छात्रों के भविष्य की चिंता: सुभाष घई

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फिल्मकार सुभाष घई कहते हैं कि वो अपने फिल्म इंस्टीट्यूट के छात्रों के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते बॉम्‍बे हाई कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें घई को फिल्‍म इंस्‍टीट्यूट के लिए महाराष्‍ट्र सरकार की तरफ जमीन आवंटित किए जाने को रद्द कर दिया गया था.

बीबीसी से इस मामले पर बात करते हुए सुभाष घई कहते हैं, ''मुझे जो नुकसान होना था वो तो हो चुका है लेकिन हमारे इंस्टीट्यूट में आने वाले छात्रों को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए. उनका भविष्य ख़राब नहीं होना चाहिए.''

हालांकि सुभाष घई थोड़े आशान्वित भी हैं. वो कहते हैं, "शायद अभी मेरा समय ठीक नहीं चल रहा है. लेकिन हमारे मिशन में अगर सत्यता और ताकत है तो ये आगे बढ़ता जाएगा. ये परेशानी बादल की तरह आई है और चली भी जाएगी. मुझे इस बात कि खुशी है कि मुझे मीडिया का और फिल्म इंडस्ट्री का पूरा समर्थन मिल रहा है.''

सुभाष घई बताते हैं कि उनके फिल्म इंस्टीट्यूट को 2014 तक के लिए अनुमति मिली थी इसीलिए उन्होंने सिर्फ 2014 तक के लिए ही एडमिशन किए हैं. अगर उन्हें उसके आगे के दाखिले करने हैं तो उन्हें अपने इंस्टीट्यूट के लिए कहीं और जमीन तलाशनी होगी.

गौरतलब है कि साल 2000 में सुभाष घई को महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख सरकार ने 20 एकड़ जमीन आवंटित की थी.

अदालत ने कुल 20 एकड़ ज़मीन में से 14.5 एकड़ ज़मीन को फ़ौरन वापस करने के आदेश दिए हैं जबकि बाक़ी साढ़े पांच एकड़ ज़मीन जिस पर इस समय फ़िल्म इंस्टीट्यूट बना हुआ है उसको जुलाई 2014 तक राज्य सरकार को वापस करने के लिए कहा है.

अदालत के अनुसार फ़िल्म इंस्टीच्यूट में इस समय चल रहे सारे कोर्स 2014 तक ख़त्म हो जाएंगे और किसी छात्र का नुक़सान नहीं होगा.

अदालत ने घई को वर्ष 2000 से अब तक हर साल के लिए पांच करोड़ तीस लाख का किराया भी अदा करने का आदेश दिया है. सुभाष घई ने हाईकोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

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