संगीत समीक्षा - इशकज़ादे

इशकज़ादे इमेज कॉपीरइट pr
Image caption इशकज़ादे 11 मई, 2012 को रिलीज़ हो रही है.

इशकज़ादे यशराज फ़िल्म्स की नई फ़िल्म है जो अर्जुन कपूर और परिणिति चोपड़ा की नवोदित जोड़ी की वजह से इन दिनों चर्चा में है.

फ़िल्म देहाती परिवेश में विद्रोही तेवर लिए एक प्रेम कहानी है. फ़िल्म का संगीत प्रतिभाशाली संगीतकार अमित त्रिवेदी के ज़िम्मे है और गीत लिखे हैं कौसर मुनीर ने जो कुछ साल पहले ‘टशन’ के एक गीत ‘फ़लक तक चल साथ मेरे’ से पहचान पाने के बाद लगभग गायब सी थीं.

एलबम में फ़िल्म के परिवेश में रंगे पांच ट्रैक्स हैं. फ़िल्म का परिवेश और संगीत टैम्प्लेट यशराज की ही ‘बंटी और बबली’ की याद दिलाता है. हां, बंटी-बबली के मुकाबले किरदारों के तेवर थोड़े उग्र हैं.

‘इशक़ज़ादे’ जावेद अली के स्वरों में एक अच्छी रचना है. गीत का माहौल बहुत कुछ अमित त्रिवेदी के स्थापित टैम्प्लेट सा है. कौसर मुनीर के बोल दो मुख्य किरदारों के बीच पनप रहे रिश्ते की दास्तां बयां करते हैं. गीत के अन्त में श्रेया घोषाल का केमियो गीत को और असरदार बनाता है.

इमेज कॉपीरइट pr
Image caption 'इशकज़ादे' से बॉलीवुड में कदम रख रहे अर्जुन कपूर फिल्म निर्माता बोनी कपूर के बेटे हैं.

‘परेशां’ एलबम की सबसे हॉंटिंग रचना है. नई गायिका शामली खोलगड़े अपनी पुरकशिश गायकी से गीत में असर पैदा करतीं हैं. अमित त्रिवेदी के वाद्य संयोजन में आधुनिक वाद्यों के साथ हारमोनियम का प्रयोग गीत को एक खूबसूरत माहौल देता है. कौसर भी अपने शब्दों के चयन और इमेजरी से प्रभावित करती हैं.

‘बंटी और बबली’ के कजरारे ने बॉलीवुड में ढाबा-छाप शायरी लिए ‘माडर्न मुज़रा कव्वाली’ का एक नया दौर शुरु किया था ‘झल्ला-वल्लाह’ उसकी अगली कड़ी है.

गीत की मस्ती में सबसे बड़ा योगदान है श्रेया घोषाल के स्वरों का, खासकर उनकी गायकी का अनूठा लहज़ा और अंदाज़ गीत को मज़ेदार बनाते हैं. श्रेया अपनी गायकी से सुनिधि चौहान और रेखा भारद्वाज के स्थापित क्षेत्र में प्रवेश करती हैं और इस जॉनर पर भी अपनी महारत को साबित करती हैं. अमित त्रिवेदी का संयोजन ‘गुलाल’ के ‘राणा जी और बीड़ो’ से ज्यादा प्रभावित लगता है. अमित त्रिवेदी के संगीत में कौसर के शब्द निश्चित रूप से इस फ़िल्म के गीतों को उनके पिछले कामों से अलग रंग देने में योगदान देते हैं.

‘आफ़तों के परिन्दे’ फ़िल्म में एक और शीर्षक गीत है, जिसकी ज़मीन फ़िल्म की थीम के ज्यादा करीब है. गीत के तेवर उग्र हैं और अमित त्रिवेदी के संयोजन मे रॉक का आधार किरदारों के परिचय को उचित माहौल देता है. सूरज जगन के साथ अन्य गायक दिव्य कुमार की गायकी बहुत कुछ सुखविंदर की याद दिलाती है.

‘छोकरा जवान हुआ’ सड़क-छाप मस्ती लिए टोली का गीत है, सुनिधि चौहान और विशाल ददलानी के स्वरों में. गीत में किरदारों की नोक-झोंक गीत को मज़ेदार बनाती है. फिर भी गीत की सफ़लता इस बात पर निर्भर करेगी कि पर्दे पर अर्जुन और परिणिति की केमिस्ट्री क्या कमाल दिखाती है.

कुल मिलाकर ‘इशकज़ादे’ में अमित त्रिवेदी फ़िल्म के किरदारों और देसी माहौल के मुताबिक लोकप्रिय संगीत देने में कामयाब हुए हए. कौसर मुनीर के शब्द भी एलबम को एक अलग रंग देते हैं. एक मनोरंजक एलबम है ‘इशकज़ादे’ जहां अमित त्रिवेदी, अपने नाम के साथ जुड़ी अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं. रेटिंग के लिहाज़ से ‘इशकज़ादे’ के संगीत को 3.25/5 (पांच में से सवा तीन)

संबंधित समाचार