ऐक्टिंग मेरे बस की बात नहीं: फ़रहा ख़ान

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Image caption फ़रहा की आने वाली फ़िल्म का नाम है 'शिरीन फरहाद'

कई सालों तक बॉलीवुड के बड़े बड़े सितारों को अपने इशारों पर नचाने के बाद अब कोरियोग्राफ़र और फ़िल्म निर्देशक फ़रहा ख़ान की बारी है दूसरों के इशारों पर नाचने की या यूं कहा जाए दूसरों के इशारों पर अभिनय करने की.

फ़रहा ख़ान बेला सहगल की फ़िल्म 'शिरीन फरहाद' से अभिनय की दुनिया में कदम रख रही हैं. फ़िल्म में फरहा के साथ हैं बोमन ईरानी.

फ़िल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है और ज़ाहिर सी बात है कि फ़रहा के लिए अभिनय की डगर आसान नहीं है.

फ़रहा कहती हैं, ''अरे मैं तो परेशान हो गई हूं, ये ऐक्टिंग मेरे बस की बात नहीं है. मैं तो सभी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को सलाम करती हूं.’’

साथ ही वो कहती हैं, ‘’अभिनय में बहुत ध्यान देना पड़ता है और अपने आप को किसी और के हवाले करना पड़ता है जो मेरे लिए आसान नहीं है. हां ये ज़रूर है कि इन सब चीज़ों से मैं काफी कुछ सीख रही हूं.''

'शिरीन फरहाद' की कहानी फ़िल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली ने लिखी है. फ़िल्म में फ़रहा ख़ान एक पारसी महिला की भूमिका में नज़र आनेवाली हैं.

अब क्योंकि ये फरहा की पहली फ़िल्म है तो कुछ तो तैयारियां की ही होंगी फ़रहा ने, किस तरह निभाने वाली है वो इस किरदार को?

इस सवाल के जवाब में फ़रहा कहती हैं, ''अगर मैं ऐक्टिंग को ऐक्टिंग की तरह ना करूं और बस उस किरदार की तरह बर्ताव करूं तो शायद मेरे लिए अभिनय आसान हो जाएगा. खुस्किस्मती से मेरे साथ फ़िल्म में बोमन ईरानी हैं. बोमन के साथ काम करने में मुझे ज़रा भी दिक्कत नहीं होती. वैसे भी बोमन के साथ बतौर निर्देशक मैंने पहले भी काम किया है.''

अब तो फ़रहा ने कोरियोग्राफ़ी और निर्देशन के साथ साथ अभिनय का स्वाद भी चख लिया है. तो फ़रहा के लिए सबसे आसान क्या है?

इस सवाल के जवाब में फ़रहा कहती हैं, ''हीरो हीरोइनों को नचाना बहुत ही आसान होता है और इस काम में मुझे मज़ा भी बहुत आता है. लेकिन अभिनय की कौसौटी पर मैं कितनी खरी उतरती हूं ये तो वक़्त और दर्शक ही बताएगें.''

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