बॉलीवुड के रंग में यूँ रंगा है मेरा मन...

Image caption जूलिया वेसेल बालीवुड की जर्मन पत्रिका इश्क की मुख्य संपादक हैं

बॉलीवुड फिल्मों के निर्माता और निर्देशक हैरान हैं कि उनकी फ़िल्में विदेशीयों में इतनी लोकप्रिय क्यूँ हो रही हैं. अप्रवासी भारतीयों के बीच बॉलीवुड की लोकप्रियता समझ में आती है लेकिन विदेशियों में बॉलीवुड का क्रेज़ देख कर 'रॉक स्टार' और 'जब वी मेट' के निर्देशक इम्तियाज अली भी आश्चर्यचकित हो गए.

इम्तियाज अली कहते हैं, "हाल ही में मैं स्पेन के बार्सीलोना में एक भारतीय रेस्टोरेंट में खाना खा रहा था. रेस्टोरेंट में मेरी फिल्म 'जब वी मेट' का गाना मौजा ही मौजा बज रहा था. अचानक 12 या 15 स्पैनिश लड़कियां उठ कर नाचने लगीं. वो बिलकुल उसी तरह से नाच रही थीं जैसे हमारी फिल्मों में लड़कियां नाचती हैं."

अली हैरान हो गए और जब उन लड़कियों से पूछा कि वो इतना अच्छा कैसे नाच लेती हैं तो उन्होंने कहा कि उन्हें बालीवुड फिल्मों और गानों से बहुत लगाव है.

हर तरफ धूम

अली ने जो बार्सीलोना में देखा वो स्पेन में हर जगह हो रहा है. स्पेन, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी और इंग्लैंड में जगह जगह बालीवुड डांस सिखाने के स्कूल खुल गए हैं.

जिस गाने की बात इम्तियाज अली कर रहे थे उसी गाने का मैड्रिड से हमें कुछ लड़कियों ने एक विडियो टेप भेजा है जिसमें वो इस गाने पर बॉलीवुड डांस सीख रही हैं. इस नाच में कई लड़कियां हैं जो अलग-अलग पश्चमी देशों की हैं.

रूस की मारिया कहती हैं, "बॉलीवुड फिल्मों की सब से आकर्षक बात है इनके गाने. हम लड़कियों को ये गाने बहुत अछे लगते हैं. काजोल, ऐश्वर्या या फिर प्रीटी जिंटा इन गानों में जिस से नाचती हैं उस से हमें प्रेरणा मिलती है. हमें औरत होने का एहसास होता है और इन इमोशंस को हम पहले बाहर नहीं ला सकते थे अब हम समाज की परवाह नहीं करते और खूब खुल कर नाचते हैं"

बढ़ती पहचान

स्विट्ज़रलैंड की मेसून अपने शहर ज्यूरिख में लड़कियों को हिंदी गाने पर बॉलीवुड डांस सिखाती हैं. वो कहती हैं, "मैं बारह साल से बॉलीवुड डांस का शो करती हूँ और सिखाती भी हूँ. यहाँ बॉलीवुड की हिट फिल्मों को सभी जानते हैं. सफल फिल्मों को जर्मन भाषा में डब किया जाता है और बेचा जाता है. यहाँ बॉलीवुड फिल्मों में लोगों को काफी दिलचस्पी है. और यहाँ बॉलीवुड का हर वो एक्टर पहचाना जाता है जो भारत में भी मशहूर है."

यूरोप में बॉलीवुड की लोकप्रियता को देख कर यह कहना ग़लत नहीं होगा कि भारतीय फिल्मों ने यहाँ के लोगों की सोच और उनके विचार को एक नयी आवाज़ दी है. मारिया शायद इसी आज़ादी और इसी आवाज़ की बात कर रही थीं.

गहरा असर

जर्मनी के कोलोन शहर के नसीम खान आधे भारतीय हैं और आधे जर्मन. वो बॉलीवुड पर एक पत्रिका छापते हैं.

Image caption जर्मनी के कोलोन शहर के नसीम खान बॉलीवुड पर एक पत्रिका छापते हैं.

खान कहते हैं कि यूरोप में पिछले तीस चालीस सालों से एक खालीपन था जिसे बॉलीवुड ने पूरा किया है.

खान कहते हैं, "यह प्यार, रोमांस, एहसास की बात है. यह पिछले तीस चालीस सालों से हॉलीवुड में नहीं दिखाई दे रहा था. ये जर्मन समाज से भी गायब था. इसी खालीपन को बॉलीवुड यहाँ दूर कर रहा है."

स्पेन या जर्मनी का बॉलीवुड से रिश्ता अधिक पुराना नहीं है. एक जर्मन टीवी ने 2006 में 'कभी ख़ुशी कभी गम' दिखाई थी जिसे 20 लाख लोगों ने देखा था.

इस फिल्म ने जर्मनी के लोगों पर, ख़ास तौर से महिलाओं पर, गहरा असर छोड़ा. जूलिया वेसेल बालीवुड की जर्मन पत्रिका इश्क की मुख्य संपादक हैं. इस फिल्म को देखने वाले 20 लाख जर्मन लोगों में से वो और उनकी माँ भी थीं.

जूलिया वेसेल के अनुसार,"यह फिल्म एक ट्रेन हादसे को देखने की तरह था जिस से आप अपनी निगाहें हटा नहीं सकते. मेरी माँ रोने लगीं. जबकि मेरी माँ काफी सख्त महिला हैं. मैंने उनको कभी फिल्म के दौरान रोते नहीं देखा. इस फिल्म की चर्चा इतनी हुई की इस टीवी चैनेल ने शाहरुख खान की 'कल हो न हो', और 'मैं हूँ ना' जैसी फिल्में भी दिखाईं. और तब से हम सब जर्मनी में बालीवुड के फैन हो गए."

बॉलीवुड की ओर

बॉलीवुड की धूम का असर और इसका नशा जर्मन फिल्मों की अभिनेत्री क्लॉडिया सिएसला पर खूब चढ़ा. वो बिग बॉस में भाग लेने मुंबई आयीं और यहीं की हो कर रह गयीं. क्लॉडिया अब हिंदी भी हिन्दुस्तानियों की तरह बोलती हैं.

क्लॉडिया सिएसला कहती हैं "मुझे बॉलीवुड बहुत पसंद है. मैं दीवानी हूँ. मैंने जर्मनी में बॉलीवुड फिल्में देखीं थीं. मैं जब मुंबई आई तो एहसास हुआ कि मैं अपने घर आई हूँ. अब जर्मनी जाती हूँ तो मुंबई को मिस करती हूँ. बॉलीवुड मेरा दायरा, मेरा समाज है. "

बॉलीवुड में काम करने यूरोप अमरीका और अफ्रीका से काफी लड़कियां और लड़के आज मुंबई में आये हुए हैं. वो हिंदी सीखने के अलावा बालीवुड डांस भी सीख रहे हैं. क्लॉडिया को दो फ़िल्में मिल गयी हैं.

क्लॉडिया की ही तरह आने वाले दिनों में हिंदी फिल्मों में अगर कई और गोरे चेहरे दिखें तो यह आश्चर्य की बात नहीं होगी.

संबंधित समाचार