का गीत कथानक का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा था. फ़िल्म के प्री-क्लाईमैक्स के तनावपूर्ण पलों का साक्षी था वो गीत. यहां उसी परिस्थिति में अजय-अतुल ने रचा है ’देवा श्री गणेशा’ जिसे स्वर दिये हैं स्वयं अजय ने.

अजय अपनी गायकी से बहुत कुछ सुखविंदर की याद दिलाते हैं. अजय-अतुल मराठी भक्ति गीतों, खासकर गणेश स्तुतियों के काफ़ी जाने जाते हैं यहां उन्हें गणेश स्तुति जितने खूबसूरत शब्द तो नहीं मिले हैं, पर गणेश विसर्जन के माहौल के साथ फ़िल्म के किरदारों और स्थितियों के अनुरूप रचना है.

"कुल मिलाकर ’अग्निपथ’ के संगीत में अजय-अतुल अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं और फ़िल्म की सफलता उनको मुख्य संगीतकारों के कोष्ठक में स्थापित कर सकती है. फ़िल्म के संगीत की रेंटिग 3/5. (पांच में से तीन)"

पवन झा, संगीत समीक्षक

कुल मिलाकर ’अग्निपथ’ के संगीत में अजय-अतुल अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं और फ़िल्म की सफलता उनको मुख्य संगीतकारों के कोष्ठक में स्थापित कर सकती है. फ़िल्म के संगीत की सबसे खास बात है कि फ़िल्म के गीत फ़िल्म के कथानक का हिस्सा नज़र आते हैं और फ़िल्म के किरदारों से जुड़े लग रहे हैं.

निर्देशक को फ़िल्म के लिये माहौल देने में मह्त्वपूर्ण औज़ार साबित हो सकते हैं अब ये निर्देशक पर है कि इस मौके का उपयोग पर्दे पर कैसे करते हैं.

’चिकनी चमेली’ फ़िल्म के प्रदर्शन के पहले एक ज़मीन बनाने में कामयाब रहेगा, मगर बहुत लंबी रेस का घोड़ा नहीं है. बाकी गीतों की शेल्फ़-लाइफ़ फ़िल्म की सफ़लता पर निर्भर करेगी.

रेटिंग के लिहाज़ से अग्निपथ के संगीत को 3/5 (पाँच मे से तीन)

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.