विद्या बालन को राष्ट्रीय पुरस्कार

59 वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों में फ़िल्म द डर्टी पिक्चर में शानदार अभिनय के लिए विद्या बालन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला है जबकि सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अभिनेता गिरिष कुलकर्णी को मराठी फ़िल्म देऊल के लिए मिला.

सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार संयुक्त रुप से मराठी फ़िल्म देऊल और ब्यारी भाषा में बनी फ़िल्म ‘ब्यारी’ को दिया गया.

निर्देशक ऑनिर की फ़िल्म ‘आई एम’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फ़िल्म का पुरस्कार मिला. साथ ही इस फ़िल्म के गाने ‘अगर ज़िदगी’ के लिए अमिताभ भट्टाचार्य को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का पुरस्कार मिला.

सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का अवार्ड मिला नील दत्त को बंगाली फ़िल्म ‘रंजना आमी आशबो ना’ के लिए.

सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशक का अवार्ड बॉस्को सीज़र को मिला, बॉस्को को ये अवार्ड फ़िल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ के सेनोरिटा गाने के निर्देशन के लिए दिया गया.

सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार रुपा गांगूली को बंगाली फ़िल्म ‘अबोशेशे’ के लिए मिला. वहीं सर्वश्रेष्ठ गायक रहे आनंद भाटे मराठी फ़िल्म बालगंधर्व के लिए.

बाल कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार संयुक्त रुप से पार्थो गुप्ते को फ़िल्म ‘स्टैनली का डब्बा’ और फिल्म ‘चिल्लर पार्टी’ के दस बच्चों की टीम को दिया गया.

सर्वश्रेष्ठ निर्देशक रहे गुरविंदर सिंह पंजाबी फ़िल्म ‘अंधे घोडे दा दान’ के लिए, जबकी सर्वश्रेष्ट बाल फ़िल्म रही ‘चिल्लर पार्टी’.

सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फ़िल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार तमिल फ़िल्म ‘अलगर सामीइन कुदिरइ’ को मिला.

वहीं तकनीकी विभाग में स्पेशल इफेक्टस का अवार्ड मिला फ़िल्म ‘रा वन’ के लिए हैरी हिगोंरानी और किरन यादव को.

मेकअप आर्टिस्ट का साझा पुरस्कार मराठी फ़िल्म बालगंधर्व और द डर्टी पिक्चर के लिए दिया गया विक्रम गायकवाड. दोनों ही फ़िल्मों में मेकअप विक्रम ने किया है.

बेस्ट कॉस्टयूम अवार्ड के लिए भी साझा अवार्ड मिला फ़िल्म बालगंधर्व और द डर्टी पिक्चर को ही. बालगंधर्व के लिए कॉस्टयूम डिज़ाइन किया था नीता लूल्ला और द डर्टी पिक्चर की कॉस्टयूम डिज़ाइनर थी निहारिका खान.

बेस्ट साउंड रिकार्डिंग लोकेशन, बाएलॉन फॉनसेका को फ़िल्म ‘ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा’ के लिए मिला. साथ ही उन्हें हिंदी फ़िल्म गेम के लिए बेस्ट साउंड डिज़ाइन का पुरस्कार भी बाएलॉन फॉनसेका को ही मिला. बेस्ट साउंड रि-रिकार्डिंग का पुरस्कार हितेंद्र घोष को फ़िल्म गेम के लिए मिला.

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