हाउसफुल 2- धूम मचाने की गुंजाइश नहीं

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हाउसफुल-2 साजिद खान की नई कॉमेडी फ़िल्म है. उनकी पिछली फ़िल्म ‘हे बेबी’ और हाउसफुल में शंकर-एहसान-लॉय की तिकड़ी का संगीत लोकप्रिय ज़रूर हुआ था लेकिन फिर तात्कालिक सफ़लता से ज्यादा कुछ नहीं रहा. साजिद खान ने इस बार परिवर्तन के तौर पर संगीत के लिये साजिद-वाजिद की जोड़ी को मौका दिया है.

साजिद वाजिद प्रतिभाशाली संगीतकार हैं लेकिन फ़िल्मों में शुरुआती सफ़लताओं और वॉन्टेड और दबंग जैसी हिट फ़िल्मों के बाद भी अब तक अपना एक मकाम बनाने में सफ़ल नहीं हुए हैं.

हाउसफुल 2 में साजिद-वाजिद के संगीत से वैसे भी बहुत ज्यादा अपेक्षा रखना बेमानी है. हाँ, अपनी स्टारकास्ट और प्रोमोज़ के दम पर फ़िल्म के प्रचार के लिये ये एलबम महत्वपूर्ण वाहन जरूर साबित हो सकता है.

’पाप्पा तो बैंड बजाएं’, एक कॉमिक टोन लिये मज़ेदार सा गीत है. साजिद खान की पिछली हाउसफुल में ’पापा जग जाएगा’ बहुत लोकप्रिय हुआ था. नई हाउसफुल में ’पापा’ उसकी अगली कड़ी तो है ही, इसके अलावा फ़िल्म में बहुत से ’पाप्पा’ धूम मचाने आ रहे हैं.

पर्दे पर ऋषि कपूर, रणधीर कपूर, मिथुन चक्रवर्ती और बोमन ईरानी जैसे कलाकार, इस ’पाप्पा’ में मुख्य अभिनेताओं के साथ थिरकते नज़र आएंगे. निश्चित रूप से पिछले पापा से बेहतर गीत है. गीत में अगर मस्ती है तो उसका बहुत कुछ श्रेय दो वर्ष पहले आए ऑस्ट्रेलियन बैंड ’योलन्दा बी कूल’ के गीत ’वी नो स्पीक अमेरिकानो’ को मिलना चाहिए, जिसकी धुन और संयोजन पर साजिद-वाजिद ने ये गीत आधारित किया है. ये गीत पर्दे पर एक मनोरंजक प्रस्तुति साबित हो सकता है.

'अनारकली डिस्को चली’ एलबम में एक आइटम गीत की ज़रूरत पूरा करने का हिस्सा है. बंटी और बबली में कजरारे के बाद ये टैम्प्लेट इतना दोहराया जा चुका है कि अब और बासी हो चुका है. ’अनारकली’ कई प्रोमोज़ के बाद भी अभी तक हलचल मचाने में नाकाम रही है.

साजिद-वाजिद, इस आइटम को मुन्नी और शीला से अलग रंग देने के प्रयास में अस्सी और नब्बे के दशक में चले गए हैं और इस गीत को माधुरी दीक्षित के कुछ हिट गीतों से उठा कर रचा है. गीत के अतंरे याराना के ’मेरा पिया घर आया हो राम जी’ से उठाये गये हैं और पूरा गीत उस दौर के हिट गीतों की याद दिलाता है.

गीतकार समीर भी नये मुहावरों को तलाशते नज़र नहीं आते. पर्दे पर मलाईका अरोड़ा और गायिका ममता शर्मा की मुन्नी के बाद की ये जुगलबंदी ’मुन्नी’ जैसा रंग जमाने में नाकाम रही है. गीत कुछ लोकप्रिय हो सकता है लेकिन मुन्नी की कामयाबी दोहराने की कोई सम्भावना नहीं रखता.

एलबम में एक हल्का-फ़ुल्का रोमांटिक गीत है शान और श्रेया घोषाल के स्वरों में ’डू यू नो..’ गीत का शुरुआती हुक पंचम और ऋषि कपूर के सत्तर के दशक के कुछ सदाबहार गीतों की याद दिलाता है. साजिद-वाजिद की धुन भी डेटेड लगती है, सिर्फ़ शान और श्रेया की गायकी की वजह से कुछ दिन सुना जा सकता है.

’राइट नाउ, राइट नाउ’ डांस फ़्लोर्स के लिये एक बोरिंग सा गीत है. वाजिद और सुनिधि के स्वरों में एक साधारण सी रचना साबित होता है. चार गीतों के इस एलबम में ज़रूरी रस्म के तौर पर कुछ गीत रीमिक्स अवतार में भी हैं लेकिन किसी किस्म का वैल्यू एडिशन नहीं करते.

कुल मिलाकर हाउसफुल 2 का संगीत बहुत धूम मचाने की गुंजाइश नहीं रखता. एलबम में साजिद-वाजिद ने अपनी प्रतिभा नए गीत रचने की बजाए पुरानी धुनों जिन पर नये गीत रचे जा सकें को ढूंढने में ज्यादा लगाई है.

’पाप्पा’ और ’अनारकली’ निश्चित तौर पर कुछ दिनों तक सुने जाएंगे लेकिन इनकी लोकप्रियता के तत्व इनकी मूल रचनाओं से ही उठ कर आये हैं और साजिद-वाजिद अपने स्तर पर कुछ नए रंग भरने में नाकाम रहे हैं. गीतकार समीर भी अपने कामचलाउ शब्दों से प्रभावित नहीं करते. फ़िल्म के गीत एलबम के तौर पर बहुत प्रभावित नहीं करते लेकिन पर्दे पर स्टारकास्ट में पुराने स्टार्स की मौजूदगी कुछ मनोरंजन की सम्भावनाएं ज़रूर जगाती है.

रेटिंग के लिहाज़ से हाउसफ़ुल-2 के एलबम को 2/5 (पाँच में से दो)

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