कादर खान की वो अधूरी ख्वाहिश

 बुधवार, 18 अप्रैल, 2012 को 05:35 IST तक के समाचार
कादर खान

कादर खान की अमिताभ बच्चन को लेकर फिल्म बनाने की तमन्ना अब तक पूरी नहीं हो सकी.

अभिनेता कादर खान और अमिताभ बच्चन ने एक साथ कई फिल्में कीं. अदालत, सुहाग, मुकद्दर का सिकंदर, नसीब और कुली जैसी बेहद कामयाब फिल्मों में इन दोनों ने साथ काम किया.

इसके अलावा कादर खान ने अमर अकबर एंथनी, सत्ते पे सत्ता और शराबी जैसी फिल्मों के संवाद भी लिखे. लेकिन कादर खान अमिताभ बच्चन को लेकर खुद एक फिल्म बनाना चाहते थे और उनकी ये तमन्ना अब तक पूरी नहीं हो सकी.

कादर ने ये बात बीबीसी से एक खास बातचीत में बताई. उन्होंने बताया, "मैं अमिताभ बच्चन, जया प्रदा और अमरीश पुरी को लेकर फिल्म जाहिल बनाना चाहता था. उसका निर्देशन भी मैं खुद करना चाहता था. लेकिन खुदा को शायद कुछ और ही मंजूर था."

"अमिताभ एक संपूर्ण कलाकार हैं. अल्ला ने उनको अच्छी आवाज, अच्छी जबान, अच्छी ऊंचाई और बोलती आंखों से नवाजा है."

कादर खान, अभिनेता और लेखक

कादर खान ने बताया कि इसके फौरन बाद फिल्म कुली की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को जबरदस्त चोट लग गई और फिर वो महीनों अस्पताल में भर्ती रहे.

अमिताभ के अस्पताल से वापस आने के बाद फिर कादर खान अपनी दूसरी फिल्मों में बहुत ज्यादा व्यस्त हो गए और इधर अमिताभ बच्चन राजनीति में आ गए. उसके बाद कादर खान और अमिताभ की जुगलबंदी वाली ये फिल्म हमेशा के लिए डब्बाबंद हो गई.

कादर खान ने ये भी बताया कि बीच में उनकी और अमिताभ की दोस्ती में किसी वजह से दरार भी आ गई थी लेकिन अब उनके बीच सब कुछ सामान्य होने लगा है.

अमिताभ बच्चन

कादर खान ने अमर अकबर एंथनी, मुकद्दर का सिकंदर और सत्ते पे सत्ता जैसी कई फिल्मों के संवाद लिखे

अमिताभ की तारीफ करते हुए कादर खान कहते हैं, "वो संपूर्ण कलाकार हैं. अल्लाह ने उनको अच्छी आवाज, अच्छी जबान, अच्छी ऊंचाई और बोलती आंखों से नवाजा है."

कादर खान कुछ सालों से फिल्मों से दूर हो गए हैं. इसकी वजह बताते हुए वो कहते हैं, "वक्त के साथ फिल्में भी बदल गई हैं. अब ऐसे दौर में मैं अपने आपको फिट नहीं पाता. मेरे लिए बदलते दौर के साथ खुद को बदलना संभव नहीं है, तो मैंने अपने आपको फिल्मों से अलग कर लिया."

कादर खान ने ये भी कहा कि मौजूदा दौर के कलाकारों की भाषा पर पकड़ नहीं है और ये बात उन्हें दुखी करती है.

70 के दशक में अमिताभ बच्चन की कुछ फिल्मों जैसे सुहाग, अमर अकबर एंथनी और मुकद्दर का सिकंदर में कादर खान की कलम से लिखे संवाद काफी मशहूर हुए.

दुख

लेकिन कादर खान को इस बात का दुख है कि उन फिल्मों में नायक जिस चालू मुंबइया भाषा का इस्तेमाल करता है वही बाद की फिल्मों की मुख्य भाषा बन गई और फिर धीरे-धीरे उसकी आड़ में फिल्मों की भाषा खराब होती चली गई.

"हमने फिल्मों की भाषा बिगाड़ी और लगता है अब हमको ही सुधारनी पड़ेगी. फिल्मों में दोबारा आना पड़ेगा."

कादर खान, अभिनेता और लेखक

वो कुछ दोष अपने आपको भी देते हैं. कादर खान कहते हैं, "हमने फिल्मों की भाषा बिगाड़ी और लगता है अब हमको ही सुधारनी पड़ेगी. फिल्मों में दोबारा आना पड़ेगा."

कादर खान ने 80 के दशक में जीतेंद्र, मिथुन और 90 के दशक में गोविंदा के साथ भी कई फिल्में कीं.

वो अपने दौर को याद करते हुए भावुक हो जाते हैं. उनके मुताबिक असरानी, शक्ति कपूर, गोविंदा, जीतेंद्र और अरुणा ईरानी के साथ की गई उनकी कई फिल्में और इन कलाकारों के साथ बिताया वक्त उन्हें बहुत याद आता है.

कादर खान ने बताया कि खासतौर पर वो असरानी के जबरदस्त प्रशंसक हैं, जिनके साथ उन्होंने कई फिल्में कीं.

कादर खान ने ये भी कहा कि मौजूदा दौर में फिल्मकारों का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ पैसे कमाने में लग गया है और इस वजह से फिल्मों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.

फिलहाल कादर खान अपने बेटों के थिएटर ग्रुप और उनके प्ले में व्यस्त हैं.

उनके बेटे सरफराज खान और शाहनवाज खान, अपने पिता के लिखे दो ड्रामों का मंचन कर रहे हैं. इन ड्रामों के नाम है मेहरबां कैसे-कैसे और लोकल ट्रेन. कादर खान ने बताया कि ये दोनों ही प्ले राजनैतिक व्यंग्य हैं.

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