लोग मुझे देखने नहीं आएंगे: आयुष्मान

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Image caption आयुष्मान खुराना और यामी गौतम विक्की डोनर से बॉलीवुड में कदम रख रहे हैं.

इस हफ्ते रिलीज़ हो रही फिल्म विक्की डोनर में आयुष्मान खुराना विक्की अरोड़ा की भूमिका निभा रहे हैं जो एक स्पर्म डोनर है. बीबीसी से एक खास बातचीत में उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में अपनी पहली फिल्म के तौर पर उन्होंने 'स्पर्म डोनेशन' जैसे अलग विषय पर बन रही फिल्म को ही क्यों चुना?

आयुष्मान कहते हैं, ''अगर इंडस्ट्री में आपका कोई माई-बाप नहीं है, अगर आप किसी बड़े स्टार के बच्चे नहीं हैं तो आपके लिए बहुत ज़रूरी है कि आप लीक से हटकर फिल्म को चुने. विक्की डोनर में विषय हीरो है. इस विषय की विचित्रता को देखने के लिए लोग आएंगे. मुझे देखने अभी कोई नहीं आएगा क्योंकि अभी मैं स्टार नहीं हूं, इसलिए इस तरह की फिल्म का चयन करना मेरे लिए बहुत ज़रूरी था.''

फिल्म में अपने किरदार विक्की डोनर के बारे में बताते हुए आयुष्मान कहते हैं, ''ये लड़का दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय परिवार से है. मुझे लगता है विक्की डोनर का आम लोगों से बहुत अच्छा जुड़ाव होगा.''

कैसे मिली फिल्म

बॉलीवुड में अपनी पहली फिल्म हासिल करना कोई बच्चों का काम तो है नहीं, तो आयुष्मान को कितने पापड़ बेलने पड़े विक्की डोनर में मुख्य भूमिका पाने के लिए?

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Image caption आयुष्मान खुराना और यामी गौतम दोनों ही चंडीगढ़ से हैं और बचपन से ही एक दूसरे को जानते हैं.

इस सवाल का जवाब शायद आपको थोड़ा हैरान कर दे. आयुष्मान कहते हैं, ''मुझे इस फिल्म के लिए ऑडिशन तक देने की ज़रूरत नहीं पड़ी. विक्की डोनर के निर्देशक सूजीत सरकार ने मुझे बिना किसी टेस्ट के ही फिल्म के लिए चुन लिया था क्योंकि उन्हें एक ऐसे एक्टर की ज़रूरत थी जिसका युवा पीढ़ी से एक कनेक्ट हो. और मैं एक यूथ चैनल से जुड़ा हुआ हूं और इस बात का मुझे बहुत फायदा हुआ.''

विक्की डोनर के निर्माता हैं जॉन अब्राहम और जॉन की तारीफ करते थक नहीं रहे हैं आयुष्मान. वो कहते हैं, ''जॉन एक बड़े भाई की तरह हैं. वो कभी भी निर्देशक के काम में टांग नहीं अड़ाते थे. जॉन फिल्म के सेट पर आते थे, चाय-कॉफ़ी पीते थे, मस्ती करते थे और चले जाते थे.''

कौन हैं आदर्श?

इंडस्ट्री में आने वाले हर नए कलाकार का कोई न कोई आदर्श ज़रूर होता है. तो आयुष्मान किसे मानते हैं अपना प्रेरणा स्रोत?

इस सवाल का जवाब देते हुए आयुष्मान कहते हैं, ''आदर्श किस्म की चीज़ें मुझे अच्छी लगती ही नहीं हैं. कॉलेज में जब मैं रंगमच करता था तो जो भी किरदार मुझे दिया जाता था मैं कर लेता था. मैंने कभी ये नहीं सोचा की मुझे ये रोल करना है या मुझे वो किरदार निभाना है. मुझे लगता है कि आपकी प्रेरणा स्रोत कोई भी हो सकता है, सड़क पर चलते हुए इंसान से भी आप कुछ न कुछ सीख सकते हैं.''

आयुष्मान भले ही ये मानते हैं कि आदर्श कोई भी हो सकता है लेकिन अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर के जादू से खुद को बचा नहीं पाए हैं वो.

वो कहते हैं, ''जब भी अमिताभ जी और सचिन अपना काम कर रहे होते हैं तो उनमें एक चार साल के बच्चे की उमंग होती है. और मुझे यही बात बहुत अच्छि लगती है.''

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