'मदर इंडिया, मुग़ल-ए-आज़म का मुकाबला नहीं'

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Image caption हाल ही में रिलीज़ हुई गोविंदा की फ़िल्म 'लूट' बॉक्स ऑफिस पर चल नहीं पाई.

कुली नंबर 1, हीरो नंबर 1, अनाड़ी नंबर 1 और जोड़ी नंबर 1 जैसी फ़िल्में करने वाले अभिनेता गोविंदा मानते हैं कि भारतीय सिनेमा में 'मदर इंडिया' और 'मुग़ल-ए-आज़म' के बाद तो फ़िल्में बनी ही नहीं हैं.

गोविंदा कहते हैं, ''अगर आप गौर से देखें तो हिंदुस्तान में 'मदर इंडिया' बनी और 'मुग़ल-ए-आज़म' बनी, बस उसके बाद तो उस तरह से फ़िल्में बनी ही नहीं. हम सब तो बस अभी तक सीख ही रहे हैं, समझ रहे हैं. फ़िल्में तो बस वही बनी उसके बाद से तो बस ऐसे-वैसे तरीके से ही हो रहा है काम.''

आज गोविंदा 47 साल के हो गए हैं. भले ही गोविंदा बहुतों के चहेते हों लेकिन ख़ुद वो वरिष्ट अभिनेता दिलीप कुमार और धर्मेन्द्र को अपनी प्रेरणा मानते हैं.

गोविंदा कहते हैं, ''दिलीप साहब को मैं बहुत-बहुत मानता हूं और धर्मेन्द्र जी का भी मैं बहुत बड़ा फैन हूं. ये दोनों मेरे लिए भगवान के समान हैं. मैं वाकई किस्मत वाला हूं कि मुझे इनके साथ काम करने का मौका मिला. इनके काम को देखने का, इनसे सीखने का, इनको समझने का मौका मिला. ये मेरे लिए बड़ी ही ख़ुशी की बात है.''

दिलीप कुमार और धर्मेद्र गोविंदा की प्रेरणा सही लेकिन हिंदी फ़िल्मों के एक अभिनेता ऐसे भी हैं जिनके साथ दोबारा काम ना कर पाने से काफी निराश हैं गोविंदा. वो हैं अमिताभ बच्चन जिनके साथ गोविंदा ने 1998 में 'बड़े मियां छोटे मियां' की थी. इस फ़िल्म के रिलीज़ होने के बाद कई समाचार पत्रों में अमिताभ बच्चन को नज़रंदाज़ करते हुए गोविंदा के काम की जम कर तारीफ की गई थी. वो दिन था और आज का दिन है ये दोनों कलाकार किसी और फ़िल्म में साथ नज़र नहीं आए.

गोविंदा को आज भी इस बात का मलाल है. वो कहते हैं, ''1998 के बाद मैंने और अमिताभ जी ने साथ काम ही नहीं किया है. 13 साल हो गए हैं. वैसे तो वक़्त के लिए वक़्त ही ज़िम्मेदार होता है लेकिन सच तो ये है कि तारीफ उतनी ही होनी चाहिए जिनती हज़म हो सके. बड़े हमसे प्यार करते रहें ना कि हमसे दूर हो जाएं.’’

हाल में आई गोविंदा की फ़िल्म 'लूट' भले ही बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल ना कर पाई हो लेकिन गोविंदा ने बॉलीवुड को कई मनोरंजक फ़िल्में दी हैं. गोविन्द कहते हैं, ''इतने सालों में मुझे बहुत अच्छी-अच्छी फ़िल्में करने का मौका मिला. बहुत फ़िल्में हिट हुई. ये मेरी खुशकिस्मती थी.''

गोविंदा ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की 1986 में रिलीज़ हुई फ़िल्म 'इलज़ाम' से. 1997 में पहली बार गोविंदा को उनकी फ़िल्म 'साजन चले ससुराल' के लिए ‘फ़िल्मफेयर स्पेशल अवार्ड’ से नवाज़ा गया. हाल ही में गोविंदा को 'पार्टनर' में उनके रोल के लिए 'आईफा' में सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का पुरस्कार भी मिला.

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