संगीत समीक्षा: थ्री

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Image caption रेटिंग के लिहाज़ से रब्बी के ‘थ्री’ को 3/5 अंक देते हैं संगीत समीक्षक पवन झा.

‘बुल्ला की जानां’ से धमाकेदार शुरुआत के बाद, पिछले आठ वर्षों में रब्बी शेरगिल के सिर्फ़ दो एलबम और एक फ़िल्म आई है. फिर भी सूफ़ी-रॉक और पंजाबी लोक संगीत के अनूठे रंग बिखेरते उनके सुरों के चाहने वालों की तादात कम नहीं है.

चार वर्ष के अन्तराल के बाद रब्बी अपने नए एलबम के साथ हाज़िर हैं, ‘III’ (थ्री).

भारतीय गैर फ़िल्मी ‘इंडी’ संगीत में रब्बी ने कम काम के बावज़ूद अपनी एक जगह बनाई है और उनके नए एलबम की खबर से उत्सुकता और सम्भावनाएं स्वाभाविक हैं.

एलबम का पहला गीत है ‘गंगा’, एलबम को एक अच्छी शुरुआत देता है. रब्बी का ये गीत ‘एमटीवी अनप्लग्गड’ शो पर उदघाटित हुआ था और एलबम के आने से पहले ही लोकप्रिय हो चुका है. रब्बी के गीतों की एक खास बात जो उन्हें अपने समकालीन संगीतकारों से अलग करती है कि उनके गीतों में शब्दों की अपनी अहमियत होती है है भारी भरकम संयोंजन के बावजूद शब्द अपने अर्थ खोते नहीं हैं. ‘तू न्हा मेरी गंगाच, तू न्हा मेरी जमनाच’ में भी शब्द गीत को अलग रंग देते हैं. एक प्रेम कहानी के बहाने रब्बी समाज के बंधनों में बंधी स्त्री की बात करते नज़र आते हैं. रब्बी की गायकी और वाद्य संयोजन भी एक अच्छी रचना में अपना पूरा योगदान देते हैं.

‘कैबरे वाईमर’ रब्बी के अनूठे टैम्प्लेट से थोड़ा हटकर, पॉप्युलिस्ट और प्रचलित टैम्प्लेट की रचना है. पंजाबी हिप हॉप और रैप के साथ रब्बी की ये रचना बहुत खास नहीं बन पड़ी है. शब्दों में भी जर्मनी के सांस्कृतिक ‘कैबरे वाईमर’ का ज़िक्र मात्र है और बिना किसी खास संदर्भ के उसका उल्लेख गीत को कोई खास मायने नहीं देता.

‘तू ही’ रब्बी के पुराने प्रचलित टैम्प्लेट का ही विस्तार लगता है. रब्बी गायकी के अतिरिक्त अपने इलेक्ट्रोनिक गिटार के साथ मौजूद हैं और अपनी गायकी और वाद्य संयोजन से प्रभावित करते हैं. रचना में नवीनता नहीं हैं फिर भी रब्बी अपने चिर परिचित अंदाज़ के दम पर असर देने में कामयाब रहे हैं.

‘तू है खूबसूरत’ एक और अच्छी रचना है. पंजाबी ढोल, भांगड़ा बीट्स और टैक्नो-इलेक्ट्रो संगीत के मेल से रब्बी अपने प्रयोगवादी रंग में नज़र आए हैं. रब्बी गीत में उनके बोल कहीं कहीं पर प्रभावित करते हैं पर निरन्तरता का अभाव है.

‘ज़ीरो दुबिधा’ रब्बी की संज़ीदा गायकी के लिए सुना जा सकता है. हालांकि संयोजन के स्तर पर इंडी रॉक के जाने पहचाने धरातल का गीत है, लेकिन रब्बी अपनी गायकी से गीत को असर देने में सफ़ल हुए हैं.

‘आधी क्रान्ति’ एलबम की अकेली रचना है जो हिन्दी में है. गीतकार का विचार अच्छा है, फिर भी रब्बी शब्दों से विचारों को अनुकूल आकार देने में सफ़ल नहीं हुए हैं और शब्द अपना असर छोड़ने में नाकाम रहे हैं. हैवी गिटार का उपयोग गीत को एक माहौल देता है फिर भी एलबम में बहुत प्रभावी नहीं बन पड़ा है ये गीत. शायद लाईव कॉन्सर्ट्स में रब्बी इस गीत में रंग जमाने में कामयाब हों.

‘सॉन्ग फ़ॉर पिकु’, एक वाद्य रचना है जो पूरी तरह से गिटार पर रची गई है. बहुत व्यक्तिगत सी रचन है रब्बी की जो एलबम को विविधता प्रदान करती है. ‘लभदा जेहनूं’ और ’एहो हमारा जीवना’ दो अन्य ठीक ठाक सी रचनाएं हैं.

सारांश में रब्बी ‘थ्री’ में इंडी रॉक के अपने स्थापित दायरे में ही कुछ अच्छी रचनाएं देने में सफ़ल रहे हैं. हालांकि एलबम में पॉप्युलिस्ट टैम्प्लेट की ओर उनका थोड़ा रुझान दिखाई देता है. रब्बी अपनी गायकी और संगीत से अपने प्रशंसकों की कसौटी पर तो खरे उतरे हैं लेकिन गीतकार के तौर पर इस बार उनके शब्दों का वज़न कुछ कम है. यदि आप इंडी-रॉक या रब्बी के प्रशंसक हैं तो ये एलबम आपको ज़रूर पसंद आएगा!

रेटिंग के लिहाज़ से रब्बी के ‘थ्री’ को 3/5 (पांच में से तीन)

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